लखनऊ: 'बचपन डे केयर' का जर्जर लोहे का गेट गिरने से 7 वर्षीय शिवा की मौत, परिजनों और स्थानीय लोगों में रोष
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ के 'बचपन डे केयर स्कूल' का एक पुराना और जर्जर लोहे का गेट 30 मई 2026 की सुबह अचानक टूटकर गिरने से 7 वर्षीय शिवा की मौत हो गई। यह दुखद घटना सुबह 9 से 9:30 बजे के बीच हुई, जब बच्चा स्कूल के प्रवेश द्वार के पास अपने भाई-बहनों और अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। भारी गेट के नीचे दब जाने से शिवा को गंभीर चोटें आईं और अस्पताल पहुँचने से पहले ही उसकी मृत्यु हो गई।
घटना का विवरण
जानकारी के अनुसार, 'बचपन डे केयर स्कूल' दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अंतर्गत संचालित एक ऐसा केंद्र है जो दृष्टिबाधित बच्चों को सेवाएँ प्रदान करता है। उस सुबह शिवा स्कूल के प्रवेश द्वार के पास खेल रहा था, तभी कथित तौर पर वर्षों से जर्जर पड़ा लोहे का भारी गेट अचानक टूटकर उस पर आ गिरा। स्थानीय लोग तत्काल उसे नजदीकी अस्पताल ले गए, जहाँ चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिवार का बयान
शिवा की माँ ने कहा, 'मेरा बेटा वहीं खेल रहा था। गेट बहुत खराब हालत में था। सब लोग अधिकारियों को इस बारे में बता रहे थे, लेकिन किसी ने नहीं सुना। जब बच्चे ने गेट को छुआ, तो वह मेरे बच्चे के ऊपर गिर गया।' उनके इस बयान ने प्रशासनिक लापरवाही के सवाल को और तीखा कर दिया है। गौरतलब है कि स्थानीय निवासी कथित तौर पर पहले से ही इस गेट की जर्जर हालत की शिकायत संबंधित अधिकारियों से करते आ रहे थे।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
एक स्थानीय नागरिक ने बताया, 'बच्चा सुबह घर से बाहर खेलने के लिए निकला था। वह डे-केयर सेंटर के गेट के सामने खेल रहा था। गेट पहले से ही जर्जर स्थिति में था और उसका वजन अधिक होने के कारण बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई।' घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया और लोगों ने प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल उठाए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
सदर एसडीएम मनोज सिंह ने कहा, 'डे-केयर सेंटर के पास कुछ बच्चे रहते हैं। सीसीटीवी फुटेज से पता चलता है कि एक बच्चा गेट खोलने की कोशिश कर रहा था। गेट क्यों गिरा, यह जाँच का विषय है।' उन्होंने यह भी कहा कि शिवा के पीड़ित परिवार को सहायता राशि दिलाई जाएगी। हालाँकि, सहायता की राशि और जाँच की समय-सीमा अभी स्पष्ट नहीं की गई है।
जवाबदेही और आगे की कार्रवाई
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब सरकारी भवनों और संस्थाओं की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर देशभर में सवाल उठते रहे हैं। दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अंतर्गत चलने वाले इस केंद्र में बुनियादी ढाँचे की उपेक्षा ने एक मासूम की जान ले ली। स्थानीय लोगों की माँग है कि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो और जिले के सभी सरकारी संस्थानों के ढाँचे की तत्काल जाँच कराई जाए। प्रशासन की ओर से जाँच के आश्वासन के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि क्या जवाबदेही तय होती है।