10 अगस्त 2026
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लखनऊ अग्निकांड: मंगेतर संग शादी के सपने देख रहे 29 वर्षीय नीलेश की आग में मौत, परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप

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लखनऊ अग्निकांड: मंगेतर संग शादी के सपने देख रहे 29 वर्षीय नीलेश की आग में मौत, परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप

सारांश

शादी के सपने देख रहे 3D डिज़ाइनर नीलेश और उनकी मंगेतर की लखनऊ के अलीगंज में कोचिंग संस्थान की आग में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि भवन 10 साल पहले अवैध घोषित था, फिर भी कार्रवाई नहीं हुई और दमकल देर से पहुँची।

मुख्य बातें

23 जून 2026 को लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग संस्थान में भीषण आग लगी।
29 वर्षीय 3D डिज़ाइनर नीलेश और उनकी मंगेतर — दोनों की आग में मौत हो गई; दोनों चार वर्षों से एक ही कार्यालय में कार्यरत थे।
परिजनों के अनुसार भवन को 10 वर्ष पहले अवैध घोषित किया जा चुका था, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
भवन में अग्निशमन उपकरण नहीं थे और दमकल देर से पहुँची — परिजनों का आरोप।
बिजली जाने से बायोमेट्रिक दरवाज़ा बंद हो गया; प्रत्यक्षदर्शियों ने खिड़की से कूदकर जान बचाई।
एक अन्य पीड़ित परिवार की एकमात्र कमाने वाली सदस्य की भी इस हादसे में मौत हो गई।

लखनऊ के अलीगंज स्थित एक कोचिंग संस्थान में 23 जून 2026 को लगी भीषण आग ने 29 वर्षीय 3D डिज़ाइनर नीलेश और उनकी मंगेतर — दोनों की जान ले ली। दोनों चार वर्षों से एक ही कार्यालय में काम करते थे, परिवारों की सहमति मिल चुकी थी और शादी की तैयारियाँ चल रही थीं। अब जिन घरों में खुशियाँ दस्तक देने को थीं, वहाँ सिर्फ मातम है।

मुख्य घटनाक्रम

परिजनों के अनुसार आग शॉर्ट सर्किट से भवन की निचली मंजिल पर भड़की, जिससे बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता बंद हो गया। बिजली आपूर्ति ठप होने के कारण बायोमेट्रिक दरवाज़ा नहीं खुल सका और सीढ़ियों में घना धुआँ भर गया। प्रत्यक्षदर्शी मोहम्मद आसिफ ने बताया कि उन्होंने तौलिए से मुँह ढककर खिड़की से कूदकर जान बचाई।

नीलेश के बड़े भाई ने बताया कि उन्हें किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से फोन आया और अस्पताल पहुँचने पर पता चला कि नीलेश नहीं रहे। नीलेश गेम के कैरेक्टर्स और प्रॉप्स बनाने का काम करते थे; उनकी मंगेतर भी उसी संस्थान में डिज़ाइनर थीं।

परिजनों के आरोप: लापरवाही और अवैध भवन

नीलेश के परिवार ने दमकल विभाग पर देरी का आरोप लगाते हुए कहा कि समय पर पानी पहुँचता तो कई जानें बचाई जा सकती थीं। उनके भाई ने सवाल उठाया कि जिस इमारत में आग लगी, उसे कथित तौर पर 10 वर्ष पहले ही अवैध घोषित किया जा चुका था, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। परिजनों का यह भी कहना है कि भवन में अग्निशमन के कोई उपकरण मौजूद नहीं थे।

एक और परिवार का सहारा छिना

हादसे में एक अन्य पीड़ित की बहन की भी मौत हो गई, जो परिवार की एकमात्र कमाने वाली सदस्य थीं। उनके पिता का दो वर्ष पहले निधन हो चुका है। परिवार अब पूरी तरह बेसहारा हो गया है।

आम जनता से अपील

पीड़ित परिजनों ने अपील की है कि ऐसी आपदाओं के दौरान लोग केवल वीडियो बनाने तक सीमित न रहें, बल्कि स्थानीय स्तर पर राहत कार्यों में सक्रिय भागीदारी करें ताकि कीमती जानें बचाई जा सकें।

क्या होगा आगे

यह अग्निकांड लखनऊ में व्यावसायिक भवनों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और अवैध निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े करता है। परिजनों ने दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवज़े की माँग की है। प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि व्यवस्थागत विफलता का दर्दनाक नतीजा है। यदि परिजनों का दावा सही है कि भवन को एक दशक पहले ही अवैध घोषित किया जा चुका था, तो सवाल उठता है कि नगर निगम और अग्निशमन विभाग की वार्षिक जाँच प्रक्रिया कहाँ थी। बायोमेट्रिक ताले और बिजली-आधारित निकास प्रणालियाँ आपात स्थिति में जानलेवा साबित हो सकती हैं — यह तथ्य भवन सुरक्षा नियमों की समीक्षा की माँग करता है। बिना जवाबदेही के हर ऐसी त्रासदी के बाद केवल संवेदनाएँ व्यक्त होती हैं और अगली घटना का इंतज़ार होता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ के अलीगंज में कोचिंग संस्थान में आग कैसे लगी?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग शॉर्ट सर्किट के कारण भवन की निचली मंजिल पर लगी। बिजली जाने से बायोमेट्रिक दरवाज़ा बंद हो गया और सीढ़ियों में धुआँ भर जाने से लोग बाहर नहीं निकल सके।
नीलेश कौन थे और इस हादसे में उनका क्या हुआ?
नीलेश 29 वर्षीय 3D डिज़ाइनर थे जो गेम के कैरेक्टर्स और प्रॉप्स बनाते थे। उनकी मंगेतर भी उसी संस्थान में डिज़ाइनर थीं। दोनों 23 जून 2026 को लखनऊ के अलीगंज में लगी इस आग में मारे गए।
परिजनों ने दमकल विभाग पर क्या आरोप लगाए हैं?
नीलेश के परिवार का आरोप है कि दमकल समय पर नहीं पहुँची। उनका कहना है कि यदि सही समय पर पानी पहुँचता तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।
क्या वह भवन पहले से अवैध घोषित था?
परिजनों के अनुसार जिस इमारत में आग लगी, उसे कथित तौर पर 10 वर्ष पहले ही अवैध घोषित किया जा चुका था। उनका सवाल है कि इसके बावजूद कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
इस हादसे से और कौन-से परिवार प्रभावित हुए?
एक अन्य पीड़ित की बहन भी इस आग में मारी गईं, जो परिवार की एकमात्र कमाने वाली सदस्य थीं। उनके पिता का दो वर्ष पहले निधन हो चुका था, जिससे परिवार अब पूरी तरह बेसहारा हो गया है।
राष्ट्र प्रेस
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