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लखनऊ अलीगंज अग्निकांड: चश्मदीद माला निगम बोलीं — 'एक ही रास्ता था, आग ने सब बंद कर दिया'

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लखनऊ अलीगंज अग्निकांड: चश्मदीद माला निगम बोलीं — 'एक ही रास्ता था, आग ने सब बंद कर दिया'

सारांश

लखनऊ के अलीगंज कोचिंग सेंटर में 23 जून को भड़की आग महज़ एक हादसा नहीं — यह अग्नि सुरक्षा की घोर लापरवाही की तस्वीर है। एकमात्र निकास, थंब लॉक दरवाज़ा और बंद छत ने मिलकर बच्चों को जाल में फँसा दिया।

मुख्य बातें

23 जून को लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में भीषण आग भड़की।
चश्मदीद माला निगम के अनुसार प्रारंभिक जाँच में एसी कंप्रेसर में विस्फोट को आग का कारण बताया गया।
इमारत में एकमात्र प्रवेश-निकास मार्ग था; थंब लॉक सिस्टम और बंद छत ने बच्चों का रास्ता रोका।
दो-तीन बच्चों ने जान बचाने के लिए इमारत से छलाँग लगाई और घायल हो गए।
एसी ब्लास्ट से निकली गैस ने इमारत के अंदर ऑक्सीजन का स्तर तेज़ी से घटा दिया।
घटना के बाद शहर के अन्य कोचिंग सेंटरों में अग्नि सुरक्षा जाँच की माँग उठी।

लखनऊ के अलीगंज स्थित एक कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड में चश्मदीद माला निगम ने बताया कि आग इतनी तीव्र गति से फैली कि इमारत के अंदर फँसे लोगों के पास जान बचाने का कोई विकल्प ही नहीं बचा था। 23 जून को घटी इस त्रासदी में थंब लॉक सिस्टम और बंद छत के दरवाज़े ने बच्चों की मुश्किलें और बढ़ा दीं।

चश्मदीद का बयान

माला निगम ने बताया, 'जान बचाने के लिए कुछ भी करना संभव नहीं था क्योंकि आग बहुत तेज़ी से फैल गई थी। अंदर जाने का भी कोई रास्ता नहीं था, क्योंकि इमारत में आने-जाने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता था।' उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जाँच के अनुसार एसी के कंप्रेसर में विस्फोट हुआ, जिसके बाद आग पूरी इमारत में फैल गई।

इमारत की संरचना और आग का फैलाव

माला निगम के अनुसार, इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर एक पेट शॉप थी जहाँ कुत्ते, बिल्लियाँ और अन्य जानवर रखे गए थे। उसके ऊपर एक गोदाम था और सबसे ऊपरी मंजिल पर कोचिंग सेंटर व लाइब्रेरी थी, जहाँ उस वक्त बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। आग लगते ही वहाँ मौजूद लोगों ने जानवरों के पिंजरे बाहर निकालने की कोशिश की।

ऊपरी मंजिलों से केवल गिने-चुने लोग ही नीचे उतर पाए। दो-तीन बच्चों ने जान बचाने के लिए इमारत से नीचे छलाँग लगाई, जिससे वे घायल हो गए।

लॉक दरवाज़ों ने बढ़ाई मुसीबत

माला निगम ने बताया कि इमारत का मुख्य दरवाज़ा थंब लॉक सिस्टम से बंद था, जिसे बच्चे समय रहते नहीं खोल पाए। इसके अलावा छत का दरवाज़ा भी शटर से लॉक था, जिससे बच्चे छत तक नहीं पहुँच सके और उनके पास बचने का कोई विकल्प नहीं बचा।

उन्होंने बताया कि कई बच्चे एक-दूसरे से गले मिलकर अपने परिजनों को फोन कर रहे थे। कुछ बच्चे डर के कारण टॉयलेट में छिप गए, लेकिन एसी ब्लास्ट से निकलने वाली गैस ने ऑक्सीजन का स्तर तेज़ी से घटा दिया, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई।

मदद पहुँचाने की कोशिश

माला निगम ने बताया कि आग की लपटें इतनी भयावह थीं कि पास जाना तक संभव नहीं था। एक सोशल वर्कर होने के नाते उन्होंने तत्काल घटना के वीडियो और जानकारी व्हाट्सऐप ग्रुप्स के ज़रिये साझा की, ताकि राहत और बचाव दल जल्द से जल्द मौके पर पहुँच सके।

आगे की जाँच

अधिकारियों के अनुसार, इस अग्निकांड की विस्तृत जाँच जारी है। इमारत में एकल निकास मार्ग, थंब लॉक सिस्टम और बंद छत — ये सभी पहलू अग्निशमन सुरक्षा मानकों के अनुपालन पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। इस घटना के बाद शहर के अन्य कोचिंग सेंटरों में भी सुरक्षा जाँच की माँग उठने लगी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस व्यापक लापरवाही का प्रतिबिंब है जो देशभर के अनियमित कोचिंग सेंटरों में पनप रही है — एकल निकास, डिजिटल लॉक और बिना फायर ऑडिट की इमारतें। दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर हादसे के बाद भी यदि नियामक तंत्र नहीं चेता, तो यह त्रासदी उसी निष्क्रियता की अगली कड़ी है। असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकारें कोचिंग सेंटरों के लिए अनिवार्य फायर NOC और नियमित निरीक्षण को ज़मीन पर उतारेंगी, या फिर अगले हादसे का इंतज़ार करेंगी।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ अलीगंज कोचिंग सेंटर में आग कैसे लगी?
प्रारंभिक जाँच के अनुसार इमारत में लगे एसी के कंप्रेसर में विस्फोट हुआ, जिसके बाद आग तेज़ी से पूरे भवन में फैल गई। यह जानकारी चश्मदीद माला निगम ने दी है; अधिकारियों की विस्तृत जाँच अभी जारी है।
बच्चे इमारत से बाहर क्यों नहीं निकल पाए?
इमारत में आने-जाने के लिए केवल एक ही रास्ता था और मुख्य दरवाज़ा थंब लॉक सिस्टम से बंद था, जिसे बच्चे समय पर नहीं खोल पाए। इसके अलावा छत का दरवाज़ा भी शटर से लॉक था, जिससे ऊपर जाने का विकल्प भी बंद हो गया।
इस हादसे में बच्चों को किस तरह की चोटें आईं?
चश्मदीद के अनुसार दो-तीन बच्चों ने जान बचाने के लिए इमारत से नीचे छलाँग लगाई, जिससे वे घायल हो गए। एसी ब्लास्ट से निकली गैस के कारण इमारत के अंदर ऑक्सीजन का स्तर भी तेज़ी से गिरा।
इमारत में कोचिंग सेंटर के अलावा और क्या था?
चश्मदीद माला निगम के अनुसार ग्राउंड फ्लोर पर एक पेट शॉप थी जहाँ कुत्ते, बिल्लियाँ और अन्य जानवर रखे गए थे, उसके ऊपर एक गोदाम था और सबसे ऊपरी मंजिल पर कोचिंग सेंटर व लाइब्रेरी थी।
इस हादसे के बाद क्या कार्रवाई की माँग उठ रही है?
इस घटना के बाद लखनऊ सहित अन्य शहरों के कोचिंग सेंटरों में अग्नि सुरक्षा जाँच और अनिवार्य फायर NOC की माँग उठने लगी है। अधिकारियों के अनुसार मामले की विस्तृत जाँच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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