10 अगस्त 2026
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लखनऊ अग्निकांड: बायोमेट्रिक लॉक ने रोका रास्ता, बिजली के तार से उतरे आसिफ — 15 की मौत

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लखनऊ अग्निकांड: बायोमेट्रिक लॉक ने रोका रास्ता, बिजली के तार से उतरे आसिफ — 15 की मौत

सारांश

लखनऊ के अलीगंज में कमर्शियल बिल्डिंग में आग — 15 मौतें, फायर अलार्म फेल, बायोमेट्रिक दरवाजा बंद, फायर ब्रिगेड एक घंटे बाद। बचे आसिफ की आपबीती बताती है कि सुरक्षा तंत्र की हर परत उस दिन नाकाम रही।

मुख्य बातें

लखनऊ के अलीगंज स्थित कमर्शियल बिल्डिंग में 23 जून 2026 को लगी आग में 15 लोगों की मौत हो गई।
बायोमेट्रिक एंट्री सिस्टम बिजली गुल होने पर लॉक हो गया, जिससे लोग दूसरी मंजिल पर फंस गए।
बचे मोहम्मद आसिफ सहित चार-पाँच लोग बिजली के तार के सहारे नीचे उतरे।
फायर अलार्म काम नहीं कर रहा था; फायर ब्रिगेड एक घंटे से ज़्यादा देरी से पहुंची।
जयंत गुप्ता ने खिड़की से कूदने की कोशिश में कूल्हे की हड्डी तुड़वाई; कुछ लोग वॉशरूम में बंद होकर दम घुटने से मारे गए।
चश्मदीद माला निगम के अनुसार छत का शटर लॉक था, जिससे बच्चे ऊपर ही फंसे रहे।

लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक कमर्शियल बिल्डिंग में 23 जून 2026 को लगी भीषण आग में 15 लोगों की मौत हो गई। इस त्रासदी में बाल-बाल बचे मोहम्मद आसिफ ने बताया कि बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर स्थित स्टूडियो का प्रवेश द्वार बायोमेट्रिक सिस्टम के फेल हो जाने के कारण बंद हो गया था, और उन्हें जान बचाने के लिए बिजली के तार के सहारे नीचे उतरना पड़ा।

मुख्य घटनाक्रम

आसिफ के अनुसार, हादसा दोपहर के लंच के बाद हुआ जब स्टाफ के लोगों ने शॉर्ट सर्किट से आग लगने की सूचना दी। उन्होंने बताया, 'हम लंच के बाद बैठे थे और दोबारा काम शुरू करने ही वाले थे कि स्टाफ के लोग आए और बताया कि शॉर्ट सर्किट जैसा कुछ हुआ है और आग लग गई है।' जब लोग बाहर निकलने की कोशिश करने लगे, तो बायोमेट्रिक अटेंडेंस मशीन बिजली गुल होने के कारण काम नहीं कर रही थी और दरवाजा लॉक रहा।

तार के सहारे जान बचाई

आसिफ ने बताया कि किसी तरह दूसरे कमरे का दरवाजा खोलकर बाहर निकले, लेकिन तब तक सीढ़ियों में घना धुआं भर चुका था। 'हम वापस भागे, तौलिये से मुंह ढका और बचने की कोशिश की। खिड़की के पास जाने पर और ज़्यादा धुआं अंदर आ रहा था।' एक छोटी खिड़की के पास से गुजरता बिजली का तार दिखा, जिसके सहारे आसिफ सहित चार-पाँच लोग नीचे उतर सके।

फंसे लोगों की दर्दनाक कोशिशें

आसिफ के साथी जयंत गुप्ता ने कांच की खिड़की तोड़कर कूदने की कोशिश की, लेकिन वे लोहे की रेलिंग पर गिर गए, जिससे उनके कूल्हे की हड्डी टूट गई। वे करीब आधे घंटे तक सड़क पर पड़े रहे, तब जाकर एम्बुलेंस पहुंची। दम घुटने से बचने की कोशिश में कुछ लोगों ने खुद को वॉशरूम में बंद कर लिया — लेकिन वे बच नहीं पाए।

सुरक्षा तंत्र की विफलता

आसिफ ने बताया कि फायर अलार्म भी काम नहीं कर रहा था। फायर ब्रिगेड एक घंटे से ज़्यादा समय बाद पहुंची। इसी हादसे की चश्मदीद माला निगम ने बताया कि आग की लपटें इतनी तेज थीं कि किसी के लिए भी बिल्डिंग के अंदर जाकर जान बचाना मुमकिन नहीं था। उन्होंने कहा, 'छत का दरवाजा शटर से लॉक था। बच्चे फंस गए और अंदर ही बंद रह गए।' माला के अनुसार ऊपर से केवल कुछ ही लोग नीचे आ पाए और दो-तीन बच्चे कूद गए जो घायल हो गए।

आगे क्या

यह हादसा व्यावसायिक इमारतों में अग्नि सुरक्षा मानकों की खामियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बायोमेट्रिक लॉक और बंद छत के शटर जैसी संरचनात्मक खामियाँ इस त्रासदी को और गहरा करती हैं। अधिकारियों द्वारा जाँच की जानकारी अभी सामने आनी बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह व्यावसायिक इमारतों में अग्नि सुरक्षा नियमों के कागज़ी अनुपालन की कड़वी हकीकत है। बायोमेट्रिक दरवाजे जो बिजली जाने पर लॉक हो जाएं, फायर अलार्म जो आग में भी न बजे, और छत के शटर जो बंद रहें — ये खामियाँ किसी एक इमारत की नहीं, पूरे नियामक तंत्र की विफलता की कहानी कहती हैं। फायर ब्रिगेड का एक घंटे से ज़्यादा देर से पहुंचना यह सवाल उठाता है कि शहरी आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र कितना तैयार है। जब तक जाँच केवल इमारत मालिक तक सीमित रहेगी और अग्नि सुरक्षा ऑडिट की व्यवस्था नहीं होगी, ऐसे हादसे दोहराते रहेंगे।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ अलीगंज अग्निकांड में कितने लोगों की मौत हुई?
23 जून 2026 को लखनऊ के अलीगंज स्थित कमर्शियल बिल्डिंग में लगी आग में 15 लोगों की मौत हो गई। यह हादसा दोपहर में शॉर्ट सर्किट से शुरू हुआ बताया जा रहा है।
बायोमेट्रिक सिस्टम ने आग में कैसे मुसीबत बढ़ाई?
आग लगने पर बिजली गुल हो गई, जिससे बिल्डिंग की दूसरी मंजिल का बायोमेट्रिक एंट्री गेट लॉक हो गया और फिंगरप्रिंट सिस्टम काम नहीं किया। इससे लोग तुरंत बाहर नहीं निकल पाए और धुएं में फंस गए।
बचे मोहम्मद आसिफ ने जान कैसे बचाई?
आसिफ और चार-पाँच अन्य लोगों ने एक छोटी खिड़की के पास से गुजरते बिजली के तार के सहारे नीचे उतरकर जान बचाई। सीढ़ियों में धुआं भर जाने और दरवाजा लॉक रहने के कारण यही एकमात्र रास्ता बचा था।
क्या फायर ब्रिगेड समय पर पहुंची?
बचे आसिफ के अनुसार फायर ब्रिगेड एक घंटे से ज़्यादा समय बाद पहुंची। फायर अलार्म भी काम नहीं कर रहा था, जिससे लोगों को आग की गंभीरता का अंदाजा देर से हुआ।
इस हादसे में और कौन-सी सुरक्षा खामियाँ सामने आईं?
चश्मदीद माला निगम के अनुसार छत का दरवाजा शटर से लॉक था, जिससे ऊपर फंसे बच्चे बाहर नहीं निकल सके। इसके अलावा फायर अलार्म की विफलता और बायोमेट्रिक लॉक — तीन अलग-अलग सुरक्षा तंत्र एक साथ नाकाम रहे।
राष्ट्र प्रेस
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