लखनऊ अग्निकांड: बायोमेट्रिक लॉक ने रोका रास्ता, बिजली के तार से उतरे आसिफ — 15 की मौत
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक कमर्शियल बिल्डिंग में 23 जून 2026 को लगी भीषण आग में 15 लोगों की मौत हो गई। इस त्रासदी में बाल-बाल बचे मोहम्मद आसिफ ने बताया कि बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर स्थित स्टूडियो का प्रवेश द्वार बायोमेट्रिक सिस्टम के फेल हो जाने के कारण बंद हो गया था, और उन्हें जान बचाने के लिए बिजली के तार के सहारे नीचे उतरना पड़ा।
मुख्य घटनाक्रम
आसिफ के अनुसार, हादसा दोपहर के लंच के बाद हुआ जब स्टाफ के लोगों ने शॉर्ट सर्किट से आग लगने की सूचना दी। उन्होंने बताया, 'हम लंच के बाद बैठे थे और दोबारा काम शुरू करने ही वाले थे कि स्टाफ के लोग आए और बताया कि शॉर्ट सर्किट जैसा कुछ हुआ है और आग लग गई है।' जब लोग बाहर निकलने की कोशिश करने लगे, तो बायोमेट्रिक अटेंडेंस मशीन बिजली गुल होने के कारण काम नहीं कर रही थी और दरवाजा लॉक रहा।
तार के सहारे जान बचाई
आसिफ ने बताया कि किसी तरह दूसरे कमरे का दरवाजा खोलकर बाहर निकले, लेकिन तब तक सीढ़ियों में घना धुआं भर चुका था। 'हम वापस भागे, तौलिये से मुंह ढका और बचने की कोशिश की। खिड़की के पास जाने पर और ज़्यादा धुआं अंदर आ रहा था।' एक छोटी खिड़की के पास से गुजरता बिजली का तार दिखा, जिसके सहारे आसिफ सहित चार-पाँच लोग नीचे उतर सके।
फंसे लोगों की दर्दनाक कोशिशें
आसिफ के साथी जयंत गुप्ता ने कांच की खिड़की तोड़कर कूदने की कोशिश की, लेकिन वे लोहे की रेलिंग पर गिर गए, जिससे उनके कूल्हे की हड्डी टूट गई। वे करीब आधे घंटे तक सड़क पर पड़े रहे, तब जाकर एम्बुलेंस पहुंची। दम घुटने से बचने की कोशिश में कुछ लोगों ने खुद को वॉशरूम में बंद कर लिया — लेकिन वे बच नहीं पाए।
सुरक्षा तंत्र की विफलता
आसिफ ने बताया कि फायर अलार्म भी काम नहीं कर रहा था। फायर ब्रिगेड एक घंटे से ज़्यादा समय बाद पहुंची। इसी हादसे की चश्मदीद माला निगम ने बताया कि आग की लपटें इतनी तेज थीं कि किसी के लिए भी बिल्डिंग के अंदर जाकर जान बचाना मुमकिन नहीं था। उन्होंने कहा, 'छत का दरवाजा शटर से लॉक था। बच्चे फंस गए और अंदर ही बंद रह गए।' माला के अनुसार ऊपर से केवल कुछ ही लोग नीचे आ पाए और दो-तीन बच्चे कूद गए जो घायल हो गए।
आगे क्या
यह हादसा व्यावसायिक इमारतों में अग्नि सुरक्षा मानकों की खामियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बायोमेट्रिक लॉक और बंद छत के शटर जैसी संरचनात्मक खामियाँ इस त्रासदी को और गहरा करती हैं। अधिकारियों द्वारा जाँच की जानकारी अभी सामने आनी बाकी है।