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लखनऊ विश्वविद्यालय फीस वृद्धि: राजेंद्र पाल गौतम ने छात्रों का साथ दिया, योगी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

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लखनऊ विश्वविद्यालय फीस वृद्धि: राजेंद्र पाल गौतम ने छात्रों का साथ दिया, योगी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

सारांश

लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस दोगुनी होने और छात्रों के निष्कासन के बाद कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम मैदान में उतरे। उन्होंने योगी सरकार पर पेपर लीक, बेरोजगारी और छात्रवृत्ति बंद करने के आरोप लगाए — और 2027 विधानसभा चुनाव को इन मुद्दों की असली परीक्षा बताया।

मुख्य बातें

राजेंद्र पाल गौतम ने 16 जुलाई को लखनऊ विश्वविद्यालय पहुँचकर फीस वृद्धि से प्रभावित छात्रों से मुलाकात की।
बीकॉम ऑनर्स की फीस बढ़ाकर लगभग ₹1 लाख की गई; अन्य पाठ्यक्रमों की फीस लगभग दोगुनी हुई।
विरोध करने वाले छात्रों पर मुकदमे दर्ज हुए और छुट्टियों के दौरान निष्कासन की कार्रवाई की गई।
गौतम ने आरोप लगाया कि देश में लगभग 100 परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं।
SC/ST, OBC और EWS वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति और फेलोशिप बंद होने का आरोप लगाया।
कांग्रेस ने 2027 यूपी विधानसभा चुनाव में इन मुद्दों को केंद्र में रखने की घोषणा की।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम 16 जुलाई को लखनऊ विश्वविद्यालय पहुँचे और फीस वृद्धि तथा छात्र निष्कासन से त्रस्त विद्यार्थियों से सीधी मुलाकात की। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अचानक पाठ्यक्रम शुल्क में भारी बढ़ोतरी कर दी है और विरोध करने वाले छात्रों पर मुकदमे दर्ज कर उन्हें निष्कासित किया गया।

फीस वृद्धि का मामला

गौतम के अनुसार, बीकॉम ऑनर्स जैसे सामान्य डिग्री पाठ्यक्रम की फीस बढ़ाकर लगभग ₹1 लाख कर दी गई है, जबकि अधिकांश अन्य कोर्सों की फीस लगभग दोगुनी हो गई है। छात्र कुलपति से मिलकर अपनी बात रखना चाहते थे, किंतु कथित तौर पर उन्हें मुलाकात का आश्वासन देकर बिना बातचीत के ही टाल दिया गया। जब छात्र कुलपति की गाड़ियों के सामने खड़े हो गए, तो उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए गए और छुट्टियों के दौरान उन्हें विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया।

सरकार पर आरोप

राज्य सरकार की आलोचना करते हुए गौतम ने कहा कि सरकार न तो युवाओं को रोजगार दे पा रही है और न ही परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बना पा रही है। उन्होंने दावा किया कि देश में लगभग 100 परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं। उनके अनुसार, ऐसे हालात में सरकार छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन पर कार्रवाई कर रही है और लगातार फीस बढ़ाती जा रही है।

आम जनता और वंचित वर्ग पर असर

गौतम ने यह भी आरोप लगाया कि छात्रवृत्ति और फेलोशिप बंद कर दी गई हैं, जिससे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना और कठिन हो गया है। उन्होंने कहा कि आज इंजीनियरिंग, मेडिकल और लॉ जैसी डिग्रियों की पढ़ाई सरकारी संस्थानों में भी लाखों से करोड़ों रुपये तक की लागत वाली हो गई है। उनके अनुसार, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, विज्ञान और श्रम मंत्रालय के संयुक्त बजट से भी अधिक राशि भारतीय परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदन पर खर्च कर रहे हैं।

परीक्षा प्रणाली और आउटसोर्सिंग पर सवाल

गौतम ने परीक्षा तंत्र पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले CBSE, UPSC, SSC और रेलवे भर्ती बोर्ड जैसी सरकारी संस्थाएँ परीक्षाएँ आयोजित करती थीं, लेकिन अब आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से परीक्षाएँ कराई जा रही हैं, जिससे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। डिग्री मिलने के बाद भी रोजगार की कोई गारंटी नहीं है और बड़ी संख्या में युवा बेरोजगार रह जाते हैं।

कांग्रेस संगठन और 'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर रुख

कांग्रेस प्रभारी ने बताया कि प्रदेश स्तर से लेकर ग्राम पंचायत और बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने का अभियान चल रहा है। उन्होंने 'वन नेशन, वन इलेक्शन' प्रस्ताव को लेकर केंद्र सरकार पर विपक्ष को कमजोर करने का आरोप लगाया और कहा कि इसके पीछे 'वन नेशन, वन पार्टी' की सोच काम कर रही है। उन्होंने कहा कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जनता इन मुद्दों का जवाब देगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ फीस वृद्धि और छात्रवृत्ति कटौती एक साथ हो रही है। असली सवाल यह है कि जब परीक्षा प्रणाली आउटसोर्स हो चुकी है, रोजगार की गारंटी नहीं है और SC/ST/OBC छात्रों की फेलोशिप बंद है — तो उच्च शिक्षा किसके लिए बची है? कांग्रेस का यह दौरा राजनीतिक रूप से सुविचारित है, लेकिन इससे छात्रों की तात्कालिक समस्याएँ — निष्कासन वापसी और फीस कटौती — हल नहीं होतीं। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले युवा मतदाताओं को साधने की यह कोशिश तब तक विश्वसनीय नहीं होगी जब तक कांग्रेस ठोस नीतिगत विकल्प सामने न रखे।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस कितनी बढ़ाई गई है?
कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के अनुसार, बीकॉम ऑनर्स जैसे सामान्य डिग्री पाठ्यक्रम की फीस लगभग ₹1 लाख कर दी गई है और अधिकांश अन्य पाठ्यक्रमों की फीस लगभग दोगुनी हो गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों को निष्कासित क्यों किया गया?
गौतम के अनुसार, फीस वृद्धि के विरोध में छात्र कुलपति से मिलना चाहते थे और उनकी गाड़ियों के सामने खड़े हो गए। इसके बाद उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए गए और छुट्टियों के दौरान उन्हें विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया।
राजेंद्र पाल गौतम ने पेपर लीक पर क्या कहा?
गौतम ने आरोप लगाया कि देश में लगभग 100 परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षाएँ अब CBSE, UPSC जैसी सरकारी संस्थाओं के बजाय आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से कराई जा रही हैं, जिससे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
SC/ST और OBC छात्रों पर फीस वृद्धि का क्या असर पड़ेगा?
गौतम के अनुसार, छात्रवृत्ति और फेलोशिप बंद होने से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना और कठिन हो गया है। इन वर्गों के छात्र फीस वृद्धि से सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर कांग्रेस का क्या रुख है?
गौतम ने 'वन नेशन, वन इलेक्शन' प्रस्ताव को विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश बताया और आरोप लगाया कि इसके पीछे 'वन नेशन, वन पार्टी' की सोच काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को महंगाई, पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे जनहित के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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