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मध्य प्रदेश कैबिनेट का बड़ा फैसला: भोपाल मेट्रो को ₹13,565 करोड़, किसानों और IT को भी राहत

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मध्य प्रदेश कैबिनेट का बड़ा फैसला: भोपाल मेट्रो को ₹13,565 करोड़, किसानों और IT को भी राहत

सारांश

मुख्यमंत्री मोहन यादव की कैबिनेट ने एक ही बैठक में भोपाल मेट्रो को ₹13,565 करोड़, IT डिजिटल योजनाओं को ₹235 करोड़ और किसान उपार्जन के लिए ₹8,600 करोड़ की प्रत्याभूति सहित ₹13,800 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को एकसाथ मंजूरी दी — बुनियादी ढाँचे से लेकर कृषि तक व्यापक दांव।

मुख्य बातें

भोपाल मेट्रो रेल परियोजना की पुनरीक्षित कुल लागत ₹13,565.84 करोड़ स्वीकृत; मूल लागत ₹6,941.40 करोड़ से बढ़ाई गई।
राज्य IT संवर्ग और डिजिटल कार्य योजना के लिए ₹235.63 करोड़ , अवधि अप्रैल 2026 से मार्च 2031 ।
कपास पर मंडी फीस 1% से घटाकर 0.5% ; प्रदेश की 158 जिनिंग मिलों को सीधा लाभ।
सामान्य मंडी शुल्क ₹1 से बढ़ाकर ₹1.50 ; अनुमानित अतिरिक्त आय ₹500 करोड़ — किसान सड़क और कृषि अनुसंधान में उपयोग।
MPSCSC और मार्कफेड को फसल उपार्जन हेतु ₹8,600 करोड़ की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति, अवधि अप्रैल 2026 से मार्च 2027 ।
MPSCSC को अलग से ₹29,500 करोड़ की शासकीय प्रत्याभूति भी स्वीकृत।

मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार, 9 जून 2026 को हुई मंत्रिपरिषद बैठक में मध्य प्रदेश सरकार ने बुनियादी ढाँचे, डिजिटल प्रशासन और कृषि क्षेत्र से जुड़े कुल ₹13,800 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं और योजनाओं को हरी झंडी दी। इनमें सबसे बड़ा निर्णय भोपाल मेट्रो रेल परियोजना की पुनरीक्षित लागत ₹13,565.84 करोड़ की मंजूरी रहा।

भोपाल मेट्रो: संशोधित लागत और वित्त पोषण

मंत्रिपरिषद ने भोपाल मेट्रो की मूल लागत ₹6,941.40 करोड़ में ₹3,092.22 करोड़ की अतिरिक्त लागत जोड़कर संशोधित कुल लागत ₹10,033.62 करोड़ के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके अतिरिक्त उद्योग के स्वीकृत मानदंडों के अनुसार ₹3,532.22 करोड़ का अतिरिक्त वित्त पोषण भी स्वीकृत किया गया, जिससे परियोजना की पुनरीक्षित कुल स्वीकृत राशि ₹13,565.84 करोड़ हो गई।

इस अतिरिक्त वित्त पोषण में भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा ₹995.09 करोड़ की अतिरिक्त इक्विटी, केंद्रीय करों के लिए ₹84.54 करोड़ का अधीनस्थ ऋण, वित्तपोषण एजेंसी बैंकों से ₹1,620.64 करोड़ का अतिरिक्त पीटीए/आंतरिक ऋण, भूमि लागत और पुनर्वास के लिए ₹138.38 करोड़ का अधीनस्थ ऋण तथा राज्य करों और आईडीसी लागत के लिए क्रमशः ₹446.35 करोड़ एवं ₹246.41 करोड़ का अतिरिक्त अनुदान शामिल है।

डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन: IT संवर्ग को ₹235 करोड़

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत राज्य IT संवर्ग परामर्श सेवाओं और सूचना प्रौद्योगिकी कार्य योजना के निरंतर संचालन के लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की पाँच वर्षीय अवधि हेतु ₹235.63 करोड़ स्वीकृत किए गए। इसमें से ₹180.20 करोड़ IT संवर्ग परामर्श सेवाओं और ₹55.43 करोड़ IT कार्य योजना के लिए निर्धारित हैं।

यह योजना राज्य सरकार की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रक्रिया की आधारभूत आवश्यकता मानी जा रही है। भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), बिग डेटा एनालिटिक्स, ब्लॉकचेन और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में राज्य की तैयारी को सुदृढ़ करने के लिए भी इसका उपयोग किया जाएगा। वीबीटीसी प्रशिक्षण केंद्र के माध्यम से अधिकारियों एवं कर्मचारियों को IT, ई-गवर्नेंस, साइबर सुरक्षा और डेटा प्रबंधन पर नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कपास और मंडी शुल्क में बदलाव: किसानों और उद्योग को राहत

मंत्रिपरिषद ने कपास पर मंडी फीस की दर 1 प्रतिशत से घटाकर 0.5 प्रतिशत करने का निर्णय लिया। प्रदेश में लगभग 158 कपास जिनिंग मिलें हैं, जिनकी प्रसंस्करण क्षमता करीब 13 लाख मीट्रिक टन है। सरकार के अनुसार इस कटौती से जिनिंग मिलें पड़ोसी राज्यों में पलायन के बजाय मध्य प्रदेश में ही व्यवसाय करना पसंद करेंगी, जिससे रोज़गार और जीएसटी संग्रहण दोनों में वृद्धि होगी।

दूसरी ओर, सामान्य मंडी शुल्क को ₹1 से बढ़ाकर ₹1.50 किया गया है। इस वृद्धि से चालू वर्ष में लगभग ₹500 करोड़ की अतिरिक्त आय का अनुमान है। बढ़े हुए शुल्क का उपयोग किसान सड़क निधि, ग्रामीण सड़क विकास, मंडियों की मूलभूत संरचना, गौ-संवर्धन निधि, मुख्यमंत्री कृषक जीवन कल्याण योजना और कृषि अनुसंधान एवं अधोसंरचना विकास में किया जाएगा। निराश्रित शुल्क 20 पैसे पर यथावत रखा गया है।

फसल उपार्जन के लिए ₹8,600 करोड़ की सरकारी प्रत्याभूति

आगामी रबी विपणन वर्ष 2026 में गेहूँ और खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान एवं मोटे अनाजों के उपार्जन को सुनिश्चित करने के लिए एमपी स्टेट सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन लि. (MPSCSC) और मार्कफेड को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक के लिए ₹8,600 करोड़ की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति देने की मंजूरी दी गई। इसके अतिरिक्त MPSCSC को उसी अवधि के लिए ₹29,500 करोड़ की अलग निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति भी उपलब्ध कराई गई है।

गौरतलब है कि यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब राज्य में कृषि खरीद व्यवस्था को बैंकों और नाबार्ड से ऋण लेकर चलाया जाता है और आरबीआई की खाद्यान्न साख सीमा की शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है। इन फैसलों से प्रदेश की कृषि और औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

800 करोड़ से अधिक की मंजूरी प्रभावशाली दिखती है, लेकिन भोपाल मेट्रो की लागत मूल अनुमान से लगभग दोगुनी हो जाना — ₹6,941 करोड़ से ₹13,565 करोड़ — बड़े बुनियादी ढाँचा प्रकल्पों में लागत नियंत्रण की पुरानी समस्या को फिर उजागर करता है। कपास मंडी फीस में कटौती उद्योग के लिए स्वागत योग्य है, पर मंडी शुल्क वृद्धि का बोझ अंततः किस पर पड़ेगा — किसान पर या व्यापारी पर — यह स्पष्ट नहीं है। ₹8,600 करोड़ की प्रत्याभूति किसान उपार्जन को तरलता देती है, लेकिन राज्य की देनदारियों में इज़ाफा भी करती है; दीर्घकालिक वित्तीय अनुशासन पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोपाल मेट्रो रेल परियोजना की संशोधित लागत कितनी है?
मंत्रिपरिषद ने भोपाल मेट्रो की पुनरीक्षित कुल लागत ₹13,565.84 करोड़ स्वीकृत की है। यह मूल लागत ₹6,941.40 करोड़ में ₹3,092.22 करोड़ की अतिरिक्त लागत और ₹3,532.22 करोड़ के अतिरिक्त वित्त पोषण को मिलाकर बनी है।
मध्य प्रदेश में कपास पर मंडी फीस क्यों घटाई गई?
प्रदेश की लगभग 158 कपास जिनिंग मिलों को पड़ोसी राज्यों में पलायन से रोकने और उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए मंडी फीस 1% से घटाकर 0.5% की गई है। सरकार के अनुसार इससे रोज़गार और जीएसटी संग्रहण दोनों में वृद्धि होगी।
MPSCSC और मार्कफेड को ₹8,600 करोड़ की प्रत्याभूति किसलिए दी गई?
यह प्रत्याभूति रबी विपणन वर्ष 2026 में गेहूँ और खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान व मोटे अनाजों की सरकारी खरीद के लिए बैंकों से ऋण लेने हेतु दी गई है। इसकी अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक है।
मध्य प्रदेश की IT डिजिटल योजना में क्या शामिल है?
राज्य IT संवर्ग परामर्श सेवाओं और IT कार्य योजना के लिए अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक ₹235.63 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। इसमें AI, बिग डेटा, ब्लॉकचेन और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सरकारी विभागों की क्षमता बढ़ाना और ई-गवर्नेंस को मज़बूत करना शामिल है।
मंडी शुल्क वृद्धि से किसानों को क्या फायदा होगा?
मंडी शुल्क ₹1 से बढ़ाकर ₹1.50 किया गया है, जिससे अनुमानित ₹500 करोड़ की अतिरिक्त आय होगी। इस राशि का उपयोग किसान सड़क निधि, मंडियों की मूलभूत संरचना, गौ-संवर्धन और कृषि अनुसंधान में किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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