मध्य प्रदेश कैबिनेट का बड़ा फैसला: भोपाल मेट्रो को ₹13,565 करोड़, किसानों और IT को भी राहत
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार, 9 जून 2026 को हुई मंत्रिपरिषद बैठक में मध्य प्रदेश सरकार ने बुनियादी ढाँचे, डिजिटल प्रशासन और कृषि क्षेत्र से जुड़े कुल ₹13,800 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं और योजनाओं को हरी झंडी दी। इनमें सबसे बड़ा निर्णय भोपाल मेट्रो रेल परियोजना की पुनरीक्षित लागत ₹13,565.84 करोड़ की मंजूरी रहा।
भोपाल मेट्रो: संशोधित लागत और वित्त पोषण
मंत्रिपरिषद ने भोपाल मेट्रो की मूल लागत ₹6,941.40 करोड़ में ₹3,092.22 करोड़ की अतिरिक्त लागत जोड़कर संशोधित कुल लागत ₹10,033.62 करोड़ के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके अतिरिक्त उद्योग के स्वीकृत मानदंडों के अनुसार ₹3,532.22 करोड़ का अतिरिक्त वित्त पोषण भी स्वीकृत किया गया, जिससे परियोजना की पुनरीक्षित कुल स्वीकृत राशि ₹13,565.84 करोड़ हो गई।
इस अतिरिक्त वित्त पोषण में भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा ₹995.09 करोड़ की अतिरिक्त इक्विटी, केंद्रीय करों के लिए ₹84.54 करोड़ का अधीनस्थ ऋण, वित्तपोषण एजेंसी बैंकों से ₹1,620.64 करोड़ का अतिरिक्त पीटीए/आंतरिक ऋण, भूमि लागत और पुनर्वास के लिए ₹138.38 करोड़ का अधीनस्थ ऋण तथा राज्य करों और आईडीसी लागत के लिए क्रमशः ₹446.35 करोड़ एवं ₹246.41 करोड़ का अतिरिक्त अनुदान शामिल है।
डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन: IT संवर्ग को ₹235 करोड़
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत राज्य IT संवर्ग परामर्श सेवाओं और सूचना प्रौद्योगिकी कार्य योजना के निरंतर संचालन के लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की पाँच वर्षीय अवधि हेतु ₹235.63 करोड़ स्वीकृत किए गए। इसमें से ₹180.20 करोड़ IT संवर्ग परामर्श सेवाओं और ₹55.43 करोड़ IT कार्य योजना के लिए निर्धारित हैं।
यह योजना राज्य सरकार की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रक्रिया की आधारभूत आवश्यकता मानी जा रही है। भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), बिग डेटा एनालिटिक्स, ब्लॉकचेन और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में राज्य की तैयारी को सुदृढ़ करने के लिए भी इसका उपयोग किया जाएगा। वीबीटीसी प्रशिक्षण केंद्र के माध्यम से अधिकारियों एवं कर्मचारियों को IT, ई-गवर्नेंस, साइबर सुरक्षा और डेटा प्रबंधन पर नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कपास और मंडी शुल्क में बदलाव: किसानों और उद्योग को राहत
मंत्रिपरिषद ने कपास पर मंडी फीस की दर 1 प्रतिशत से घटाकर 0.5 प्रतिशत करने का निर्णय लिया। प्रदेश में लगभग 158 कपास जिनिंग मिलें हैं, जिनकी प्रसंस्करण क्षमता करीब 13 लाख मीट्रिक टन है। सरकार के अनुसार इस कटौती से जिनिंग मिलें पड़ोसी राज्यों में पलायन के बजाय मध्य प्रदेश में ही व्यवसाय करना पसंद करेंगी, जिससे रोज़गार और जीएसटी संग्रहण दोनों में वृद्धि होगी।
दूसरी ओर, सामान्य मंडी शुल्क को ₹1 से बढ़ाकर ₹1.50 किया गया है। इस वृद्धि से चालू वर्ष में लगभग ₹500 करोड़ की अतिरिक्त आय का अनुमान है। बढ़े हुए शुल्क का उपयोग किसान सड़क निधि, ग्रामीण सड़क विकास, मंडियों की मूलभूत संरचना, गौ-संवर्धन निधि, मुख्यमंत्री कृषक जीवन कल्याण योजना और कृषि अनुसंधान एवं अधोसंरचना विकास में किया जाएगा। निराश्रित शुल्क 20 पैसे पर यथावत रखा गया है।
फसल उपार्जन के लिए ₹8,600 करोड़ की सरकारी प्रत्याभूति
आगामी रबी विपणन वर्ष 2026 में गेहूँ और खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान एवं मोटे अनाजों के उपार्जन को सुनिश्चित करने के लिए एमपी स्टेट सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन लि. (MPSCSC) और मार्कफेड को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक के लिए ₹8,600 करोड़ की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति देने की मंजूरी दी गई। इसके अतिरिक्त MPSCSC को उसी अवधि के लिए ₹29,500 करोड़ की अलग निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति भी उपलब्ध कराई गई है।
गौरतलब है कि यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब राज्य में कृषि खरीद व्यवस्था को बैंकों और नाबार्ड से ऋण लेकर चलाया जाता है और आरबीआई की खाद्यान्न साख सीमा की शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है। इन फैसलों से प्रदेश की कृषि और औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।