14 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

MP में कचरा प्रबंधन नीति बनाने के निर्देश, मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने स्वच्छ भारत मिशन बैठक में दिया जोर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
MP में कचरा प्रबंधन नीति बनाने के निर्देश, मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने स्वच्छ भारत मिशन बैठक में दिया जोर

सारांश

मध्य प्रदेश के मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने स्वच्छ भारत मिशन बैठक में कचरा प्रबंधन के लिए स्पष्ट नीति, 20 वर्षीय दीर्घकालिक योजना और खुली डंपिंग पर पूर्ण रोक के निर्देश दिए। 1,924 क्लस्टरों में 'वॉश ऑन व्हील्स' अभियान चल रहा है और 9 हजार से अधिक पानी की टंकियाँ साफ हो चुकी हैं।

मुख्य बातें

मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने 13 जुलाई को भोपाल में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) बैठक में कचरा संग्रहण एवं निष्पादन के लिए स्पष्ट नीति बनाने के निर्देश दिए।
10 हजार से अधिक आबादी वाली ग्राम पंचायतों में ठोस एवं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन को प्राथमिकता देने का निर्देश।
अगले 20 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक कचरा निष्पादन योजना बनाने पर जोर।
'वॉश ऑन व्हील्स' अभियान 1,924 क्लस्टरों में सक्रिय; 9 हजार से अधिक पानी की टंकियाँ साफ।
1 अप्रैल से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम लागू; राज्य और जिला स्तर पर समितियाँ गठित।
खुले में कचरा डंपिंग की प्रथा पूरी तरह समाप्त करने और सीएसआर मद से निष्पादन इकाइयाँ विकसित करने के निर्देश।

मध्य प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने 13 जुलाई को भोपाल में आयोजित स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की साधारण सभा की बैठक में निर्देश दिए कि राज्य में कचरा संग्रहण एवं निष्पादन के लिए एक सुस्पष्ट नीति तैयार की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वच्छता केवल किसी अभियान तक सीमित नहीं, बल्कि यह सतत जनभागीदारी और सुव्यवस्थित प्रबंधन का विषय है।

मुख्य निर्देश और नीतिगत प्राथमिकताएँ

मंत्री पटेल ने निर्देश दिए कि पंचायत, ब्लॉक और क्लस्टर स्तर पर दायित्वों का स्पष्ट निर्धारण किया जाए, ताकि जवाबदेही की कोई कमी न रहे। उन्होंने कहा कि 10 हजार से अधिक आबादी वाली ग्राम पंचायतों में ठोस एवं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही, अगले 20 वर्षों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए कचरा निष्पादन के दीर्घकालिक उपाय सुनिश्चित किए जाएँ।

कचरा परिवहन के लिए वाहनों, एजेंसियों और संचालन व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने पर भी विशेष बल दिया गया। मंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों को क्लस्टर आधारित स्वच्छता व्यवस्था से जोड़ा जाए।

विशेष मॉडल और परियोजनाओं पर जोर

बैठक में 'वॉश ऑन व्हील्स' मॉडल, डस्टबिन के प्रभावी उपयोग, सामुदायिक स्वच्छता परिसरों और गोबर-धन परियोजनाओं के प्रभावी संचालन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। मंत्री पटेल ने यह भी कहा कि सीएसआर मद का उपयोग कचरा निष्पादन इकाइयों के विकास में किया जाए और मल-कीचड़ एवं सेप्टेज प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए।

उन्होंने खुले में कचरा डंपिंग की प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने का स्पष्ट निर्देश दिया — जो ग्रामीण स्वच्छता की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

ज़मीनी प्रगति की समीक्षा

बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि 1 अप्रैल से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम लागू किए जा चुके हैं और राज्य तथा जिला स्तर पर समितियों का गठन हो चुका है। प्रदेश में कचरा प्रबंधन के लिए वर्कफ्लो मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया जा रहा है।

'वॉश ऑन व्हील्स' अभियान के तहत 1,924 क्लस्टरों में कार्य संचालित हैं और 9 हजार से अधिक पानी की टंकियों की सफाई की जा चुकी है। बैठक में प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत मिशन के वार्षिक लक्ष्यों, सामुदायिक स्वच्छता परिसरों, गोबर-धन परियोजना तथा प्लास्टिक कचरा प्रबंधन की प्रगति की भी समीक्षा की गई।

आगे की राह

यह बैठक ऐसे समय में हुई जब ग्रामीण भारत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं और केंद्र सरकार स्वच्छ भारत मिशन के दूसरे चरण के लक्ष्यों को पूरा करने पर ज़ोर दे रही है। मध्य प्रदेश सरकार की यह नीतिगत पहल राज्य के ग्रामीण इलाकों में दीर्घकालिक स्वच्छता ढाँचे की नींव रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है — राज्य में पहले भी स्वच्छता से जुड़ी घोषणाएँ हुई हैं जो ज़मीन पर उतरने में पिछड़ी हैं। 20 वर्षीय दीर्घकालिक योजना की बात तब तक अधूरी है जब तक पंचायत स्तर पर वित्तीय और मानव संसाधन का स्पष्ट आवंटन न हो। 'वॉश ऑन व्हील्स' जैसे मॉडलों की सफलता उत्साहजनक है, लेकिन 1,924 क्लस्टरों से आगे इसे स्केल करना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती होगी। सीएसआर फंडिंग और गोबर-धन परियोजना को जोड़ना सही दिशा है — बशर्ते इनकी निगरानी के लिए स्वतंत्र जवाबदेही तंत्र हो।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में कचरा प्रबंधन नीति को लेकर क्या निर्देश दिए गए हैं?
मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने 13 जुलाई को भोपाल में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) बैठक में निर्देश दिए कि कचरा संग्रहण एवं निष्पादन के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए और पंचायत, ब्लॉक व क्लस्टर स्तर पर दायित्व तय किए जाएँ। अगले 20 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक योजना बनाने पर भी जोर दिया गया।
'वॉश ऑन व्हील्स' अभियान क्या है और इसकी क्या प्रगति है?
'वॉश ऑन व्हील्स' मध्य प्रदेश सरकार का ग्रामीण स्वच्छता मॉडल है जो मोबाइल इकाइयों के जरिए सफाई सेवाएँ प्रदान करता है। अभी तक 1,924 क्लस्टरों में यह अभियान चल रहा है और 9 हजार से अधिक पानी की टंकियों की सफाई की जा चुकी है।
10 हजार से अधिक आबादी वाली ग्राम पंचायतों के लिए क्या विशेष निर्देश हैं?
मंत्री पटेल ने निर्देश दिया कि 10 हजार से अधिक आबादी वाली ग्राम पंचायतों में ठोस एवं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाए। इन पंचायतों में कचरा परिवहन के लिए वाहन, एजेंसियाँ और संचालन व्यवस्था को सुव्यवस्थित किया जाएगा।
मध्य प्रदेश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम कब से लागू हुए?
राज्य में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 1 अप्रैल से लागू किए जा चुके हैं। इसके साथ ही राज्य और जिला स्तर पर समितियों का गठन किया गया है और एक वर्कफ्लो मैनेजमेंट सिस्टम भी विकसित किया जा रहा है।
गोबर-धन परियोजना और सीएसआर फंड का कचरा प्रबंधन में क्या उपयोग होगा?
मंत्री पटेल ने निर्देश दिया कि सीएसआर मद का उपयोग कचरा निष्पादन इकाइयों के विकास में किया जाए। गोबर-धन परियोजनाओं के प्रभावी संचालन पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में जैविक कचरे को ऊर्जा में बदलने की केंद्रीय योजना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले