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मानहानि मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने एम.के. स्टालिन को 21 सितंबर तक जवाब दाखिल करने का दिया निर्देश

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मानहानि मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने एम.के. स्टालिन को 21 सितंबर तक जवाब दाखिल करने का दिया निर्देश

सारांश

तमिलनाडु में राजनीतिक तनाव कानूनी दंगल में बदल गया है। मंत्री आधव अर्जुन ने DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन पर ₹258 करोड़ के ड्रग तस्करी मामले के आरोपी से रिश्तेदारी का दावा करने पर ₹1 करोड़ के मानहानि का मुकदमा ठोका है। अब 21 सितंबर को होगी अगली सुनवाई।

मुख्य बातें

मद्रास हाईकोर्ट ने DMK अध्यक्ष एम.के.
स्टालिन को 21 सितंबर 2026 तक जवाबी हलफनामा दाखिल करने का समय दिया।
मंत्री आधव अर्जुन ने ₹1 करोड़ के हर्जाने के साथ मानहानि का मुकदमा दायर किया है।
स्टालिन ने एक्स (X) पर पोस्ट किया था कि कथित ₹258 करोड़ के ड्रग तस्करी मामले का मास्टरमाइंड जॉन ब्रिटो , मंत्री का रिश्तेदार है।
स्टालिन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विल्सन ने समय माँगा, जिसे न्यायमूर्ति गोविंदराजन थिलाकवथी ने स्वीकार किया।
याचिका में DMK आईटी विंग को कथित मानहानिकारक पोस्ट हटाने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।

मद्रास हाईकोर्ट ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को 21 सितंबर 2026 तक जवाबी हलफनामा दाखिल करने का समय दिया है। यह मामला तमिलनाडु के लोक निर्माण मंत्री आधव अर्जुन द्वारा दायर उस मानहानि के मुकदमे से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने ₹1 करोड़ के हर्जाने की मांग की है।

मामले की पृष्ठभूमि

पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने अपने आधिकारिक एक्स (X) अकाउंट पर एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक बयान का हवाला देते हुए दावा किया था कि कथित तौर पर ₹258 करोड़ के ड्रग तस्करी मामले का मास्टरमाइंड जॉन ब्रिटो, मंत्री आधव अर्जुन का रिश्तेदार है।

यह आरोप सामने आते ही तमिलनाडु की राजनीति में हलचल मच गई। गौरतलब है कि स्टालिन विपक्ष के नेता हैं और ड्रग तस्करी का यह मामला राज्य में पहले से ही राजनीतिक विवाद का केंद्र बना हुआ है।

मंत्री आधव अर्जुन का पक्ष

मंत्री आधव अर्जुन ने स्टालिन के दावे को सिरे से नकारते हुए मद्रास हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया। उनकी याचिका में कहा गया कि पूर्व मुख्यमंत्री ने उनकी छवि खराब करने के इरादे से यह पोस्ट किया था। आधव अर्जुन ने स्टालिन और DMK की आईटी विंग को कथित मानहानिकारक पोस्ट हटाने का निर्देश देने की भी मांग की।

अदालत की कार्यवाही

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति गोविंदराजन थिलाकवथी की पीठ में हुई। प्रारंभिक सुनवाई में न्यायमूर्ति ने स्टालिन और DMK की आईटी विंग को याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।

आज 15 सितंबर 2026 को जब मामले की फिर से सुनवाई हुई, तो स्टालिन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विल्सन ने जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए 21 सितंबर तक का समय माँगा। अदालत ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को निर्धारित की।

आगे क्या होगा

अब सभी की निगाहें 21 सितंबर को दाखिल होने वाले स्टालिन के जवाबी हलफनामे पर टिकी हैं, जिसके आधार पर अदालत आगे की सुनवाई की दिशा तय करेगी। यह मामला तमिलनाडु में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक टकराव का एक और अध्याय है, और इसके नतीजे राज्य की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि तमिलनाडु में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक युद्ध का नया मोर्चा है। स्टालिन ने ED के बयान का हवाला देकर पोस्ट किया था — यह हेजिंग अदालत में उनकी मुख्य ढाल बन सकती है। दूसरी ओर, मंत्री आधव अर्जुन का ₹1 करोड़ का दावा प्रतीकात्मक अधिक है, जिसका असली उद्देश्य विपक्ष को सोशल मीडिया पर आक्रामक रुख अपनाने से रोकना प्रतीत होता है। भारतीय राजनीति में सोशल मीडिया पोस्ट पर मानहानि के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं — यह प्रवृत्ति न्यायपालिका और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दोनों के लिए महत्वपूर्ण सवाल उठाती है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मद्रास हाईकोर्ट में एम.के. स्टालिन के खिलाफ मानहानि का मामला क्या है?
मंत्री आधव अर्जुन ने DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट में ₹1 करोड़ के हर्जाने की मांग करते हुए मानहानि का मुकदमा दायर किया है। स्टालिन ने एक्स पर पोस्ट कर ED के बयान का हवाला देते हुए कहा था कि ₹258 करोड़ के ड्रग तस्करी मामले का कथित मास्टरमाइंड जॉन ब्रिटो, आधव अर्जुन का रिश्तेदार है।
अदालत ने 21 सितंबर की तारीख क्यों दी?
स्टालिन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विल्सन ने 15 सितंबर 2026 की सुनवाई में जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की माँग की। न्यायमूर्ति गोविंदराजन थिलाकवथी ने अनुरोध स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को निर्धारित की।
जॉन ब्रिटो और ड्रग तस्करी मामला क्या है?
जॉन ब्रिटो कथित तौर पर ₹258 करोड़ के ड्रग तस्करी मामले का मास्टरमाइंड बताया जाता है, जिसकी जाँच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। स्टालिन ने ED के बयान का हवाला देकर उसे आधव अर्जुन का रिश्तेदार बताया था, जिसे मंत्री ने पूरी तरह नकारा है।
आधव अर्जुन ने अदालत से क्या माँगा है?
आधव अर्जुन ने ₹1 करोड़ के हर्जाने के साथ-साथ अदालत से स्टालिन और DMK आईटी विंग को कथित मानहानिकारक पोस्ट हटाने का निर्देश देने की भी माँग की है। उनकी याचिका में कहा गया है कि यह पोस्ट उनकी प्रतिष्ठा को जान-बूझकर नुकसान पहुँचाने के इरादे से किया गया था।
इस मामले में आगे क्या होगा?
21 सितंबर 2026 को स्टालिन का जवाबी हलफनामा दाखिल होने के बाद अदालत आगे की सुनवाई तय करेगी। यह मामला तमिलनाडु की राजनीति और सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की सीमाओं के नजरिए से महत्वपूर्ण है।
राष्ट्र प्रेस
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