26 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मेकेदातु परियोजना पर तमिलनाडु मंत्री आधव अर्जुन का स्टालिन पर पलटवार, कावेरी अधिकारों पर सरकार का बचाव

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मेकेदातु परियोजना पर तमिलनाडु मंत्री आधव अर्जुन का स्टालिन पर पलटवार, कावेरी अधिकारों पर सरकार का बचाव

सारांश

मेकेदातु परियोजना पर DMK के हमले के जवाब में तमिलनाडु मंत्री आधव अर्जुन ने स्टालिन पर तथ्य तोड़ने का आरोप लगाया। CM विजय ने PM मोदी को दो बार पत्र लिखे, विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया — यह विवाद अब राज्य की राजनीति का केंद्रबिंदु बन चुका है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु मंत्री आधव अर्जुन ने 26 जुलाई को DMK के एम.
स्टालिन पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने 27 मई को PM मोदी से मुलाकात में और 19 जून को पत्र के ज़रिए मेकेदातु परियोजना का विरोध दर्ज कराया।
तमिलनाडु विधानसभा ने मेकेदातु के विरोध में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री को भेजा।
राज्य ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण और केंद्रीय जल आयोग के समक्ष तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी की सहमति की शर्त दोहराई।
आधव ने पिछली DMK सरकार पर सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी कमियों के कारण राज्य के हितों को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया।

तमिलनाडु के लोक निर्माण एवं खेल विकास मंत्री आधव अर्जुन ने 26 जुलाई को मेकेदातु जलाशय परियोजना और कावेरी जल अधिकारों पर सरकार के रुख का कड़ा बचाव किया। टीवीके नेता आधव ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन पर जनता को गुमराह करने और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया।

सरकार का रुख और उठाए गए कदम

आधव अर्जुन ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने कावेरी के पानी में तमिलनाडु के उचित हिस्से की सुरक्षा के लिए लगातार कानूनी, प्रशासनिक और राजनीतिक उपाय अपनाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकताएँ तीन हैं — डेल्टा किसानों के हितों की रक्षा, पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित करना, और कर्नाटक को बिना उचित प्रक्रिया के मेकेदातु जलाशय आगे बढ़ाने से रोकना।

मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने 27 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक में व्यक्तिगत रूप से तमिलनाडु की आपत्तियाँ उठाई थीं। उस चर्चा में मुख्यमंत्री ने केंद्र से कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के अंतिम फैसले और सर्वोच्च न्यायालय के 16 फरवरी 2018 के आदेश को लागू करने की माँग की, साथ ही मेकेदातु परियोजना की किसी भी मंजूरी का कड़ा विरोध दर्ज कराया।

मुख्यमंत्री का प्रधानमंत्री को पत्र

आधव के अनुसार, जब यह खबर आई कि कर्नाटक प्रस्तावित जलाशय के लिए भूमि पूजन की तैयारी कर रहा है, तब मुख्यमंत्री विजय ने 19 जून को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर राज्य का स्पष्ट रुख दोहराया। पत्र में रेखांकित किया गया कि तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी — सभी संबंधित राज्यों की सहमति के बिना परियोजना को स्वीकृति नहीं मिल सकती। इस पत्र में केंद्र से जल शक्ति मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग को उचित निर्देश जारी करने का अनुरोध भी किया गया।

विधानसभा प्रस्ताव और प्राधिकरण के समक्ष पक्ष

मंत्री ने यह भी बताया कि तमिलनाडु विधानसभा ने मेकेदातु परियोजना के विरोध में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था और इसे प्रधानमंत्री को भेजा गया था। राज्य ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण और कावेरी जल विनियमन समिति के समक्ष भी अपना पक्ष लगातार रखा है, जिसमें आवंटित जल हिस्से को समय पर जारी करने और कर्नाटक के एकतरफा कदमों पर आपत्ति शामिल है।

DMK पर पलटवार

DMK की आलोचना का जवाब देते हुए आधव अर्जुन ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार सर्वोच्च न्यायालय में प्रतिकूल घटनाक्रम के बाद तमिलनाडु के हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा करने में विफल रही। उनके अनुसार, पिछले कार्यकाल में कानूनी कमियों के कारण कावेरी और मेकेदातु विवाद और उलझ गए।

आगे की राह

आधव अर्जुन ने कावेरी मुद्दे को राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से परे, तमिलनाडु के मौलिक जल अधिकारों का मामला बताया। उन्होंने कहा कि राज्य उपलब्ध हर संवैधानिक और कानूनी रास्ते का उपयोग जारी रखेगा और रचनात्मक आलोचना का स्वागत है, बशर्ते उसका लक्ष्य राज्य के दीर्घकालिक हितों की रक्षा हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मेकेदातु को लेकर तमिलनाडु की आंतरिक राजनीति अब उतनी ही तीखी हो गई है जितनी अंतर-राज्यीय खींचतान। आधव अर्जुन का DMK पर पलटवार यह दर्शाता है कि सत्तारूढ़ गठबंधन कावेरी को अपनी राजनीतिक पहचान का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन असली सवाल यह है कि विधानसभा प्रस्ताव, PM को पत्र और प्राधिकरण में तर्क — इन सबके बावजूद — कर्नाटक की भूमि पूजन की तैयारी को रोकने में राज्य कितना सफल रहा? सर्वोच्च न्यायालय के 2018 के फैसले को लागू कराने की ज़िम्मेदारी केंद्र पर है, और दोनों प्रमुख दल इस पर केंद्र को घेरने की बजाय एक-दूसरे को घेरने में व्यस्त दिखते हैं।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेकेदातु परियोजना क्या है और तमिलनाडु इसका विरोध क्यों कर रहा है?
मेकेदातु कर्नाटक की प्रस्तावित जलाशय परियोजना है जो कावेरी नदी पर बनाई जानी है। तमिलनाडु का तर्क है कि यह परियोजना राज्य के आवंटित जल हिस्से को प्रभावित करेगी और इसे तमिलनाडु, केरल तथा पुडुचेरी की सहमति के बिना आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री मोदी को कब और क्यों पत्र लिखा?
मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने 27 मई को PM मोदी से व्यक्तिगत बैठक में और 19 जून को पत्र के ज़रिए तमिलनाडु की आपत्तियाँ दर्ज कराईं। 19 जून का पत्र तब लिखा गया जब खबर आई कि कर्नाटक मेकेदातु के लिए भूमि पूजन की तैयारी कर रहा है।
आधव अर्जुन ने एम. के. स्टालिन पर क्या आरोप लगाए?
मंत्री आधव अर्जुन ने आरोप लगाया कि DMK अध्यक्ष स्टालिन जनता को गुमराह कर रहे हैं और गलत तथ्य पेश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली DMK सरकार के कार्यकाल में कानूनी कमियों के कारण कावेरी और मेकेदातु विवाद और उलझ गए।
तमिलनाडु विधानसभा ने मेकेदातु पर क्या कदम उठाया है?
तमिलनाडु विधानसभा ने मेकेदातु परियोजना के विरोध में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया और तत्काल हस्तक्षेप की माँग करते हुए इसे प्रधानमंत्री को भेजा। यह प्रस्ताव सभी दलों की एकमत सहमति से पारित हुआ।
कावेरी जल विवाद में सर्वोच्च न्यायालय का 2018 का फैसला क्या था?
सर्वोच्च न्यायालय ने 16 फरवरी 2018 को कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के अंतिम फैसले को संशोधित करते हुए तमिलनाडु को जल आवंटन निर्धारित किया था। तमिलनाडु सरकार लगातार केंद्र से इस फैसले को लागू कराने की माँग कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 21 घंटे पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले