मेकेदातु परियोजना पर तमिलनाडु मंत्री आधव अर्जुन का स्टालिन पर पलटवार, कावेरी अधिकारों पर सरकार का बचाव
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के लोक निर्माण एवं खेल विकास मंत्री आधव अर्जुन ने 26 जुलाई को मेकेदातु जलाशय परियोजना और कावेरी जल अधिकारों पर सरकार के रुख का कड़ा बचाव किया। टीवीके नेता आधव ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन पर जनता को गुमराह करने और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया।
सरकार का रुख और उठाए गए कदम
आधव अर्जुन ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने कावेरी के पानी में तमिलनाडु के उचित हिस्से की सुरक्षा के लिए लगातार कानूनी, प्रशासनिक और राजनीतिक उपाय अपनाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकताएँ तीन हैं — डेल्टा किसानों के हितों की रक्षा, पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित करना, और कर्नाटक को बिना उचित प्रक्रिया के मेकेदातु जलाशय आगे बढ़ाने से रोकना।
मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने 27 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक में व्यक्तिगत रूप से तमिलनाडु की आपत्तियाँ उठाई थीं। उस चर्चा में मुख्यमंत्री ने केंद्र से कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के अंतिम फैसले और सर्वोच्च न्यायालय के 16 फरवरी 2018 के आदेश को लागू करने की माँग की, साथ ही मेकेदातु परियोजना की किसी भी मंजूरी का कड़ा विरोध दर्ज कराया।
मुख्यमंत्री का प्रधानमंत्री को पत्र
आधव के अनुसार, जब यह खबर आई कि कर्नाटक प्रस्तावित जलाशय के लिए भूमि पूजन की तैयारी कर रहा है, तब मुख्यमंत्री विजय ने 19 जून को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर राज्य का स्पष्ट रुख दोहराया। पत्र में रेखांकित किया गया कि तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी — सभी संबंधित राज्यों की सहमति के बिना परियोजना को स्वीकृति नहीं मिल सकती। इस पत्र में केंद्र से जल शक्ति मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग को उचित निर्देश जारी करने का अनुरोध भी किया गया।
विधानसभा प्रस्ताव और प्राधिकरण के समक्ष पक्ष
मंत्री ने यह भी बताया कि तमिलनाडु विधानसभा ने मेकेदातु परियोजना के विरोध में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था और इसे प्रधानमंत्री को भेजा गया था। राज्य ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण और कावेरी जल विनियमन समिति के समक्ष भी अपना पक्ष लगातार रखा है, जिसमें आवंटित जल हिस्से को समय पर जारी करने और कर्नाटक के एकतरफा कदमों पर आपत्ति शामिल है।
DMK पर पलटवार
DMK की आलोचना का जवाब देते हुए आधव अर्जुन ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार सर्वोच्च न्यायालय में प्रतिकूल घटनाक्रम के बाद तमिलनाडु के हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा करने में विफल रही। उनके अनुसार, पिछले कार्यकाल में कानूनी कमियों के कारण कावेरी और मेकेदातु विवाद और उलझ गए।
आगे की राह
आधव अर्जुन ने कावेरी मुद्दे को राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से परे, तमिलनाडु के मौलिक जल अधिकारों का मामला बताया। उन्होंने कहा कि राज्य उपलब्ध हर संवैधानिक और कानूनी रास्ते का उपयोग जारी रखेगा और रचनात्मक आलोचना का स्वागत है, बशर्ते उसका लक्ष्य राज्य के दीर्घकालिक हितों की रक्षा हो।