28 जुलाई 2026
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महालक्ष्मी एक्सप्रेस के D1 कोच में धुआं: FSDS सिस्टम ने बचाया, 20 मिनट में ट्रेन रवाना

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महालक्ष्मी एक्सप्रेस के D1 कोच में धुआं: FSDS सिस्टम ने बचाया, 20 मिनट में ट्रेन रवाना

सारांश

महालक्ष्मी एक्सप्रेस में धुआं — लेकिन हादसा नहीं हुआ। FSDS सिस्टम ने समय रहते अलर्ट दिया, रेलकर्मी 6 मिनट में मौके पर पहुँचे और 20 मिनट में ट्रेन फिर चल पड़ी। यह घटना रेल सुरक्षा तकनीक और प्रशिक्षित कर्मचारियों की त्वरित प्रतिक्रिया की असली परीक्षा थी — और दोनों पास हुए।

मुख्य बातें

महालक्ष्मी एक्सप्रेस के D1 कोच में 28 जुलाई की सुबह 5:40 बजे धुआं निकला, यात्रियों में अफरा-तफरी मची।
FSDS (फायर एंड स्मोक डिटेक्शन सिस्टम) ने तुरंत अलर्ट जारी किया; यात्रियों को पास के कोच में स्थानांतरित किया गया।
रेलकर्मी 5-6 मिनट के भीतर मौके पर पहुँचे; 20 मिनट की जाँच के बाद सुबह 6 बजे ट्रेन रवाना हुई।
मध्य रेलवे ने गणेश उत्सव के लिए 246 स्पेशल ट्रेनें घोषित कीं — 184 रिजर्व और 62 अनरिजर्व्ड ।
ट्रेनें 11 से 27 सितंबर के बीच चलेंगी; बुकिंग 1, 2 और 3 अगस्त से चरणबद्ध रूप से शुरू होगी।
रेलवे ने यात्रियों को सलाह दी — आपात स्थिति में घबराएँ नहीं, ट्रैक की स्थिति देखकर ही उतरें।

मुंबई की ओर जा रही महालक्ष्मी एक्सप्रेस के D1 कोच में मंगलवार, 28 जुलाई की सुबह 5:40 बजे धुआं निकलने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। हालाँकि, ट्रेन में लगे अत्याधुनिक फायर एंड स्मोक डिटेक्शन सिस्टम (FSDS) ने तत्काल अलर्ट जारी किया और रेलकर्मियों ने 5-6 मिनट के भीतर मौके पर पहुँचकर स्थिति को नियंत्रण में ले लिया। करीब 20 मिनट की जाँच के बाद सुबह 6 बजे ट्रेन ने अपनी यात्रा फिर से शुरू की।

FSDS सिस्टम ने कैसे किया काम

मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) स्वप्निल नीला ने बताया कि प्रत्येक कोच में FSDS (फायर एंड स्मोक डिटेक्शन सिस्टम) नामक एक उन्नत चेतावनी प्रणाली स्थापित रहती है, जो लगातार किसी भी प्रकार के धुएं की निगरानी करती है। कोच में जैसे ही धुएं का न्यूनतम संकेत मिलता है, यह सिस्टम तुरंत सक्रिय हो जाता है।

सिस्टम के सक्रिय होते ही एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत यात्रियों को सूचित किया गया कि D1 कोच में धुआं पाया गया है और वे सुरक्षा की दृष्टि से निकटवर्ती कोच में स्थानांतरित हो जाएँ। यह त्वरित सूचना तंत्र बड़े हादसे को टालने में कारगर रहा।

रेलकर्मियों की त्वरित प्रतिक्रिया

CPRO स्वप्निल नीला के अनुसार, घटना की जानकारी तुरंत संबंधित रेलवे कर्मचारियों और सिस्टम तक पहुँचाई गई। घटना के मात्र 5-6 मिनट के भीतर रेलवे कर्मचारी मौके पर पहुँच गए और धुआं निकलने के कारणों की जाँच शुरू की। लगभग 20 मिनट तक ट्रेन रोककर स्थिति की पड़ताल की गई और सब कुछ सामान्य पाए जाने के बाद सुबह 6 बजे ट्रेन को आगे रवाना किया गया।

यात्रियों के लिए सुरक्षा सलाह

रेलवे प्रशासन ने इस घटना के बाद यात्रियों से अपील की है कि ऐसी किसी भी स्थिति में घबराएँ नहीं और बिना सोचे-समझे ट्रेन से उतरने का प्रयास न करें। स्वप्निल नीला ने स्पष्ट किया कि जल्दबाजी में बिना सुरक्षा उपायों के उतरने से यात्रियों को गंभीर खतरा हो सकता है।

यदि किसी आपात स्थिति में ट्रेन से उतरना अनिवार्य हो, तो यात्रियों को पहले ट्रैक की स्थिति देखनी चाहिए — जिस दिशा में ट्रैक न हो, उसी ओर उतरें। यदि दोनों ओर ट्रैक हों, तो आने-जाने वाली ट्रेनों की स्थिति देखकर ही उतरें और उतरने के बाद ट्रैक से दूर सुरक्षित स्थान पर खड़े रहें।

गणपति स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था

इसी अवसर पर CPRO स्वप्निल नीला ने गणेश उत्सव के दौरान कोंकण जाने वाले यात्रियों के लिए मध्य रेलवे की तैयारियों का भी विवरण दिया। इस वर्ष मध्य रेलवे ने कुल 246 स्पेशल ट्रेनें चलाने की घोषणा की है — जिनमें 184 रिजर्व श्रेणी (AC, नॉन-AC, स्लीपर और जनरल कोच सहित) और 62 अनरिजर्व्ड स्पेशल ट्रेनें शामिल हैं।

ये सभी ट्रेनें 11 सितंबर से 27 सितंबर के बीच संचालित की जाएंगी। बुकिंग 1, 2 और 3 अगस्त से चरणबद्ध रूप से शुरू होगी।

छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से 98, लोकमान्य तिलक टर्मिनस से 76 और पुणे से 10 स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। गंतव्य के अनुसार — सावंतवाड़ी के लिए 112, रत्नागिरी के लिए 64, खेड़ के लिए 32, चिपलून के लिए 30 और मडगांव के लिए 8 ट्रेनें निर्धारित हैं। अनरिजर्व्ड ट्रेनें दिवा और अन्य स्थानों से चलेंगी।

आगे की राह

CPRO ने बताया कि यात्रियों की माँग और कोंकण रेलवे की क्षमता को देखते हुए आवश्यकता पड़ने पर और अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनें भी चलाई जा सकती हैं। यह घटना इस बात की पुष्टि करती है कि FSDS जैसी तकनीकी प्रणालियाँ रेल सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं — और प्रशिक्षित रेलकर्मियों की त्वरित प्रतिक्रिया इन्हें और प्रभावी बनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सराहनीय है। लेकिन यह भी उतना ही ज़रूरी है कि रेलवे यात्रियों को इन प्रणालियों के बारे में नियमित रूप से जागरूक करे, क्योंकि घबराहट में ट्रेन से कूदना कई बार धुएं से भी बड़ा खतरा बन जाता है। 246 गणपति स्पेशल ट्रेनों की घोषणा स्वागतयोग्य है, पर असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महालक्ष्मी एक्सप्रेस में धुएं की घटना कब और कहाँ हुई?
यह घटना 28 जुलाई की सुबह 5:40 बजे महालक्ष्मी एक्सप्रेस के D1 कोच में हुई, जब ट्रेन मुंबई की ओर जा रही थी। FSDS सिस्टम ने धुआं पहचानकर अलर्ट जारी किया और यात्रियों को निकटवर्ती कोच में भेजा गया।
FSDS सिस्टम क्या है और यह कैसे काम करता है?
FSDS यानी फायर एंड स्मोक डिटेक्शन सिस्टम एक उन्नत चेतावनी प्रणाली है जो प्रत्येक रेल कोच में लगाई जाती है। यह लगातार धुएं की निगरानी करती है और न्यूनतम धुएं का संकेत मिलते ही तुरंत सक्रिय होकर अलर्ट जारी करती है।
धुएं की घटना के बाद ट्रेन कितनी देर रुकी और क्या नुकसान हुआ?
ट्रेन करीब 20 मिनट रुकी रही, जिसके बाद सुबह 6 बजे यात्रा फिर शुरू हुई। रेलवे के अनुसार किसी यात्री को चोट नहीं आई और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही।
गणेश उत्सव के लिए मध्य रेलवे ने कितनी स्पेशल ट्रेनें घोषित की हैं?
मध्य रेलवे ने 246 स्पेशल ट्रेनें घोषित की हैं — 184 रिजर्व और 62 अनरिजर्व्ड । ये ट्रेनें 11 से 27 सितंबर के बीच चलेंगी और बुकिंग 1, 2 व 3 अगस्त से चरणबद्ध रूप से शुरू होगी।
ट्रेन में धुआं दिखे तो यात्रियों को क्या करना चाहिए?
रेलवे की सलाह है कि घबराएँ नहीं और बिना सोचे-समझे ट्रेन से न उतरें। यदि उतरना आवश्यक हो तो पहले ट्रैक की स्थिति देखें — जिस दिशा में ट्रैक न हो उसी ओर उतरें, और उतरने के बाद ट्रैक से दूर सुरक्षित स्थान पर खड़े रहें।
राष्ट्र प्रेस
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