यूसीसी पर महामंडलेश्वर करोली शंकर का ओवैसी को जवाब: 'सूखने से बेहतर है सरकार का साथ दें'
सारांश
मुख्य बातें
हरिद्वार में महामंडलेश्वर करोली शंकर महादेव ने 2 अक्टूबर 2026 को यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) का खुलकर बचाव करते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की आलोचना को सिरे से खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यूसीसी किसी एक धर्म या समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि देश की समस्त जनता के हित में है और इसे लागू करने से राष्ट्रीय एकता और भाईचारा और अधिक मज़बूत होगा।
यूसीसी पर करोली शंकर का पक्ष
महामंडलेश्वर करोली शंकर महादेव ने कहा, 'अगर अच्छी चीजों की नकल की जाए, तो इसमें बुरा क्या है। यूसीसी देश के नागरिकों और देश के हित में है। इससे भाईचारा और एकता बढ़ेगी, राष्ट्र एकजुट होगा।' उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि कानून धर्म, मज़हब या पंथ को देखकर नहीं, बल्कि जनता की ज़रूरत के अनुसार बनते हैं।
उनके अनुसार यूसीसी से किसी एक वर्ग को नहीं, बल्कि हिंदू और मुस्लिम — दोनों समुदायों को — फायदा होगा। उन्होंने कहा कि इस कानून पर नेताओं को आपत्ति हो सकती है, लेकिन आम जनता को कोई एतराज़ नहीं है।
ओवैसी पर सीधा निशाना
करोली शंकर महादेव ने AIMIM प्रमुख ओवैसी पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि उनका 'चश्मा ठीक नहीं है' और उन्हें पहले यह समझना होगा कि कानून देश की जनता पर लागू होता है, न कि किसी विशेष धर्म को देखकर। उन्होंने कहा, 'ओवैसी की दाल भी नहीं गलने वाली और रोटी भी नहीं पकने वाली।'
उन्होंने आरोप लगाया कि जो नेता विभाजन की राजनीति करते हैं, वे केवल नफरत के बीज बोते हैं और इससे अपनी 'रोटियाँ सेंकते' हैं। उन्होंने कहा कि देश की जनता अब इतनी जागरूक हो चुकी है कि इस तरह की राजनीति को भली-भांति समझती है।
विभाजन की राजनीति पर आपत्ति
महामंडलेश्वर ने कहा कि जो नेता जिन्ना जैसी राजनीति करते हैं, वे केवल धरती और धर्म का विभाजन नहीं करते, बल्कि मानवता को भी बाँटने का काम करते हैं। उनके अनुसार, ऐसे लोगों की रणनीति नफरत फैलाकर अपने राजनीतिक हित साधने की है।
यह ऐसे समय में आया है जब यूसीसी को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस तेज़ है और कई विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं। गौरतलब है कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन चुका है जहाँ यूसीसी लागू किया गया है।
सरकार के साथ सहयोग की अपील
करोली शंकर महादेव ने ओवैसी को सलाह देते हुए कहा कि 'यूसीसी की चिंता में सूखने से बेहतर है कि भारत सरकार जो कर रही है, उसमें सहयोग करें।' उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून किसी नेता विशेष की इच्छा के अनुसार नहीं, बल्कि देश, जनता और राष्ट्रीय आवश्यकता के अनुकूल चलेगा।
उनके इस बयान को यूसीसी समर्थकों के बीच व्यापक प्रतिक्रिया मिलने की संभावना है। आने वाले दिनों में यूसीसी पर राजनीतिक और सामाजिक बहस और तेज़ होने के आसार हैं।