16 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

यूसीसी विरोध पर आचार्य प्रमोद कृष्णम का ओवैसी पर पलटवार: 'पहले इस्लाम की शिक्षा समझें'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
यूसीसी विरोध पर आचार्य प्रमोद कृष्णम का ओवैसी पर पलटवार: 'पहले इस्लाम की शिक्षा समझें'

सारांश

यूसीसी को लेकर ओवैसी के विरोध पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने पलटवार किया और कहा कि इस्लाम स्वयं समानता की बात करता है। साथ ही उन्होंने अखिलेश यादव की 'पीडीए' राजनीति को 'पाखंड और ड्रामेबाजी' बताया और कांग्रेस पर राष्ट्रहित के विरुद्ध बयानबाजी का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने गाजियाबाद में 16 सितंबर 2026 को असदुद्दीन ओवैसी के यूसीसी-विरोध पर तीखा पलटवार किया।
कृष्णम ने यूसीसी को सनातन और इस्लाम, दोनों की समानता की मूल भावना के अनुरूप बताया।
अमित शाह की तुलना PM मोदी के 'हनुमान' से की; कहा कि ओवैसी और समर्थक उनसे उसी तरह डरते हैं।
अखिलेश यादव की 'पीडीए' राजनीति को 'प्रोपेगेंडा, पाखंड, ड्रामेबाजी और अराजकतावाद' करार दिया; कहा — 2027 नहीं, 2032 की तैयारी करें।
कांग्रेस पर उमर खालिद प्रकरण को लेकर 'राष्ट्रहित विरोधी बयानबाजी' का आरोप; हाफिज सईद और लश्कर-ए-तैयबा के नाम लेकर हमला।
लोहिया ट्रस्ट की कमान को लेकर राम मनोहर लोहिया की विचारधारा से विरोधाभास बताया।

गाजियाबाद, 16 सितंबर 2026 — यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की आपत्तियों के जवाब में धर्मगुरु एवं राजनीतिक टिप्पणीकार आचार्य प्रमोद कृष्णम ने तीखा पलटवार किया है। उनका कहना है कि यूसीसी का विरोध करने से पहले ओवैसी को इस्लाम की बुनियादी शिक्षाओं और समानता के सिद्धांत को ध्यान से पढ़ना चाहिए। कृष्णम ने यूसीसी को सनातन और इस्लाम, दोनों की मूल भावना के अनुरूप बताया।

यूसीसी पर कृष्णम का तर्क

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि यूसीसी देश के सभी नागरिकों को धर्म, जाति, भाषा, रंग या आर्थिक स्थिति से इतर समान अधिकार देने की दिशा में काम करता है। उनके अनुसार, इस्लाम स्वयं समानता की बात स्पष्ट रूप से करता है, इसलिए ओवैसी का यूसीसी-विरोध उनकी अपनी धार्मिक विरासत से विरोधाभासी है। कृष्णम ने ओवैसी से अपील की कि वे पहले इस्लामी शिक्षाओं को समझें और फिर अपना रुख तय करें।

अमित शाह और मोदी पर टिप्पणी

कृष्णम ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तुलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'हनुमान' से की। उन्होंने कहा कि ओवैसी और उनके समर्थक अमित शाह से उसी भय से ग्रस्त हैं, जैसे — उनके कथन के अनुसार — लंका के राक्षस हनुमान से डरते थे। यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

अखिलेश यादव और 'पीडीए' पर हमला

यूसीसी को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की टिप्पणी पर भी कृष्णम ने निशाना साधा। उनका कहना है कि अखिलेश यादव को अब खुद एहसास हो गया है कि उनकी 'पीडीए' (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) राजनीति प्रभावशाली नहीं रही, इसलिए वे नए मुद्दों की तलाश में हैं। कृष्णम ने 'पीडीए' को 'प्रोपेगेंडा, पाखंड, ड्रामेबाजी और अराजकतावाद' की संज्ञा दी। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि अखिलेश यादव को 2027 के बजाय 2032 के विधानसभा चुनाव की तैयारी करनी चाहिए।

लोहिया ट्रस्ट की कमान अखिलेश को मिलने पर कृष्णम ने इसे राम मनोहर लोहिया की विचारधारा से बड़ा विरोधाभास बताया। उनके अनुसार, मुलायम सिंह यादव से लेकर शिवपाल यादव तक कई वरिष्ठ नेताओं को पार्टी में धीरे-धीरे हाशिये पर किया गया, और अखिलेश ने एकछत्र नेतृत्व स्थापित करने को चुनाव जीतने से ऊपर रखा।

कांग्रेस पर तीखे आरोप

उमर खालिद को लेकर कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष की टिप्पणी पर कृष्णम ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के भीतर ऐसी बयानबाजी बढ़ रही है जो उनके शब्दों में 'राष्ट्रहित के विरुद्ध' है। कृष्णम ने अजमल कसाब, हाफिज सईद, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के नाम लेते हुए चेताया कि इस प्रवृत्ति के जारी रहने पर पार्टी के नेता आतंकवाद से जुड़े व्यक्तियों को भी देशभक्त ठहराने लगेंगे।

राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब यूसीसी को लेकर देश में व्यापक बहस जारी है। गौरतलब है कि उत्तराखंड पहले ही यूसीसी लागू कर चुका है और केंद्र सरकार इसे राष्ट्रीय स्तर पर लाने की दिशा में विचार-विमर्श में है। ऐसे में विभिन्न दलों और नेताओं के बीच यूसीसी पर तीखी नोकझोंक सियासी परिदृश्य को और गर्म बना रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखे बयान और प्रतिक्रियाएँ सामने आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यूसीसी पर बहस के केंद्रीय प्रश्न — व्यक्तिगत धार्मिक कानूनों और नागरिक समानता के बीच संतुलन — को वे सतह पर ही छूते हैं। 'इस्लाम खुद समानता की बात करता है' वाला तर्क धार्मिक विद्वानों के बीच भी विवादित है और इसे एकतरफा प्रस्तुत करना बहस को सरल बनाता है, जटिल नहीं। इसी तरह अखिलेश यादव पर 2027 के बजाय 2032 का हवाला देना एक राजनीतिक कटाक्ष है, न कि कोई नीतिगत आलोचना। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर ऐसे बयानों की शब्द-दर-शब्द रिपोर्टिंग तो करती है, लेकिन यह नहीं बताती कि कृष्णम जैसे वक्ताओं की भूमिका किस व्यापक राजनीतिक ध्रुवीकरण की रणनीति में फिट होती है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने ओवैसी पर क्या आरोप लगाया?
कृष्णम ने कहा कि असदुद्दीन ओवैसी यूसीसी का विरोध करने से पहले इस्लाम की समानता की शिक्षाओं को पढ़ें और समझें। उनका तर्क है कि यूसीसी की भावना इस्लाम के अपने समानता के सिद्धांत से मेल खाती है, इसलिए विरोध उचित नहीं है।
यूसीसी क्या है और इसका विरोध क्यों हो रहा है?
यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) एक ऐसा कानूनी ढाँचा है जो देश के सभी नागरिकों पर धर्म-निरपेक्ष रूप से विवाह, तलाक, उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत मामलों में एकसमान कानून लागू करे। ओवैसी जैसे नेताओं का कहना है कि यह अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों में दखल है, जबकि समर्थक इसे नागरिक समानता की दिशा में ज़रूरी कदम मानते हैं।
कृष्णम ने अखिलेश यादव की 'पीडीए' राजनीति पर क्या कहा?
कृष्णम ने 'पीडीए' को 'प्रोपेगेंडा, पाखंड, ड्रामेबाजी और अराजकतावाद' बताया। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि अखिलेश यादव को 2027 की जगह 2032 के विधानसभा चुनाव की तैयारी करनी चाहिए।
कृष्णम ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
उन्होंने कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष की उमर खालिद संबंधी टिप्पणी का हवाला देते हुए कांग्रेस पर 'राष्ट्रहित विरोधी बयानबाजी' का आरोप लगाया। कृष्णम ने हाफिज सईद, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के नाम लेकर चेताया कि पार्टी इसी राह पर चलती रही तो आतंकवाद से जुड़े व्यक्तियों को भी देशभक्त ठहराने लगेगी।
लोहिया ट्रस्ट और अखिलेश यादव विवाद क्या है?
कृष्णम ने कहा कि लोहिया ट्रस्ट की कमान अखिलेश यादव को मिलना राम मनोहर लोहिया की समाजवादी विचारधारा के साथ बड़ा विरोधाभास है। उनके अनुसार मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव जैसे वरिष्ठ नेताओं को हाशिये पर कर अखिलेश ने पार्टी में एकछत्र नेतृत्व स्थापित किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 3 घंटे पहले
  3. 2 दिन पहले
  4. 2 दिन पहले
  5. 3 सप्ताह पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले