यूसीसी पर ओवैसी की टिप्पणी अनुचित: भाजपा विधायक राजेंद्र मौर्य बोले — समान नागरिक संहिता संविधान की भावना
सारांश
मुख्य बातें
प्रतापगढ़ से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक राजेंद्र मौर्य ने 16 सितंबर 2026 को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के विरोध में दिए गए बयान को 'अनुचित' करार दिया। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता का एकमात्र उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक के लिए समान नागरिक अधिकार और एकसमान व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
मौर्य का पक्ष: यूसीसी राष्ट्रीय एकता का कानून
विधायक राजेंद्र मौर्य ने कहा कि यूसीसी को विरोध का विषय बनाने के बजाय इसके व्यापक उद्देश्य को समझा जाना चाहिए। उनके अनुसार, भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करता है और देश के कानूनों को भी इसी भावना के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा का मूल सिद्धांत 'सबका साथ, सबका विकास' है। सरकार का लक्ष्य है कि देश के प्रत्येक नागरिक तक समान रूप से सुविधाएं और अधिकार पहुँचें।'
ओवैसी पर सीधा निशाना
मौर्य ने ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति को कोई भी बयान देने से पूर्व उसके संवैधानिक और व्यापक सामाजिक प्रभाव पर विचार करना चाहिए। उन्होंने ओवैसी के लिए कहा कि उन्हें 'सद्बुद्धि' मिले और वे यूसीसी के वास्तविक उद्देश्य को समझें। यह यूसीसी पर जारी राष्ट्रीय बहस में एक और राजनीतिक प्रतिक्रिया है।
संविधान निर्माता आंबेडकर का संदर्भ
भाजपा विधायक ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का संविधान समानता और नागरिक अधिकारों की नींव पर टिका है। उनके अनुसार, यूसीसी को इसी संवैधानिक भावना के अनुरूप देखा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूसीसी का उद्देश्य किसी भी समुदाय के अधिकारों को सीमित करना नहीं, बल्कि अलग-अलग समुदायों के लिए बने अलग-अलग नागरिक प्रावधानों की जगह एक एकसमान नागरिक ढाँचा स्थापित करना है।
यूसीसी विवाद: व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि यूसीसी को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस जारी है। उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका है, जबकि केंद्र सरकार भी इस दिशा में कदम बढ़ाने की बात करती रही है। यह ऐसे समय में आया है जब यूसीसी को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों के बीच तीखी बहस छिड़ी हुई है। आलोचकों का कहना है कि यूसीसी अल्पसंख्यक समुदायों की धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है, जबकि समर्थकों का तर्क है कि यह संवैधानिक समानता की दिशा में अनिवार्य कदम है।
आगे की दिशा
यूसीसी पर यह राजनीतिक बयानबाज़ी आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है, क्योंकि कई राज्यों में विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यूसीसी पर राष्ट्रीय सहमति बनाने के लिए व्यापक संवाद और सभी पक्षों की भागीदारी आवश्यक है।