16 सितंबर 2026
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यूसीसी पर ओवैसी की टिप्पणी अनुचित: भाजपा विधायक राजेंद्र मौर्य बोले — समान नागरिक संहिता संविधान की भावना

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यूसीसी पर ओवैसी की टिप्पणी अनुचित: भाजपा विधायक राजेंद्र मौर्य बोले — समान नागरिक संहिता संविधान की भावना

सारांश

प्रतापगढ़ से भाजपा विधायक राजेंद्र मौर्य ने ओवैसी के यूसीसी-विरोधी बयान को 'अनुचित' बताया और संविधान निर्माता आंबेडकर का हवाला देते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के समान अधिकारों की गारंटी है।

मुख्य बातें

भाजपा विधायक राजेंद्र मौर्य ने 16 सितंबर 2026 को ओवैसी के यूसीसी-विरोधी बयान को 'अनुचित' करार दिया।
मौर्य ने कहा कि यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक अधिकार सुनिश्चित करना है, न किसी समुदाय को निशाना बनाना।
भीमराव आंबेडकर का उल्लेख करते हुए यूसीसी को संविधान की मूल भावना से जोड़ा।
भाजपा विधायक ने ओवैसी को 'सद्बुद्धि' की नसीहत दी और यूसीसी के व्यापक संवैधानिक पक्ष को समझने की अपील की।
उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य है; केंद्र स्तर पर भी बहस जारी है।

प्रतापगढ़ से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक राजेंद्र मौर्य ने 16 सितंबर 2026 को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के विरोध में दिए गए बयान को 'अनुचित' करार दिया। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता का एकमात्र उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक के लिए समान नागरिक अधिकार और एकसमान व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

मौर्य का पक्ष: यूसीसी राष्ट्रीय एकता का कानून

विधायक राजेंद्र मौर्य ने कहा कि यूसीसी को विरोध का विषय बनाने के बजाय इसके व्यापक उद्देश्य को समझा जाना चाहिए। उनके अनुसार, भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करता है और देश के कानूनों को भी इसी भावना के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा का मूल सिद्धांत 'सबका साथ, सबका विकास' है। सरकार का लक्ष्य है कि देश के प्रत्येक नागरिक तक समान रूप से सुविधाएं और अधिकार पहुँचें।'

ओवैसी पर सीधा निशाना

मौर्य ने ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति को कोई भी बयान देने से पूर्व उसके संवैधानिक और व्यापक सामाजिक प्रभाव पर विचार करना चाहिए। उन्होंने ओवैसी के लिए कहा कि उन्हें 'सद्बुद्धि' मिले और वे यूसीसी के वास्तविक उद्देश्य को समझें। यह यूसीसी पर जारी राष्ट्रीय बहस में एक और राजनीतिक प्रतिक्रिया है।

संविधान निर्माता आंबेडकर का संदर्भ

भाजपा विधायक ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का संविधान समानता और नागरिक अधिकारों की नींव पर टिका है। उनके अनुसार, यूसीसी को इसी संवैधानिक भावना के अनुरूप देखा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूसीसी का उद्देश्य किसी भी समुदाय के अधिकारों को सीमित करना नहीं, बल्कि अलग-अलग समुदायों के लिए बने अलग-अलग नागरिक प्रावधानों की जगह एक एकसमान नागरिक ढाँचा स्थापित करना है।

यूसीसी विवाद: व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि यूसीसी को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस जारी है। उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका है, जबकि केंद्र सरकार भी इस दिशा में कदम बढ़ाने की बात करती रही है। यह ऐसे समय में आया है जब यूसीसी को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों के बीच तीखी बहस छिड़ी हुई है। आलोचकों का कहना है कि यूसीसी अल्पसंख्यक समुदायों की धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है, जबकि समर्थकों का तर्क है कि यह संवैधानिक समानता की दिशा में अनिवार्य कदम है।

आगे की दिशा

यूसीसी पर यह राजनीतिक बयानबाज़ी आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है, क्योंकि कई राज्यों में विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यूसीसी पर राष्ट्रीय सहमति बनाने के लिए व्यापक संवाद और सभी पक्षों की भागीदारी आवश्यक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि आंबेडकर स्वयं यूसीसी के समर्थक थे — मगर उन्होंने इसे थोपे जाने के बजाय सर्वसम्मति से लागू करने की बात कही थी। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस बारीक अंतर को नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूसीसी पर राजेंद्र मौर्य ने ओवैसी को क्या जवाब दिया?
भाजपा विधायक राजेंद्र मौर्य ने ओवैसी के यूसीसी-विरोधी बयान को 'अनुचित' बताया और कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करना है। उन्होंने ओवैसी से यूसीसी के संवैधानिक पक्ष को समझने की अपील की।
यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) क्या है?
यूसीसी एक ऐसा कानूनी ढाँचा है जो विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में सभी धर्मों के नागरिकों पर एकसमान नियम लागू करता है। फिलहाल भारत में विभिन्न समुदायों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ प्रचलित हैं।
ओवैसी ने यूसीसी का विरोध क्यों किया है?
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी कथित तौर पर यूसीसी को अल्पसंख्यक समुदायों की धार्मिक स्वतंत्रता के लिए खतरा मानते हैं। उनका तर्क है कि यह कानून मुस्लिम पर्सनल लॉ सहित अन्य समुदायों की परंपराओं पर प्रतिकूल असर डाल सकता है।
क्या भारत में यूसीसी लागू हो चुका है?
उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने यूसीसी लागू किया है। केंद्र सरकार के स्तर पर इस पर चर्चा जारी है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर अभी यह पूरी तरह लागू नहीं हुआ है।
डॉ. आंबेडकर और यूसीसी का क्या संबंध है?
संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर यूसीसी के समर्थक थे और उन्होंने संविधान सभा में इसे राज्य नीति के निदेशक तत्वों में शामिल करवाया था। भाजपा नेता अक्सर उनके इस रुख का हवाला देकर यूसीसी को संवैधानिक वैधता प्रदान करने की कोशिश करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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