30 जुलाई 2026
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MPSC भर्ती में कटौती: कांग्रेस नेता अतुल लोंढे का महाराष्ट्र सरकार पर युवा-विरोधी नीति का आरोप

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MPSC भर्ती में कटौती: कांग्रेस नेता अतुल लोंढे का महाराष्ट्र सरकार पर युवा-विरोधी नीति का आरोप

सारांश

महाराष्ट्र सरकार के एक पत्र ने सीधी भर्ती का अनुपात 60% से घटाकर पदोन्नति के पक्ष में कर दिया — और कांग्रेस का कहना है कि इससे 32 लाख से अधिक युवा परीक्षार्थियों के सपने टूट गए हैं। SC/ST और महिलाओं के लिए पदोन्नति में आरक्षण न होने से यह नीति संवैधानिक सवाल भी खड़े करती है।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता अतुल लोंढे ने 30 जुलाई को महाराष्ट्र सरकार पर MPSC सीधी भर्ती में 26 फीसदी कटौती का आरोप लगाया।
पहले 60% पद सीधी भर्ती से भरे जाते थे; अब 60% पदोन्नति से भरने का निर्णय लिया गया है।
नायब तहसीलदार के पदों पर 80% भर्ती पदोन्नति के ज़रिए होगी।
राज्य के 32 लाख से अधिक प्रतियोगी परीक्षार्थियों पर सीधा असर पड़ने की आशंका।
लोंढे के अनुसार पदोन्नति में आरक्षण न होने से SC/ST और महिला उम्मीदवारों के अवसर सीमित होंगे।
कांग्रेस ने 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' को षड्यंत्र करार दिया; मामला विधानसभा में उठाने की माँग।

मुंबई में 30 जुलाई को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कांग्रेस नेता अतुल लोंढे ने महाराष्ट्र की महायुति सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि राज्य के राजस्व मंत्री द्वारा जारी एक पत्र के ज़रिए सरकारी अधिकारी पदों पर सीधी भर्ती की हिस्सेदारी घटाकर 32 लाख से अधिक युवा प्रतियोगी परीक्षार्थियों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया गया है। लोंढे के अनुसार, यह निर्णय संविधान-प्रदत्त आरक्षण व्यवस्था पर भी सीधा प्रहार है।

मुख्य घटनाक्रम

लोंढे ने बताया कि पहले महाराष्ट्र में 60 फीसदी अधिकारियों की नियुक्ति UPSC/MPSC के माध्यम से सीधी भर्ती से होती थी और 33 फीसदी पदोन्नति के ज़रिए भरे जाते थे। अब सरकार ने इस अनुपात को पलटते हुए 60 फीसदी पदों को पदोन्नति के माध्यम से भरने का निर्णय लिया है। उनके अनुसार इससे सीधी भर्ती में करीब 26 फीसदी की कटौती हो गई है। नायब तहसीलदार के पदों पर तो 80 फीसदी भर्ती पदोन्नति से करने का फैसला किया गया है।

युवाओं और परिवारों पर असर

लोंढे ने सवाल उठाया कि जिन मध्यमवर्गीय और किसान परिवारों ने अपनी ज़मीन और गहने बेचकर बच्चों को दूसरे शहरों में परीक्षा की तैयारी के लिए भेजा, उन्हें अब क्या जवाब दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय राज्य के 32 लाख से अधिक प्रतियोगी परीक्षार्थियों के सपनों को कुचलने जैसा है। उनका कहना था कि ऐसी नीतियाँ युवाओं को मानसिक संकट की ओर धकेलती हैं।

आरक्षण पर प्रभाव

लोंढे ने इस नीति को आरक्षण-विरोधी बताते हुए कहा कि पदोन्नति में SC/ST और महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं होता। इस प्रकार सीधी भर्ती घटाने से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला वर्ग के उम्मीदवारों के लिए सरकारी सेवाओं में प्रवेश के रास्ते स्वतः सीमित हो जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चिकित्सा विभाग में पहले ही इस तरह की कार्रवाई की जा चुकी है, जहाँ सीधी भर्ती के पदों को पदोन्नति कोटे में डालकर आरक्षण को प्रभावहीन बनाया गया।

बावनकुले के एक्स पोस्ट पर प्रतिक्रिया

लोंढे ने कहा कि इस मुद्दे पर बावनकुले ने एक्स पर पोस्ट करते हुए इसे उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि वास्तव में इससे UPSC/MPSC जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के ज़रिए तैयार होने वाले अनुभवी अधिकारियों की पूरी व्यवस्था को नुकसान पहुँचाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक सुनियोजित प्रयास है जिसके तहत बहुजन समाज को प्रशासनिक सेवाओं से दूर रखने की कोशिश की जा रही है।

'आरक्षण हटाओ आंदोलन' पर लोंढे का रुख

कांग्रेस नेता ने 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' को आंदोलन नहीं, बल्कि षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे यह देखें कि न्यायपालिका, नौकरशाही और मीडिया में बहुजन समाज की हिस्सेदारी कितनी कम है — उनके अनुसार इन क्षेत्रों में बमुश्किल 5 से 6 फीसदी ही बहुजन समाज के लोग हैं। आगे देखना होगा कि सरकार इस विवाद पर सफाई देती है या नहीं, और विपक्ष इसे विधानसभा में उठाने में सफल होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र सरकार ने MPSC सीधी भर्ती में क्या बदलाव किया है?
राज्य के राजस्व मंत्री द्वारा जारी एक पत्र के अनुसार, पहले जहाँ 60% अधिकारी पद सीधी भर्ती (UPSC/MPSC) से भरे जाते थे, अब 60% पद पदोन्नति के ज़रिए भरे जाएँगे। इससे सीधी भर्ती में करीब 26% की कटौती होने का आरोप कांग्रेस ने लगाया है।
इस फैसले से कितने युवा प्रभावित होंगे?
कांग्रेस नेता अतुल लोंढे के अनुसार, महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में 32 लाख से अधिक युवा इन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। सीधी भर्ती के पद घटने से इन सभी उम्मीदवारों के लिए सरकारी सेवा में प्रवेश के अवसर सीमित हो जाएँगे।
SC/ST और महिला उम्मीदवारों पर क्या असर पड़ेगा?
पदोन्नति प्रक्रिया में SC/ST और महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं होता। इसलिए सीधी भर्ती घटाने से इन वर्गों के उम्मीदवारों की सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व की संवैधानिक गारंटी प्रभावित होने की आशंका है।
नायब तहसीलदार पदों पर क्या व्यवस्था की गई है?
लोंढे के अनुसार, नायब तहसीलदार के पदों पर 80% भर्ती पदोन्नति के माध्यम से करने का निर्णय लिया गया है। इससे इस पद पर सीधी भर्ती के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए अवसर बेहद सीमित हो जाएँगे।
महाराष्ट्र सरकार का इस पर क्या रुख है?
बावनकुले ने एक्स पर पोस्ट करते हुए इस नीति को सकारात्मक कदम बताया और कहा कि सभी पद पदोन्नति से भरे जा रहे हैं। हालाँकि, विपक्ष का आरोप है कि यह UPSC/MPSC की मूल भावना के विरुद्ध है और इस मुद्दे को विधानसभा में आने से रोका जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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