एमपीएससी सुधार: हाई-लेवल टास्क फोर्स ने पुणे में की व्यापक चर्चा, ओएमआर पैटर्न और एन्क्रिप्टेड प्रश्न बैंक का प्रस्ताव
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) और राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, सुरक्षा और स्थिरता लाने के उद्देश्य से, महाराष्ट्र सरकार द्वारा गठित हाई-लेवल टास्क फोर्स ने 13 सितंबर 2026 को पुणे में छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और प्रमुख हितधारकों के साथ विस्तृत परामर्श बैठक की। इस बैठक में परीक्षा कैलेंडर, प्रश्न-पत्र की गुणवत्ता, पेपर लीक रोकथाम, खाली पदों की घोषणा और शिकायत निवारण जैसे अहम मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
टास्क फोर्स की संरचना और पृष्ठभूमि
यह टास्क फोर्स जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट की एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (सर्विसेज) वी. राधा की अध्यक्षता में कार्यरत है। इसमें डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस सदानंद दाते, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी सेक्रेटरी वीरेंद्र सिंह, पशुपालन व डेयरी सेक्रेटरी एन. रामास्वामी, नासिक डिविजनल कमिश्नर प्रवीण गेदाम, यूपीएससी के पूर्व सदस्य एयर मार्शल अजीत शंकरराव भोसले (सेवानिवृत्त) और आईआईटी बॉम्बे के श्यामप्रसाद करगुडे शामिल हैं।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने यह टास्क फोर्स एमपीएससी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं और उम्मीदवारों के उस विरोध-प्रदर्शन के बाद बनाई, जिसमें पारदर्शिता की मांग के साथ-साथ एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमन्वार के इस्तीफे की भी माँग उठी थी। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
मुख्य सुधार प्रस्ताव
टास्क फोर्स की चेयरपर्सन वी. राधा ने घोषणा की कि अगले वर्ष की प्रतियोगी परीक्षाएँ ऑनलाइन नहीं होंगी, बल्कि ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन (ओएमआर) शीट पैटर्न पर आयोजित की जाएंगी। इसके लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग गाइडलाइंस तैयार की जा रही हैं।
पेपर लीक रोकने के लिए कमेटी एक एन्क्रिप्टेड ई-क्वेश्चन बैंक प्रणाली पर विचार कर रही है, जिसमें प्रश्न तैयार करने वालों को भी यह नहीं पता चलेगा कि उनके प्रश्न किस परीक्षा में शामिल किए जाएंगे। प्रश्न-पत्र निर्माण, मुद्रण, परिवहन और वितरण में उन्नत तकनीक का उपयोग किए जाने की योजना है।
उम्मीदवारों और हितधारकों की मांगें
एमपीएससी अभ्यर्थियों ने सालाना परीक्षा कैलेंडर जारी करने और उसका कड़ाई से पालन करने की मांग रखी। उन्होंने बार-बार नीति परिवर्तन के बजाय प्रक्रिया में दीर्घकालिक स्थिरता पर जोर दिया और अलग-अलग कैडर के लिए न्यूनतम रिक्त पदों की संख्या पहले से घोषित करने की पुरजोर सिफारिश की।
हितधारकों ने प्रश्न-पत्रों और आंसर-की में गलतियों को समाप्त करने के लिए सख्त गुणवत्ता जाँच, मूल्यांकन में एकरूपता और आंसर स्क्रिप्ट की समीक्षा के लिए रिव्यूअर ऑडिट की भी माँग की। इसके अलावा, राज्य की सभी परीक्षाओं के लिए सिंगल-विंडो रजिस्ट्रेशन और एकीकृत शिकायत पोर्टल स्थापित करने की मांग भी सामने आई।
परीक्षा केंद्रों पर स्वच्छ शौचालय, पीने का पानी और पर्याप्त बैठक व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाएँ सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। चयन के बाद उम्मीदवारों के 'ऑप्ट-आउट' पर स्पष्ट नीति की माँग भी उठी, ताकि एक उम्मीदवार के कई पदों के लिए क्वालिफाई करने पर सीट बर्बाद न हो। विकलांगता और स्पोर्ट्स कोटा प्रमाण-पत्रों के समय पर सत्यापन की माँग भी रखी गई।
अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन
टास्क फोर्स देशभर के लोक सेवा आयोगों की कार्यप्रणाली का विश्लेषण कर रही है, विशेष रूप से तमिलनाडु, गुजरात और यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएससी) की प्रणालियों का, ताकि महाराष्ट्र के लिए सर्वोत्तम उपाय अपनाए जा सकें। एमपीएससी पर बढ़ते प्रशासनिक बोझ को देखते हुए आयोग के प्रशासनिक कर्मचारियों, तकनीकी क्षमताओं और संगठनात्मक ढाँचे को तत्काल मज़बूत करने की आवश्यकता रेखांकित की गई।
अधिकारियों का नज़रिया और आगे की राह
पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते ने कहा, 'हमारा मकसद राज्य के लिए अधिकारियों के चयन की एक तेज, अधिक पारदर्शी और जवाबदेह प्रक्रिया बनाना है।' इस परामर्श बैठक में डिविजनल कमिश्नर शीतल तेली-उगाले, जिला कलेक्टर जितेंद्र दूदी, एडिशनल डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर सतीश राउत और रेजिडेंट डिप्टी कलेक्टर ज्योति कदम भी उपस्थित रहे। टास्क फोर्स अब इन सुझावों को समेकित कर अपनी अंतिम सिफारिशें तैयार करेगी, जिससे एमपीएससी की कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव की उम्मीद है।