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महाराष्ट्र: CM फडणवीस का बड़ा फैसला, रिटायर पुलिस डॉग्स अब जीवनभर फोर्स के साथ रहेंगे

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महाराष्ट्र: CM फडणवीस का बड़ा फैसला, रिटायर पुलिस डॉग्स अब जीवनभर फोर्स के साथ रहेंगे

सारांश

दस साल तक विस्फोटक खोजने, अपराधियों को पकड़ने और जानें बचाने वाले महाराष्ट्र पुलिस के डॉग स्क्वाड के कुत्ते अब रिटायरमेंट के बाद अजनबियों के हाथों में नहीं जाएंगे। CM फडणवीस के निर्देश पर गृह विभाग इन मूक नायकों की जीवनभर देखभाल का खर्च उठाएगा।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने निर्देश दिए कि रिटायर पुलिस डॉग जीवनभर पुलिस फोर्स में ही रहें।
पुलिस कुत्तों की सेवा अवधि 10 वर्ष तय है; रिटायरमेंट के बाद शेष आयु सामान्यतः एक से डेढ़ वर्ष होती है।
इन कुत्तों को 6 से 9 सप्ताह की आयु में पुलिस फोर्स में भर्ती किया जाता है।
रिटायरमेंट के बाद भोजन, स्वास्थ्य और देखभाल का संपूर्ण खर्च गृह विभाग, महाराष्ट्र वहन करेगा।
गृह विभाग की रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय लिया गया, जिसमें रिटायर कुत्तों के तनाव और खाना छोड़ने की स्थिति का उल्लेख था।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक संवेदनशील और मानवीय निर्णय लेते हुए राज्य के पुलिस डॉग स्क्वाड के सेवानिवृत्त कुत्तों को जीवनभर पुलिस फोर्स में ही रखने के निर्देश दिए हैं। गृह विभाग द्वारा सौंपी गई एक विशेष रिपोर्ट के आधार पर लिया गया यह फैसला सुनिश्चित करेगा कि 10 वर्षों की निष्ठापूर्ण सेवा के बाद रिटायर होने वाले ये कुत्ते अपने परिचित परिवेश और देखभालकर्ताओं के साथ ही अपने शेष जीवन बिता सकें।

पुलिस डॉग स्क्वाड की भूमिका और समस्या

पुलिस डॉग स्क्वाड अपराध जांच, विस्फोटक पहचान, नशीले पदार्थों की बरामदगी और बचाव अभियानों में अग्रणी भूमिका निभाता है। इन कुत्तों को 6 से 9 सप्ताह की आयु में पुलिस फोर्स में शामिल किया जाता है और विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। आतंकवादियों को रोकने से लेकर मलबे में दबे लोगों को खोजने तक, ये कुत्ते बिना थके अपनी ड्यूटी निभाते हैं।

समस्या तब उत्पन्न होती है जब 10 साल की सेवा पूरी होने पर इन्हें फोर्स से अलग कर नए मालिकों को गोद दे दिया जाता था। अपने परिचित पुलिसकर्मियों और परिवेश से बिछड़ने के कारण ये कुत्ते गहरे तनाव में चले जाते थे — कई मामलों में खाना-पीना तक छोड़ देते थे।

गृह विभाग की रिपोर्ट और मुख्यमंत्री का निर्देश

गृह विभाग ने इस गंभीर स्थिति को दर्शाती एक विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपी। रिपोर्ट में बताया गया कि रिटायरमेंट के बाद नए मालिकों के पास भेजे गए कुत्ते अपने पुराने देखभालकर्ता पुलिसकर्मियों से बिछड़ने के गम में भोजन तक त्याग देते हैं।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस रिपोर्ट पर तत्काल संज्ञान लेते हुए गृह विभाग को निर्देश दिए कि रिटायर होने के बाद भी ये कुत्ते पुलिस फोर्स में ही रहें। उन्होंने कहा कि दस साल तक निष्ठा से सेवा करने के बाद किसी भी प्राणी का इस तरह परेशान होना उचित नहीं है।

नई व्यवस्था में क्या बदलेगा

नए निर्णय के तहत रिटायरमेंट के बाद से मृत्यु तक इन कुत्तों के भोजन, स्वास्थ्य और समस्त देखभाल का खर्च पुलिस विभाग वहन करेगा। कुत्ता अपने परिचित पुलिसकर्मियों और परिसर में ही रहेगा, जिससे उसका भावनात्मक लगाव बना रहेगा।

गौरतलब है कि 10 साल की सेवा पूरी करने के बाद इन कुत्तों की शेष आयु सामान्यतः एक से डेढ़ वर्ष ही रहती है। ऐसे में यह व्यवस्था उनके जीवन के अंतिम पड़ाव को सम्मानजनक और सुखद बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

आम जनता और पशु प्रेमियों की प्रतिक्रिया

पशु प्रेमियों और नागरिक संगठनों ने इस फैसले का खुले दिल से स्वागत किया है। उनका मानना है कि पुलिस डॉग स्क्वाड के इन मूक नायकों को उनकी सेवा के बदले सम्मानजनक जीवन मिलना उनका अधिकार है। यह निर्णय न केवल पशु कल्याण की दृष्टि से बल्कि पुलिस बल की मनोबल वृद्धि के लिहाज से भी सराहनीय माना जा रहा है।

आगे की राह

गृह विभाग अब इस नीति के क्रियान्वयन के लिए विस्तृत दिशानिर्देश तैयार करेगा, जिसमें रिटायर कुत्तों की देखभाल के लिए बजट आवंटन और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की नियुक्ति शामिल होगी। यह फैसला महाराष्ट्र पुलिस के डॉग स्क्वाड को देश के अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े सवाल की ओर इशारा करता है — क्या राज्य अपने 'गैर-मानव' सेवकों के प्रति जवाबदेही निभाता है? महाराष्ट्र पुलिस के डॉग स्क्वाड ने दशकों तक जोखिम भरे अभियानों में अपूरणीय भूमिका निभाई है, फिर भी उनके रिटायरमेंट की कोई संस्थागत नीति अब तक नहीं थी। यह फैसला स्वागतयोग्य है, लेकिन असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन में होगी — बजट आवंटन, जिम्मेदार कर्मियों की नियुक्ति और निगरानी तंत्र के बिना यह महज एक घोषणा बनकर रह सकता है। अन्य राज्यों को भी इस मॉडल को अपनाने पर विचार करना चाहिए।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र के रिटायर पुलिस डॉग्स के बारे में CM फडणवीस का फैसला क्या है?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने निर्देश दिए हैं कि 10 साल की सेवा पूरी कर रिटायर होने वाले पुलिस डॉग्स को नए मालिकों को गोद देने की बजाय जीवनभर पुलिस फोर्स में ही रखा जाए। उनके भोजन, स्वास्थ्य और देखभाल का खर्च गृह विभाग वहन करेगा।
पुलिस डॉग्स को रिटायरमेंट के बाद क्या समस्या होती थी?
10 साल की सेवा के बाद जब इन कुत्तों को नए मालिकों को गोद दिया जाता था, तो वे अपने परिचित पुलिसकर्मियों और परिवेश से बिछड़ने के कारण गहरे तनाव में चले जाते थे। कई मामलों में ये कुत्ते खाना-पीना तक छोड़ देते थे और नए मालिकों के साथ घुल-मिल नहीं पाते थे।
महाराष्ट्र पुलिस में कुत्तों को किस उम्र में भर्ती किया जाता है और उनकी सेवा अवधि कितनी है?
इन कुत्तों को मात्र 6 से 9 सप्ताह की आयु में पुलिस फोर्स में शामिल किया जाता है। उनकी सेवा अवधि 10 वर्ष निर्धारित है, जिसके बाद उनकी शेष आयु सामान्यतः एक से डेढ़ वर्ष ही रहती है।
नई नीति के तहत रिटायर पुलिस डॉग्स की देखभाल कौन करेगा?
नई व्यवस्था के अनुसार रिटायरमेंट के बाद से मृत्यु तक इन कुत्तों के भोजन, स्वास्थ्य और समस्त देखभाल का खर्च महाराष्ट्र का गृह विभाग उठाएगा। कुत्ता अपने परिचित पुलिसकर्मियों और परिसर में ही रहेगा।
इस फैसले का पशु प्रेमियों और समाज ने किस तरह स्वागत किया?
पशु प्रेमियों और नागरिक संगठनों ने इस निर्णय का व्यापक स्वागत किया है। उनका कहना है कि पुलिस डॉग स्क्वाड के इन मूक नायकों को उनकी सेवा के बदले सम्मानजनक जीवन मिलना उनका अधिकार है।
राष्ट्र प्रेस
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