महिला आरक्षण विधेयक पर शिवसेना और भाजपा नेताओं का समर्थन, संसद में महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि का आह्वान

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महिला आरक्षण विधेयक पर शिवसेना और भाजपा नेताओं का समर्थन, संसद में महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि का आह्वान

सारांश

महिला आरक्षण विधेयक को लेकर शिवसेना और भाजपा नेताओं ने संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। शायना एनसी और स्नेहा दुबे पंडित ने इस विधेयक के महत्व और प्रभाव को रेखांकित किया है।

Key Takeaways

  • महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण है।
  • महिलाओं की वर्तमान भागीदारी केवल 13 प्रतिशत है।
  • शिवसेना और भाजपा नेताओं का समर्थन महत्वपूर्ण है।
  • यह विधेयक महिलाओं के मुद्दों पर चर्चा को प्रोत्साहित करेगा।
  • विधेयक का पास होना महिलाओं की राजनीतिक स्थिति को मजबूत करेगा।

मुंबई, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ तीव्र हो गई हैं। शिवसेना नेता शायना एनसी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन की आवश्यकता अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि वर्तमान में लोकसभा की 543 सीटों में केवल 74 महिला सांसद हैं, जो कि कुल 13 प्रतिशत के बराबर है।

शायना एनसी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा, "2024 की लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व केवल 13 प्रतिशत है। 17वीं लोकसभा में भी केवल 78 महिला सांसद थीं, जो लगभग 14 प्रतिशत है। बहुत कम महिला सांसद हैं जो लगातार महिलाओं के मुद्दों को उठाती हैं, चाहे वह महिलाओं के खिलाफ हिंसा हो, कार्यस्थल की स्थितियां, पोषण या लिंगानुपात जैसे विषय हों। इन सभी पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।"

उन्होंने लोकतांत्रिक निष्पक्षता पर जोर देते हुए कहा कि संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व लगभग 15 प्रतिशत है, जो कि अत्यंत कम है। शायना एनसी ने महिला आरक्षण विधेयक के संदर्भ में कहा, "दक्षिण और उत्तर दोनों क्षेत्रों में सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इसमें जनगणना पर आधारित अनुपात भी शामिल किया जाएगा। चुनाव आयोग जनगणना और आम सहमति की समीक्षा करेगा। जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू होगा, तो एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। ऐसे में किसे परेशानी हो सकती है?"

वहीं, वसई-विरार से भाजपा विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने भी महिला आरक्षण विधेयक का जोरदार समर्थन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का धन्यवाद किया कि उन्होंने 2023 में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को पास किया। स्नेहा दुबे पंडित ने कहा, "यह विधेयक संसद द्वारा पारित किया जा चुका है। अब इस सत्र में सरकार ने 16, 17 और 18 तारीख को तीन अतिरिक्त दिनों का प्रस्ताव रखा है, ताकि विधेयक पर चर्चा और आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सके।"

उन्होंने पश्चिम बंगाल की स्थिति पर भी चर्चा की और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में पश्चिम बंगाल की रैली में घुसपैठियों के बारे में जो कहा, वह वास्तव में चौंकाने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल जैसे राज्यों में घुसपैठियों की अनियंत्रित स्थिति वहां की मौजूदा अराजकता और बुरी स्थिति की मुख्य वजह है।

दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि महिला आरक्षण विधेयक के लागू होने से न केवल महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर बेहतर चर्चा और समाधान भी संभव हो सकेगा।

Point of View

बल्कि समाज में महिलाओं के मुद्दों पर भी ज़ोर देगा।
NationPress
15/04/2026

Frequently Asked Questions

महिला आरक्षण विधेयक क्या है?
महिला आरक्षण विधेयक, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी कहा जाता है, का उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करना है।
कितनी महिला सांसद वर्तमान में लोकसभा में हैं?
वर्तमान में लोकसभा की 543 सीटों में केवल 74 महिला सांसद हैं, जो कि 13 प्रतिशत है।
इस विधेयक का समर्थन कौन कर रहा है?
शिवसेना नेता शायना एनसी और भाजपा विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने इस विधेयक का समर्थन किया है।
महिला आरक्षण विधेयक कब पारित हुआ?
महिला आरक्षण विधेयक को 2023 में संसद द्वारा पारित किया गया।
इस विधेयक से महिलाओं को क्या लाभ होगा?
इस विधेयक के लागू होने पर महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी और उनके मुद्दों पर अधिक गंभीर चर्चा संभव होगी।
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