क्या मकर संक्रांति से एक दिन पहले कम हो जाता है कुंड का पानी? रहस्यमय हैं मंदार पर्वत पर स्थित मधुसूदन मंदिर

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क्या मकर संक्रांति से एक दिन पहले कम हो जाता है कुंड का पानी? रहस्यमय हैं मंदार पर्वत पर स्थित मधुसूदन मंदिर

सारांश

मंदार पर्वत का रहस्य और इसके प्राचीन मधुसूदन मंदिर की अद्भुत कहानियों पर एक नजर। क्या मकर संक्रांति पर कुंड का पानी सच में कम हो जाता है? जानें इस रहस्यमय स्थल के बारे में।

मुख्य बातें

मंदार पर्वत का संबंध समुद्र मंथन से है।
यहाँ मधुसूदन मंदिर है, जो भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है।
मकर संक्रांति पर कुंड का पानी कम होता है।
यहाँ हर साल भव्य मेले का आयोजन होता है।
मंदार पर्वत भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

नई दिल्ली, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। हिंदू धर्म में मंदार पर्वत का उल्लेख बार-बार किया गया है। इसे भगवान विष्णु का विश्राम स्थल माना जाता है और यही वह स्थान है जहाँ समुद्र मंथन हुआ था।

क्या आप जानते हैं कि यह पर्वत कहाँ स्थित है और समुद्र मंथन के बाद मंदार पर्वत का क्या हुआ? बिहार के बांका में आज भी वह मंदार पर्वत मौजूद है, जिसका प्रयोग समुद्र मंथन के दौरान किया गया था। उस मंथन में अमृत के साथ विष भी निकला था।

भागलपुर शहर से 50 किलोमीटर दूर स्थित 800 फीट ऊँची ग्रेनाइट की पहाड़ी, मंदार पर्वत, एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती है और इसका संबंध अमृत मंथन की पौराणिक कथा से है। किंवदंती के अनुसार, देवताओं ने इस पहाड़ी का उपयोग अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन में किया था। पौराणिक कथाओं में देवताओं द्वारा किए गए समुद्र मंथन के दौरान जिन-जिन बातों का उल्लेख किया गया था, उसका रहस्य और प्रमाण आज भी मौजूद हैं।

पर्वत पर 10 मीटर से अधिक लंबे और मोटे रेखा के निशान हैं, जिन्हें वासुकी नाग का चिन्ह माना जाता है। मंथन के दौरान वासुकी नाग को मंदार पर्वत से लपेटकर मंथन किया गया था और उसके निशान आज भी देखे जा सकते हैं। इसी पहाड़ी पर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित मधुसूदन नाम का मंदिर भी स्थित है, जो बहुत पुराना है। मंदिर के गर्भगृह में श्रीकृष्ण की काले पत्थर से बनी छोटी सी प्रतिमा स्थापित है। माना जाता है कि मधु नामक राक्षस का वध करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण मंदार पर्वत पर विश्राम करने के लिए रुके थे, जिसके बाद इस मंदिर की स्थापना की गई।

मकर संक्रांति के अवसर पर मंदिर में भव्य मेले का आयोजन होता है, जहाँ लाखों भक्त पहुंचते हैं। प्रशासन स्वयं भव्य मेले की व्यवस्था करता है और सुरक्षा से लेकर रंग-रोगन का कार्य करवाता है। मकर संक्रांति के दिन मंदिर के बाहर मौजूद पापहरणी कुंड में भक्त स्नान करते हैं। इस कुंड की खासियत यह है कि मकर संक्रांति से एक रात पहले इसमें पानी का स्तर बहुत कम हो जाता है और कुंड में मौजूद शंख दिखने लगता है, लेकिन अगले ही दिन पानी का स्तर बढ़ जाता है। यह नजारा साल में केवल एक बार मकर संक्रांति पर ही देखने को मिलता है।

मधुसूदन मंदिर में हर साल भगवान मधुसूदन की रथ यात्रा निकाली जाती है, जिसमें भगवान श्री कृष्ण के लिए रथ तैयार किया जाता है। रथ खींचने के लिए उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक भक्तों को मंदार पर्वत पर देखा जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपरा का भी प्रतीक है। यह स्थान हर साल लाखों भक्तों को आकर्षित करता है, जो यहाँ आकर अपने आस्था और विश्वास को व्यक्त करते हैं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंदार पर्वत का धार्मिक महत्व क्या है?
मंदार पर्वत को भगवान विष्णु का विश्राम स्थल माना जाता है और यहाँ समुद्र मंथन की पौराणिक कथा जुड़ी हुई है।
मकर संक्रांति पर कुंड का पानी क्यों कम होता है?
मकर संक्रांति के दिन कुंड का पानी एक रात पहले कम हो जाता है, जिससे शंख दिखाई देने लगता है।
मधुसूदन मंदिर की स्थापना कब हुई थी?
मंदिर की स्थापना भगवान श्रीकृष्ण के मधु राक्षस का वध करने के बाद हुई थी।
मंदार पर्वत पर रथ यात्रा कब होती है?
हर साल मकर संक्रांति पर भगवान मधुसूदन की रथ यात्रा निकाली जाती है।
कहाँ स्थित है मंदार पर्वत?
मंदार पर्वत बिहार के बांका जिले में स्थित है।
राष्ट्र प्रेस
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