उज्जैन का मंगलनाथ मंदिर: जहां नंदी नहीं, बकरा है महादेव की सवारी
सारांश
Key Takeaways
- मंगलनाथ मंदिर में नंदी की जगह बकरा पूजा जाता है।
- यह मंदिर मंगल ग्रह का जन्मस्थान माना जाता है।
- यहाँ भात पूजा और नवग्रह की शांति पूजा होती है।
- मंदिर में भक्त दूर-दूर से विशेष पूजा के लिए आते हैं।
- मंदिर की पौराणिक कथाएँ इसे खास बनाती हैं।
नई दिल्ली, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अक्सर यह सुना जाता है कि कुंडली में मंगल की स्थिति सही नहीं होने पर व्यक्ति को तनाव, पारिवारिक झगड़े और विवाह में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। मंगल दोष निवारण के लिए लोग विभिन्न अनुष्ठान करते हैं, लेकिन महाकाल की नगरी में एक ऐसा मंदिर है, जो मंगल दोष को समाप्त करने की अद्भुत क्षमता रखता है। हम बात कर रहे हैं मंगलनाथ मंदिर की।
यह मंदिर महाकाल की नगरी में स्थित है और इसे विश्व का पहला मंदिर माना जाता है, जिसे मंगल ग्रह का जन्मस्थल माना जाता है। इस मंदिर में सूर्य की किरणें सीधे भगवान शिव पर पड़ती हैं, जिन्हें मंगलनाथ के रूप में पूजा जाता है। लोग दूर-दूर से यहां विशेष पूजा अनुष्ठान के लिए आते हैं, ताकि वे मंगल दोष से मुक्ति प्राप्त कर सकें। भात पूजा यहाँ एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जिसमें पके चावल को मंत्रों के साथ भगवान शिव को अर्पित किया जाता है।
कहा जाता है कि यही वह स्थान है जहां भगवान शिव के पसीने से मंगल ग्रह का जन्म हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब महादेव एक राक्षस से लड़ रहे थे, तब उनके पसीने की एक बूंद यहां गिरी, जिससे शिवलिंग और मंदिर का निर्माण हुआ। इसलिए उज्जैन को महादेव का शहर भी कहा जाता है।
कर्क रेखा पर स्थित इस प्राचीन शिव मंदिर की एक और विशेषता यह है कि यहां भगवान शिव के साथ हमेशा नंदी महाराज नहीं होते, बल्कि बकरा
इस मंदिर में केवल मंगल दोष की पूजा नहीं होती, बल्कि नवग्रह की शांति पूजा और कालसर्प दोष मुक्ति की पूजा भी की जाती है।