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मालवीय नगर अग्निकांड: 21 की मौत, गद्दे बिछाकर बचाई जान — ‘समय पर पहुंचतीं दमकल तो बचतीं जिंदगियाँ’

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मालवीय नगर अग्निकांड: 21 की मौत, गद्दे बिछाकर बचाई जान — ‘समय पर पहुंचतीं दमकल तो बचतीं जिंदगियाँ’

सारांश

मालवीय नगर के एक बी-एंड-बी होटल में लगी आग ने 21 जिंदगियाँ छीन लीं, लेकिन दुकानदार अरमान मंसूरी के बिछाए 20-22 गद्दों ने कई जानें बचा लीं। चश्मदीदों का दावा — पहली चिंगारी 8 बजे, दमकल पहुँची 9:40 बजे। सवाल यह कि क्या डेढ़ घंटे की देरी ने त्रासदी को बड़ा कर दिया।

मुख्य बातें

दिल्ली के मालवीय नगर स्थित बी-एंड-बी होटल इमारत में लगी आग में 21 लोगों की मौत ।
दुकानदार अरमान मंसूरी और पिता रियाजुद्दीन मंसूरी ने 20-22 गद्दे बिछाकर कई लोगों की जान बचाई।
स्थानीय निवासियों के अनुसार पहली चिंगारी 8 बजे , दमकल पहुँची रात 9:40 बजे ।
मालवीय नगर निवासी विवेक अग्रवाल का पूरा परिवार आग की चपेट में आया।
मंत्री आशीष सूद ने कहा — बिना NOC वाली इमारतें सील होंगी, अनुमतियाँ रद्द की जाएँगी।
इमारत को 2024 में छह कमरे के बी-एंड-बी संचालन की अनुमति मिली थी।

राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में एक बेड-एंड-ब्रेकफास्ट होटल की इमारत में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत हो गई। हादसे के दौरान स्थानीय दुकानदार अरमान मंसूरी और उनके पिता रियाजुद्दीन मंसूरी ने सूझबूझ दिखाते हुए अपनी दुकान से 20-22 गद्दे निकालकर सड़क पर बिछा दिए, जिनकी मदद से ऊपरी मंज़िलों से कूदे कई लोगों की जान बच गई।

मुख्य घटनाक्रम

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत से शाम करीब 8 बजे पहली चिंगारी निकलनी शुरू हुई और 8:30 बजे तक पूरे इलाके में जलने की गंध फैल गई थी। स्थानीय निवासी का कहना है कि दमकल की पहली गाड़ी रात 9:40 बजे मौके पर पहुँची। एक स्थानीय निवासी ने बताया, ‘लगभग 8:30 बजे इलाके में जलने की गंध आने लगी थी। पहली चिंगारी करीब 8 बजे दिखी, लेकिन दमकल की गाड़ी 9:40 बजे पहुंची। अगर दमकल समय पर पहुँच जातीं तो नुकसान कम हो सकता था।’

दुकानदार ने ऐसे बचाई कई जानें

दुकान मालिक अरमान मंसूरी ने बताया, ‘मुझे करीब 8:30 बजे फोन आया कि पड़ोस के होटल में आग लग गई है। लोग चीख रहे थे और दूसरी-तीसरी मंजिल से कूदने की कोशिश कर रहे थे। मैंने अपनी दुकान से 20-22 गद्दे निकालकर बाहर बिछा दिए। कई लोग उन पर कूदकर बच गए।’ चश्मदीदों के अनुसार, यदि गद्दे न बिछाए गए होते तो ऊपरी मंज़िलों से कूदने वालों की मौत भी तय थी।

एक पूरा परिवार खत्म

मालवीय नगर निवासी विवेक अग्रवाल अपने पूरे परिवार के साथ इस हादसे की चपेट में आ गए। उनके पड़ोसी योगेंद्र यादव ने भावुक होते हुए कहा, ‘विवेक बहुत नेक इंसान था। उनकी पत्नी एनजीओ चलाती हैं। तीन दिन पहले ही उनसे बात हुई थी। उनकी दो बेटियाँ और एक बेटा हैं, जो स्कूल जाते हैं। यह विश्वास नहीं हो रहा कि एक हादसे ने पूरे परिवार को छीन लिया।’

राजनीतिक प्रतिक्रिया

पूर्व केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी पीड़ित परिवारों से मिलने पहुँचीं और कहा, ‘गर्मी बहुत ज्यादा है, जो इस तरह की घटनाओं का कारण बन रही है। मुझे पूरा भरोसा है कि दिल्ली सरकार जो भी जरूरी होगा, वह करेगी।’ कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से अपील करते हुए कहा, ‘हाल के दिनों में दिल्ली में आग की कई घटनाएँ हुई हैं। मुख्यमंत्री सक्रिय भूमिका निभाएँ और भविष्य में ऐसी घटनाएँ रोकी जाएँ।’

केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा, ‘यह सिर्फ एक जान जाने का मामला नहीं, कई जानें गई हैं। जो दोषी होगा, उसे सजा मिलेगी। भाजपा की पक्की प्रतिबद्धता है कि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।’

सरकार की कार्रवाई और आगे की राह

दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने बताया कि इस इमारत में 2024 में छह कमरे वाले बेड-एंड-ब्रेकफास्ट को अनुमति दी गई थी। उन्होंने कहा, ‘अब हम गहन जाँच करेंगे और जिन इमारतों के पास जरूरी एनओसी और अनुमतियाँ नहीं हैं, उन्हें सील कर दिया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों की अनुमतियाँ रद्द कर दी जाएँगी।’ प्रशासन ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में राजधानी के अन्य गेस्टहाउस और बी-एंड-बी प्रतिष्ठानों की भी सघन जाँच होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

राजधानी के अनियमित ‘बी-एंड-बी’ इकोसिस्टम और दमकल प्रतिक्रिया-समय की दो-तरफा विफलता है। यदि चश्मदीदों के दावे सही हैं कि पहली चिंगारी 8 बजे और दमकल 9:40 बजे पहुँची, तो डेढ़ घंटे की यह खाई जवाबदेही के दायरे में आनी चाहिए। यह विडंबना ही है कि वर्दीधारी तंत्र देर से पहुँचा, जबकि गली के एक दुकानदार के 22 गद्दों ने वह काम किया जो सिस्टम नहीं कर पाया। दिल्ली में बीते वर्षों में बेबी केयर सेंटर से लेकर कोचिंग बेसमेंट तक — हर त्रासदी के बाद ‘सीलिंग ड्राइव’ का वही ढर्रा दोहराया जाता है; असली परीक्षा यह है कि क्या इस बार कार्रवाई सुर्खियों से आगे जाएगी।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मालवीय नगर अग्निकांड में कितने लोगों की मौत हुई है?
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक बेड-एंड-ब्रेकफास्ट होटल वाली इमारत में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत हुई है। मृतकों में मालवीय नगर निवासी विवेक अग्रवाल और उनके परिवार के सदस्य भी शामिल बताए जा रहे हैं।
अरमान मंसूरी कौन हैं और उन्होंने जानें कैसे बचाईं?
अरमान मंसूरी मालवीय नगर में दुकान चलाने वाले स्थानीय दुकानदार हैं। आग लगने की सूचना मिलते ही उन्होंने और उनके पिता रियाजुद्दीन मंसूरी ने अपनी दुकान से 20-22 गद्दे निकालकर इमारत के बाहर बिछा दिए, जिन पर दूसरी-तीसरी मंजिल से कूदकर कई लोगों की जान बच गई।
क्या दमकल की गाड़ियाँ देरी से पहुँचीं?
स्थानीय निवासियों के अनुसार पहली चिंगारी रात लगभग 8 बजे दिखी थी, जबकि दमकल की गाड़ी कथित तौर पर 9:40 बजे मौके पर पहुँची। चश्मदीदों का कहना है कि यदि दमकल समय पर पहुँच जाती तो जान-माल का नुकसान कम हो सकता था; आधिकारिक पुष्टि अभी अपेक्षित है।
दिल्ली सरकार ने क्या कार्रवाई की घोषणा की है?
दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद के अनुसार पूरे मामले की गहन जाँच होगी। जिन इमारतों के पास जरूरी एनओसी और अनुमतियाँ नहीं हैं उन्हें सील किया जाएगा, और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों की अनुमतियाँ रद्द की जाएँगी। इस इमारत को 2024 में छह कमरे वाले बी-एंड-बी की अनुमति मिली थी।
राजनीतिक प्रतिक्रिया क्या रही है?
पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी पीड़ित परिवारों से मिलने पहुँचीं, कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की, और केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने भरोसा जताया कि दोषियों को सजा मिलेगी और ऐसी त्रासदी दोबारा न हो — इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएँगे।
राष्ट्र प्रेस
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