ममता बनर्जी ने छात्र संघ चुनाव रोके, हिटलर-मुसोलिनी से तुलना: विपक्ष नेता ऋतब्रत बनर्जी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने 28 अगस्त को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने सत्ता में आने के बाद छात्र संघ चुनावों पर रोक लगाकर लोकतंत्र के विरुद्ध कार्य किया। साथ ही उन्होंने वर्तमान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सरकार से छात्रसंघ चुनाव तत्काल कराने की माँग की।
मुख्य आरोप और बयान
ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, 'ममता बनर्जी खुद एक छात्र संघ की नेता थीं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्होंने स्टूडेंट यूनियन चुनाव रोक दिए। यह एक माफ न करने लायक जुर्म है और लोकतंत्र के खिलाफ है। हिटलर और मुसोलिनी भी सत्ता में आने के बाद उन लोगों में से थे जिन्होंने सबसे पहले छात्र संघ के चुनाव रोके थे।' उनका यह बयान कोलकाता में दिया गया।
भाजपा सरकार से सवाल
विपक्ष के नेता ने वर्तमान सरकार को भी कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा, 'छात्र संघ के चुनाव का ऐलान क्यों नहीं हुआ, यह हम मुख्यमंत्री से पूछना चाहते हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) को इसका जवाब देना ही पड़ेगा।' उनके इस बयान से स्पष्ट है कि छात्र संघ चुनाव का मुद्दा अब सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया है।
ऋतब्रत बनर्जी का व्यक्तिगत अनुभव
ऋतब्रत बनर्जी ने अपने छात्र आंदोलन के दिनों का हवाला देते हुए कहा कि वे 1996 से 2016 तक, 20 वर्षों तक जमीनी स्तर पर छात्र आंदोलन से जुड़े रहे। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि जब वे कोलकाता वापस लौटे तो देखा कि 67 वर्ष की उम्र का एक व्यक्ति आज भी खुद को छात्र नेता बता रहा है।
चार्टर माफिया पर निशाना
ऋतब्रत बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि 15 वर्षों तक पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सरकार के दौरान 'चार्टर माफिया' का बोलबाला रहा, जो पूरे राज्य को अपनी जागीर समझता था। उनके अनुसार, इस नेक्सस की पुरानी आदतें अभी भी नहीं गई हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में छात्र राजनीति और विश्वविद्यालय प्रशासन को लेकर बहस तेज़ हो रही है।
आगे क्या होगा
छात्र संघ चुनाव की माँग अब राज्य की राजनीति में एक प्रमुख मुद्दा बनती दिख रही है। विपक्ष के इस आक्रामक रुख के बाद देखना होगा कि सुवेंदु अधिकारी सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या राज्य के विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनावों की प्रक्रिया शुरू होती है।