मणिपुर में सशस्त्र समूहों पर UAPA: CM खेमचंद सिंह ने दिए सख्त निर्देश, हिंसा में संलिप्त गुटों पर होगी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 3 नवंबर 2026 को इंफाल स्थित मंत्रिपुखरी मुख्यमंत्री सचिवालय के कैबिनेट हॉल में एक उच्चस्तरीय सुरक्षा समन्वय बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि हाल की हिंसा में संलिप्त पाए जाने वाले सशस्त्र समूहों के विरुद्ध गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य की मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति की गहन समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया।
बैठक में क्या हुए निर्देश
मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उन सक्रिय सशस्त्र समूहों की शीघ्र पहचान करें, जिन पर राज्य में हाल ही में हुई हिंसा की घटनाओं में शामिल होने का संदेह है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शांति वार्ता प्रक्रिया में भाग लेने वाले समूहों को इस कार्रवाई के दायरे से बाहर रखा जाएगा।
सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे इन समूहों की संलिप्तता के बारे में जल्द से जल्द एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर यदि निर्दोष नागरिकों के विरुद्ध हिंसा में इन समूहों की भूमिका प्रमाणित होती है, तो राज्य मंत्रिमंडल इन्हें गैर-कानूनी घोषित करने पर विचार करने के लिए बाध्य होगा।
UAPA प्रावधानों का होगा उपयोग
मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि जो सशस्त्र समूह आम नागरिकों के विरुद्ध हिंसा जारी रखेंगे, उनके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे समूहों से गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम के प्रावधानों के तहत सख्ती से निपटा जाएगा।
गौरतलब है कि UAPA एक कठोर कानून है जो किसी भी संगठन को 'गैर-कानूनी संघटन' या 'आतंकवादी संगठन' घोषित करने का अधिकार सरकार को देता है। यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में पिछले कुछ दिनों में हिंसा की छिटपुट घटनाएँ सामने आई हैं।
बैठक में शामिल वरिष्ठ अधिकारी
इस उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक में गृह मंत्री गोविंदस कोंथौजम, मुख्य सचिव राजीव सिंह ठाकुर, सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह, मणिपुर के डीजीपी मुकेश सिंह और जीओसी 3 कोर लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
इसके अतिरिक्त एडीजीपी (कानून-व्यवस्था), आयुक्त (गृह), आईजीएआर (दक्षिण), आईजीएआर (पूर्व), आईजी (सीआरपीएफ), डीआईजी (बीएसएफ, एसएसबी, आईटीबीपी), आईबी के संयुक्त निदेशक और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे। यह व्यापक भागीदारी बैठक की गंभीरता को रेखांकित करती है।
सरकार की मंशा और आगे की राह
सरकार का मानना है कि कुछ सशस्त्र समूह शांति प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों से समन्वय के साथ कार्य करने और आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
यह ध्यान देने योग्य है कि मणिपुर लंबे समय से जातीय तनाव और सशस्त्र समूहों की गतिविधियों से प्रभावित रहा है। राज्य सरकार का यह कदम संकेत देता है कि अब वह शांति वार्ता और कठोर कानूनी कार्रवाई को समानांतर रूप से आगे बढ़ाने की नीति पर चल रही है। आने वाले दिनों में सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट और उसके बाद की सरकारी प्रतिक्रिया राज्य की स्थिति की दिशा तय करेगी।