मणिपुर: कांगपोकपी में उग्रवादी हमले में स्कूल प्रिंसिपल समेत चार नागा नागरिकों की मौत
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के कांगपोकपी जिले में 27 अगस्त 2026 को सशस्त्र उग्रवादियों ने एक वाहन पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें राइट पाथ स्कूल के संस्थापक और प्रधानाचार्य ताडसोंगबू रिंगकांगमाई समेत कम से कम चार लियांगमाई नागा नागरिकों की मौके पर ही मौत हो गई और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया। यह हमला मकुई अशंग और थानम्बा नागा गांवों के बीच एक सुनसान इलाके में दिनदहाड़े हुआ, जो आईटी रोड के किनारे बसे नागा समुदायों की जीवन रेखा मानी जाती है।
हमले का घटनाक्रम
इंफाल के एक पुलिस अधिकारी ने पुष्टि की कि उग्रवादियों ने वाहन पर करीब से गोलीबारी की, जिससे चारों की मौके पर ही मृत्यु हो गई। चारों शवों को सेनापति जिला अस्पताल ले जाया गया, जबकि घायल व्यक्ति का वहीं उपचार किया गया। नागा संगठनों के अनुसार, दो से तीन सशस्त्र कुकी उग्रवादियों ने इस हमले को अंजाम दिया।
मारे गए लोगों की पहचान विसोबू चारेनमई, ताडसोंगबू रिंगकांगमाई, मारियाकदिबू विजुनामई और अनिल विजुनामई के रूप में हुई है। हमले में गैकामंग रिंगकांगमई घायल हुए, जबकि नागा छात्र नेता जापौ एमके चमत्कारिक रूप से बाल-बाल बच गए।
पीड़ितों में विसोबू चारेनमई चावांगकिनिंग ग्राम प्राधिकरण के अध्यक्ष और एक स्थानीय संगठन के पूर्व उपाध्यक्ष थे। ताडसोंगबू रिंगकांगमाई एक निजी शिक्षण संस्थान के प्रधानाचार्य थे।
बंद और तत्काल प्रतिक्रिया
दिनदहाड़े हुई इन हत्याओं के बाद नागा पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (एनपीओ) ने सेनापति जिला मुख्यालय में दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को बंद करा दिया। स्थानीय नागरिकों में व्यापक आक्रोश देखा गया।
यूएनसी का आरोप: सुरक्षा में पूर्ण चूक
मणिपुर में नागा लोगों की सर्वोच्च संस्था यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) ने इन हत्याओं की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि कांगपोकपी जिले में आईटी रोड पर हुई यह घटना सुरक्षा में पूर्ण विफलता की परिणाम है। यूएनसी ने आरोप लगाया कि सरकार ने सुरक्षा बलों की तैनाती में भेदभाव किया और सरकार के साथ निलंबित संचालन (एसओओ) समझौते के तहत कुकी उग्रवादियों को खुली छूट दी गई।
यूएनसी के बयान में कहा गया कि यह घटना शांति प्रक्रिया, नागा राजनीतिक वार्ता और नागाओं के अपने पैतृक भूभाग पर अस्तित्व के लिए एक सीधा खतरा है। संगठन ने नागा जनता को आगाह किया कि यह स्थिति जानबूझकर और गुप्त समर्थन से पैदा की जा रही है।
न्याय और सुरक्षा की माँग
यूएनसी और अन्य नागा संगठनों ने अधिकारियों से तत्काल दोषियों को गिरफ्तार करने और इस जघन्य अपराध की जाँच के लिए एक विशेष जाँच दल (एसआईटी) गठित करने की माँग की है। संगठनों ने यह भी माँग की कि आईटी रोड पर यात्रा करने वाले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाए जाएँ।
गौरतलब है कि मणिपुर मई 2023 से जातीय हिंसा की चपेट में है, और यह हमला उस दीर्घकालिक संघर्ष की पृष्ठभूमि में हुआ है। आने वाले दिनों में राज्य सरकार और केंद्र की प्रतिक्रिया तथा एसआईटी गठन पर निर्णय इस मामले की दिशा तय करेगा।