सेंसेक्स 166 अंक उछला, लगातार तीसरे सत्र में हरे निशान में बंद हुआ बाज़ार; निफ्टी 24,383 पर
सारांश
मुख्य बातें
बीएसई सेंसेक्स शुक्रवार, 31 जुलाई को 166.49 अंक यानी 0.21 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,094.64 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी50 66.45 अंक यानी 0.27 प्रतिशत उछलकर 24,383.60 पर बंद हुआ। यह लगातार तीसरा कारोबारी सत्र है जब घरेलू बाज़ार ने बढ़त दर्ज की — और जुलाई माह में लगातार दूसरे महीने तेज़ी का सिलसिला जारी रहा।
सेक्टरवार प्रदर्शन
सेक्टरों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। निफ्टी मीडिया 2 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे अधिक लाभ में रहा। इसके बाद निफ्टी ऑटो (1.64 प्रतिशत), निफ्टी ऑयल एंड गैस (1 प्रतिशत), निफ्टी फार्मा (0.72 प्रतिशत), निफ्टी पीएसयू बैंक (0.47 प्रतिशत), निफ्टी हेल्थकेयर (0.33 प्रतिशत) और निफ्टी रियल्टी (0.22 प्रतिशत) आगे रहे।
दूसरी ओर, निफ्टी आईटी में 1.56 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई — वैश्विक चिप शेयरों में उछाल के चलते पाँच दिन की लगातार तेज़ी का सिलसिला टूट गया। निफ्टी एफएमसीजी भी 1.05 प्रतिशत नीचे रहा।
प्रमुख शेयरों का हाल
निफ्टी50 में सबसे अधिक बढ़त बजाज फाइनेंस (8.3 प्रतिशत), बजाज फिनसर्व (6.3 प्रतिशत), जियो फाइनेंशियल (3.7 प्रतिशत) और एमएंडएम (3.3 प्रतिशत) में देखी गई। श्रीराम फाइनेंस, अदाणी पोर्ट्स, टाटा स्टील और एचडीएफसी लाइफ के शेयर भी 1 प्रतिशत से अधिक चढ़े।
इसके विपरीत, टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, इटरनल, मैक्स हेल्थकेयर और आईटीसी के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई।
बाज़ार पूंजीकरण में उछाल
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाज़ार पूंजीकरण पिछले सत्र के ₹483 लाख करोड़ से बढ़कर लगभग ₹486 लाख करोड़ हो गया। इस एक सत्र में निवेशकों को लगभग ₹3 लाख करोड़ का लाभ हुआ।
व्यापक बाज़ार में भी सकारात्मकता रही — निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप दोनों 0.44 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।
मासिक प्रदर्शन और जोखिम
जुलाई माह में सेंसेक्स और निफ्टी50 दोनों में 2 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे लगातार दूसरे महीने बढ़त का सिलसिला बना रहा। हालाँकि, साल की शुरुआत से अब तक निफ्टी में 7 प्रतिशत और सेंसेक्स में 8 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज है।
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, पहली तिमाही के उम्मीद से बेहतर नतीजों ने बाज़ार को सहारा दिया है। बावजूद इसके, अमेरिका-ईरान के बीच तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता के कारण बढ़त सीमित बनी रही। एक बाज़ार विशेषज्ञ के अनुसार, 'आर्थिक सुधार की स्थिरता काफ़ी हद तक मौजूदा वित्तीय नतीजों और वैश्विक जोखिमों में कमी पर निर्भर करेगी।'
आगे चलकर, घरेलू और वैश्विक मैक्रो संकेतों पर बाज़ार की नज़र बनी रहेगी।