मथुरा सपा कार्यालय में जिलाध्यक्ष को थप्पड़: दो नेता और 17 कार्यकर्ता पार्टी से निष्कासित
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) ने 13 सितंबर 2026 को मथुरा में हुई मारपीट की घटना पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए दो नेताओं — भारत भूषण शर्मा और राघवेन्द्र सिंह — सहित 17 पुराने कार्यकर्ताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। मथुरा सपा कार्यालय में आयोजित ब्राह्मण सम्मेलन की बैठक के दौरान हुई कहासुनी इतनी बढ़ गई कि पार्टी के जिलाध्यक्ष को कथित तौर पर थप्पड़ मार दिया गया।
मुख्य घटनाक्रम
घटना उस समय हुई जब मथुरा के सपा कार्यालय में सांसद सनातन पांडेय की अध्यक्षता में ब्राह्मण सम्मेलन की बैठक चल रही थी। बैठक के दौरान दो गुटों के बीच विवाद इतना उग्र हो गया कि मारपीट और गाली-गलौज तक नौबत आ गई। आरोप है कि इस दौरान सपा के जिलाध्यक्ष को थप्पड़ मारा गया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पार्टी हाईकमान ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल जाँच के निर्देश दिए।
निष्कासन आदेश का विवरण
सपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं पूर्व सांसद अरविन्द कुमार सिंह ने एक आधिकारिक कार्यालय ज्ञापन जारी किया। ज्ञापन के अनुसार, भारत भूषण शर्मा (निवासी 50 के. सराय आजमाबाद, पोस्ट कृष्णानगर, जनपद-मथुरा) तथा राघवेन्द्र सिंह (निवासी ग्राम असगरपुर, पोस्ट सतोहा, जनपद-मथुरा) को समाजवादी पार्टी से निष्कासित किया जाता है। इस ज्ञापन की प्रति राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव, जिलाध्यक्ष मथुरा और राष्ट्रीय अध्यक्ष के निजी सचिव को भी भेजी गई है।
निष्कासित नेताओं की पृष्ठभूमि
बताया जा रहा है कि राघवेन्द्र सिंह (जिन्हें राघवेंद्र तोमर के नाम से भी जाना जाता है) पार्टी के पुराने और सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं। वे 2019 से 2022 तक सपा छात्र सभा के जिलाध्यक्ष रहे और इसके बाद 2022 से 2024 तक यूथ ब्रिगेड के जिलाध्यक्ष का कार्यभार संभाला। इसी तरह भारत भूषण शर्मा भी पार्टी में लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभाते रहे थे।
निष्कासितों का पक्ष
हालाँकि, निष्कासित कार्यकर्ताओं ने पार्टी पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया है। राघवेंद्र तोमर का कहना है कि बैठक में दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई थी, लेकिन पार्टी ने बिना पूरी जाँच के केवल उन्हें निशाना बनाया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं दिया गया।
गुटबाजी की पृष्ठभूमि
पार्टी सूत्रों के अनुसार, मथुरा में ब्राह्मण सम्मेलन को लेकर लंबे समय से आंतरिक गुटबाजी चल रही थी। सम्मेलन की तैयारियों के संबंध में दो गुटों में विवाद था, जो अंततः बैठक में मारपीट का रूप ले गया। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी सरगर्मियों के बीच सपा अपनी संगठनात्मक एकजुटता प्रदर्शित करना चाहती है। सपा हाईकमान ने इस घटना को घोर अनुशासनहीनता करार देते हुए स्पष्ट किया है कि पार्टी में इस तरह के व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।