महबूबा मुफ्ती 5वीं बार पीडीपी अध्यक्ष निर्वाचित, बोलीं — 'दिल भारी भी है, भरा हुआ भी'
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को 5 नवंबर 2026 को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) का अध्यक्ष पाँचवीं बार सर्वसम्मति से पुनः निर्वाचित किया गया। श्रीनगर में हुई इस बैठक में पीडीपी के इलेक्टोरल कॉलेज ने एकमत से उनके नाम पर मुहर लगाई, जो 2003 से पार्टी की अगुवाई करती आ रही हैं।
निर्वाचन प्रक्रिया और समर्थन
पार्टी की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, महबूबा मुफ्ती के पुनर्निर्वाचन का प्रस्ताव पीडीपी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री अब्दुल रहमान वीरी ने रखा, जिसका समर्थन वरिष्ठ नेता मोहम्मद खुर्शीद आलम ने किया। बैठक में उपस्थित इलेक्टोरल कॉलेज के सभी सदस्यों ने उनकी उम्मीदवारी का समर्थन किया। पार्टी ने बताया कि जम्मू से आए इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्यों ने ऑनलाइन प्रक्रिया के ज़रिये भाग लेते हुए उनके पुनर्निर्वाचन का समर्थन किया।
बयान में कहा गया कि सर्वसम्मत वोटों से यह स्पष्ट होता है कि महबूबा ने पार्टी को उससे कहीं अधिक दिया है, जितना उन्हें पार्टी से मिला है।
महबूबा की भावुक प्रतिक्रिया
पाँचवीं बार अध्यक्ष चुने जाने के बाद महबूबा मुफ्ती ने भावुक लहजे में कहा, 'जो लोग आहत हैं, उन्हें जीत नहीं चाहिए। उन्हें मरहम चाहिए। मेरा दिल भारी भी है और भरा हुआ भी। मैं आभारी हूँ। आपने पाँचवीं बार मुझ पर भरोसा जताया है, और मैं इसे हल्के में नहीं लेती।'
उन्होंने आगे कहा, 'मैं उन लोगों का दर्द भी महसूस करती हूँ, जिन्होंने बहुत कुछ दिया है, पर जिनकी बात बहुत कम सुनी गई है।'
युवाओं की बेचैनी और सामाजिक दर्द
महबूबा ने युवाओं के बीच पसरी अनिश्चितता का उल्लेख करते हुए कहा कि वे उनके इस सवाल को सुन और महसूस कर सकती हैं — 'क्या आने वाला कल बीते हुए कल से अलग होगा?' उन्होंने कहा कि यही वह पार्टी है जिसे मिलकर बनाया गया ताकि अपने लोगों के दर्द का जवाब दिया जा सके और 'किसी को भी जवाब की तलाश में अपनी जान न गंवानी पड़े।'
प्रियजनों को खो चुके परिवारों के दुख का ज़िक्र करते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि वह ऐसी गलियों से गुज़री हैं जहाँ माताएँ आज भी उन बेटों के लिए दीये जलाती हैं जो कभी लौटे नहीं। उन्होंने ऐसे पिताओं से भी मुलाकात का जिक्र किया, जिन्होंने कई जनाजे उठाए लेकिन अपने सवालों के जवाब बहुत कम पाए।
पीडीपी की राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पीडीपी की स्थापना 1999 में मुफ्ती मोहम्मद सईद ने की थी, और महबूबा 2003 से इसका नेतृत्व संभाल रही हैं। पार्टी ने 2015-16 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ गठबंधन सरकार चलाई, जो बाद में टूट गई। 2024 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों में पार्टी को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के नेतृत्व में सरकार सत्ता में है और पीडीपी विपक्ष में एक नई भूमिका तलाश रही है।
आगे की राह
महबूबा मुफ्ती के पाँचवीं बार अध्यक्ष बनने के साथ पीडीपी के सामने चुनौती है कि वह जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता को पुनर्स्थापित करे। उनका जोर जनता के दर्द और सुलह की राजनीति पर दिखता है, जो आने वाले समय में पार्टी की रणनीति की दिशा तय करेगा।