4 अक्टूबर 2026
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महबूबा मुफ्ती का दावा: पीडीपी-भाजपा सरकार में 14,000 युवाओं के मामले वापस लिए, उमर सरकार पर सवाल

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महबूबा मुफ्ती का दावा: पीडीपी-भाजपा सरकार में 14,000 युवाओं के मामले वापस लिए, उमर सरकार पर सवाल

सारांश

महबूबा मुफ्ती ने श्रीनगर में दावा किया कि पीडीपी-भाजपा गठबंधन काल में जम्मू-कश्मीर के 14,000 युवाओं के मामले वापस लिए गए। उन्होंने उमर अब्दुल्ला सरकार पर सवाल उठाते हुए युवाओं के लिए भय-मुक्त माहौल और सामूहिक राजनीतिक इच्छाशक्ति की माँग की।

मुख्य बातें

महबूबा मुफ्ती ने 4 अक्टूबर 2026 को श्रीनगर में दावा किया कि पीडीपी-भाजपा सरकार में 14,000 युवाओं के मामले वापस लिए गए।
उन्होंने उमर अब्दुल्ला सरकार पर सवाल उठाया कि क्या वह भी युवाओं के पक्ष में ऐसे कदम उठा सकती है।
महबूबा ने जम्मू-कश्मीर में भय के माहौल और सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की रोक पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि उग्रवाद से जुड़े परिवारों के युवाओं को सरकारी नौकरी नहीं मिल पाती।
सभी राजनीतिक दलों से युवाओं की समस्याओं पर एकजुट होने की अपील की।

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने 4 अक्टूबर 2026 को श्रीनगर में एक कार्यक्रम के दौरान दावा किया कि पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार के कार्यकाल में जम्मू-कश्मीर के लगभग 14,000 युवाओं के खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए गए थे। उन्होंने इस दावे के साथ ही मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि क्या वह भी युवाओं के हित में इसी तरह के कदम उठाने में सक्षम है।

महबूबा का मुख्य दावा

महबूबा ने कहा कि पीडीपी-भाजपा गठबंधन ने न केवल संघर्ष विराम कराने में भूमिका निभाई, बल्कि उस दौर में बड़े पैमाने पर युवाओं के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के दृष्टिकोण को समझने में असमर्थ है। यह बयान उस पृष्ठभूमि में आया है जब जम्मू-कश्मीर में विधानसभा गठन के बाद से ही विभिन्न दलों के बीच नीतिगत प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है।

युवाओं के अधिकारों पर चिंता

महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर में भय के माहौल पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं को सोशल मीडिया पर खुलकर अपनी राय रखने की स्वतंत्रता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी युवा के पिता या दादा का अतीत उग्रवाद से जुड़ा रहा हो, तो उसे सरकारी नौकरी पाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

रोज़गार और अवसर पर सवाल

पीडीपी प्रमुख ने एक तुलनात्मक सवाल उठाते हुए कहा कि यदि दूसरे राज्यों के लोग चीन की यात्रा कर सकते हैं, तो लद्दाख के रास्ते जम्मू-कश्मीर के युवाओं को भी नई संभावनाओं से परिचित क्यों नहीं कराया जा सकता। यह बयान कथित तौर पर प्रतीकात्मक था, जिसमें युवाओं को वैश्विक अवसरों से जोड़ने की वकालत की गई। महबूबा ने सरकार से आग्रह किया कि जम्मू-कश्मीर के प्रति अपनी नीति पर पुनर्विचार करे और युवाओं को निर्भय होकर अपना भविष्य बनाने का मौका दे।

सामूहिक राजनीतिक दृष्टिकोण की माँग

महबूबा ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर युवाओं की समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट हों। उनका कहना था कि मानसिक तनाव और अनिश्चितता से जूझ रही युवा पीढ़ी को एक ठोस और सकारात्मक राजनीतिक संकल्प की दरकार है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग और युवा बेरोज़गारी पर बहस तेज़ हो रही है।

आगे क्या

महबूबा के इस बयान के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक नई बहस छिड़ने की संभावना है — विशेष रूप से युवा-केंद्रित नीतियों और सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर। उमर अब्दुल्ला सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा सत्र या सार्वजनिक मंचों पर और गहराई से उठ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 मामले वापस लेने का यह दावा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है, और इसे बिना आधिकारिक आँकड़ों के स्वीकार करना पत्रकारीय दृष्टि से उचित नहीं होगा। इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि महबूबा जिस 'युवा-केंद्रित' विरासत का दावा कर रही हैं, वह उस दौर की भी है जब कश्मीर में अशांति चरम पर थी। नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार को चुनौती देने का यह प्रयास असल में पीडीपी की गिरती राजनीतिक प्रासंगिकता को बचाने की कोशिश भी दिखती है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महबूबा मुफ्ती ने 14,000 मामलों के बारे में क्या दावा किया?
महबूबा मुफ्ती ने दावा किया कि पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार के कार्यकाल में जम्मू-कश्मीर के लगभग 14,000 युवाओं के खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए गए थे। यह दावा उन्होंने 4 अक्टूबर 2026 को श्रीनगर में एक कार्यक्रम में किया।
महबूबा मुफ्ती ने उमर अब्दुल्ला सरकार की आलोचना क्यों की?
महबूबा ने सवाल उठाया कि क्या उमर अब्दुल्ला की नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार युवाओं के हित में उसी तरह के ठोस कदम उठा सकती है जैसे पीडीपी-भाजपा गठबंधन ने उठाए थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के दृष्टिकोण को नहीं समझ सकती।
महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए क्या माँग रखी?
उन्होंने सरकार से युवाओं को सोशल मीडिया पर निर्भय होकर अपनी राय रखने की आज़ादी देने और भय-मुक्त माहौल बनाने की माँग की। साथ ही उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से युवाओं की समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट होने की अपील की।
क्या महबूबा के 14,000 मामलों के दावे की पुष्टि हुई है?
यह दावा महबूबा मुफ्ती का अपना बयान है और अभी तक स्वतंत्र सरकारी या न्यायिक आँकड़ों से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उमर अब्दुल्ला सरकार की ओर से भी इस पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
महबूबा मुफ्ती ने सरकारी नौकरी को लेकर क्या कहा?
महबूबा ने कहा कि यदि किसी युवा के पिता या दादा का संबंध अतीत में उग्रवाद से रहा हो, तो उसे जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरी पाने में बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने इसे युवाओं के साथ अन्याय बताया और सरकार से इस नीति पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।
राष्ट्र प्रेस
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