पेपर लीक रोकने को सुरक्षा व्यवस्था होगी और मजबूत: मिलिंद देवरा का युवाओं को भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना नेता और राज्यसभा सदस्य मिलिंद देवरा ने 24 जुलाई को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि भारत के युवा देश के भविष्य को आकार देने के साझेदार हैं और उनकी आकांक्षाओं के केंद्र में शिक्षा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं को जड़ से समाप्त करने के लिए सरकार सुरक्षा ढाँचे को और सुदृढ़ करेगी।
मिलिंद देवरा का युवाओं को संदेश
देवरा ने कहा कि देश का लक्ष्य एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था खड़ी करना होना चाहिए जो दुनिया की सबसे भरोसेमंद, पारदर्शी और मज़बूत प्रणाली बने। उनके अनुसार, प्रत्येक छात्र को अपनी मेहनत के बल पर सफलता पाने का निष्पक्ष अवसर मिलना चाहिए और परीक्षा तंत्र पूरी तरह विश्वसनीय होना चाहिए।
शिवसेना की ओर से उन्होंने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पेपर लीक की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा करेगी।
सोनम वांगचुक के अनशन समाप्ति का स्वागत
देवरा ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कदम से सरकार और युवाओं के बीच सकारात्मक व रचनात्मक संवाद की नींव पड़ेगी।
PM मोदी की प्रतिबद्धता और नए कानून का मसौदा
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात एक वीडियो संदेश जारी कर देशवासियों को आश्वस्त किया कि सरकार पेपर लीक के मामलों पर सख्त कार्रवाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इस संदर्भ में तैयार नए कानून का मसौदा शुक्रवार को होने वाली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा।
प्रस्तावित कानून में फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से मामलों की त्वरित सुनवाई और दोषियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। मोदी ने स्पष्ट किया कि कैबिनेट सहयोगियों के सुझावों के बाद मसौदे को अंतिम रूप दिया जाएगा।
संसद में विधेयक पारित कराने की तैयारी
सोमवार से शुरू हो रहे संसद के दूसरे सप्ताह में इस विधेयक को जल्द से जल्द पारित कराने का प्रयास किया जाएगा। यह कदम ऐसे समय में आया है जब NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्रों का आक्रोश चरम पर है। गौरतलब है कि पेपर लीक की घटनाएँ पिछले कई वर्षों में एक बार-बार उभरने वाली समस्या बन चुकी हैं, जो लाखों परीक्षार्थियों के भविष्य को प्रभावित करती हैं।
यदि यह विधेयक संसद से पारित होता है, तो यह परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बहाल करने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।