PM मोदी के सेशेल्स दौरे से प्रवासी भारतीयों में उत्साह, सांस्कृतिक कार्यक्रमों से होगा भव्य स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 जून 2026 को दो दिवसीय यात्रा पर सेशेल्स पहुँचे, जहाँ वहाँ बसे प्रवासी भारतीय समुदाय में इस दौरे को लेकर असाधारण उत्साह देखा जा रहा है। भारत-सेशेल्स के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाई देने की उम्मीद के साथ, प्रवासी भारतीयों ने प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी की है।
प्रवासी भारतीयों की भावनाएँ
बीते 15 वर्षों से सेशेल्स में कार्यरत प्रवासी भारतीय भरत ईरानी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दौरे को लेकर जो उत्साह है, उसे शब्दों में बयाँ करना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि स्वागत के लिए समुदाय की ओर से विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी की गई है।
2019 से सेशेल्स में रह रहे एक अन्य प्रवासी भारतीय ने कहा, 'पहली बार मुझे प्रधानमंत्री का स्वागत करने का अवसर मिला है। हम इसे लेकर बेहद उत्साहित हैं। दोनों देशों के रिश्ते पहले से ही मज़बूत हैं और इस दौरे से वे और प्रगाढ़ होंगे।'
भारत-सेशेल्स संबंधों की पृष्ठभूमि
2016 से सेशेल्स में निवासरत एक अन्य भारतीय मूल के नागरिक ने बताया कि सेशेल्स भारतीयों का पूरा सम्मान करता है और भारतीय संस्कृति को अपनाने में भी रुचि दिखाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सेशेल्स के राष्ट्रपति इससे पहले भारत का दौरा कर चुके हैं, जो दोनों देशों के बीच आपसी सम्मान का प्रतीक है।
यह ऐसे समय में आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की कूटनीतिक सक्रियता लगातार बढ़ रही है। सेशेल्स, जो रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण द्वीपीय राष्ट्र है, भारत के 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'SAGAR' (Security and Growth for All in the Region) नीति का अहम हिस्सा रहा है।
सीधी उड़ान की माँग
प्रवासी भारतीय समुदाय ने इस अवसर पर भारत और सेशेल्स के बीच सीधी विमान सेवा शुरू करने की अपील भी की है। उनका मानना है कि डायरेक्ट फ्लाइट से दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
आगे की उम्मीदें
प्रवासी भारतीय समुदाय को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नया आयाम मिलेगा। गौरतलब है कि यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत अपने समुद्री पड़ोसियों के साथ संबंध मज़बूत करने पर विशेष ज़ोर दे रहा है। प्रवासी भारतीयों का यह उत्साह इस बात का संकेत है कि कूटनीतिक संबंध केवल सरकारी स्तर पर नहीं, बल्कि जन-स्तर पर भी गहरे होते जा रहे हैं।