स्यूटा संकट: मोरक्को की दंगा-रोधी पुलिस ने सैकड़ों प्रवासियों को सीमा से 3 किमी पहले रोका
सारांश
मुख्य बातें
स्पेन के स्वायत्त शहर स्यूटा की सीमा पर शनिवार को एक बार फिर तनाव चरम पर पहुँच गया, जब मोरक्को की दंगा-रोधी पुलिस ने सैकड़ों उप-सहारा अफ्रीकी प्रवासियों को एल ताराजाल सीमा पार करने से पहले ही रोक दिया। यह घटना ऐसे समय में हुई जब 30-31 जुलाई की भारी आमद के करीब दो सप्ताह बाद भी शहर पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है।
मुख्य घटनाक्रम
स्पेनिश समाचार पत्र एल पाइस ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया कि शनिवार सुबह करीब 6 बजे प्रवासियों ने सीमा की ओर बढ़ना शुरू किया। इसके तुरंत बाद मोरक्को ने अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए और भीड़ को पीछे धकेलते हुए एक निर्धारित क्षेत्र में घेर लिया।
प्रवासियों को सीमा से करीब तीन किलोमीटर पहले, कास्तिलेहोस के बाहरी इलाके में रोक दिया गया। सीमा से जुड़े सभी प्रमुख रास्तों पर सुरक्षा घेरा बनाया गया और पिछले दिनों की तुलना में काफी अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए।
30-31 जुलाई की स्थिति से तुलना
गौरतलब है कि 30 और 31 जुलाई को करीब 80,000 लोगों के स्यूटा में प्रवेश करने की खबर सामने आई थी — जो यूरोपीय इतिहास की सबसे बड़ी एकल-दिवसीय सीमा-उल्लंघन की घटनाओं में से एक मानी जा रही है। इस बार, हालाँकि, मोरक्को के स्थानीय प्रवासियों के बड़े समूह नज़र नहीं आए, जो उन दो दिनों की भीड़ का एक प्रमुख हिस्सा थे।
सोशल मीडिया की भूमिका
अधिकारियों के अनुसार, शनिवार को सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में प्रवासियों को स्यूटा पहुँचने के लिए प्रेरित करने वाले संदेश और अपीलें प्रसारित हुईं। इसके बाद स्पेन और मोरक्को दोनों ने सीमा पर सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी।
मेलिला और स्यूटा की मौजूदा स्थिति
स्पेन के दूसरे उत्तरी अफ्रीकी क्षेत्र मेलिला की सीमा पर फिलहाल स्थिति शांत है और पिछले कुछ घंटों में किसी बड़ी घटना की सूचना नहीं मिली है। हालाँकि, वहाँ भी सामान्य दिनों की तुलना में अधिक सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है।
स्यूटा में अभी करीब 5,000 बिना दस्तावेज़ वाले प्रवासी मौजूद हैं, जिन्हें समायोजित करना स्थानीय प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। शहर जुलाई के अंत की भारी आमद से उबरने की कोशिश कर रहा है और सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था लगातार कड़ी की जा रही है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब यूरोपीय संघ और स्पेन के बीच प्रवासन नीति को लेकर बातचीत जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया के ज़रिये समन्वित प्रवासन प्रयास एक नई चुनौती पेश कर रहे हैं, जिससे निपटने के लिए द्विपक्षीय सीमा प्रबंधन समझौतों को और मज़बूत करने की ज़रूरत होगी।