मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना: यमुनानगर में 1,10,158 मिट्टी नमूनों की जांच, किसानों की खेती लागत घटाने पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के यमुनानगर जिले में केंद्र सरकार की मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना किसानों को उनके खेत की मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की सटीक जानकारी देकर संतुलित उर्वरक उपयोग की दिशा में मार्गदर्शन कर रही है। इस योजना के तहत किसानों को फसल की आवश्यकता के अनुरूप खाद एवं उर्वरकों की सही मात्रा बताई जा रही है, जिससे खेती की लागत में कमी और उत्पादकता में वृद्धि दोनों संभव हो रही हैं। पिछले वर्ष अकेले यमुनानगर में 1,10,158 मिट्टी के नमूनों की प्रयोगशाला में जांच की गई और किसानों को उनके मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराए गए।
मिट्टी जांच की प्रक्रिया और 12 पैरामीटर
यमुनानगर के सॉयल टेस्टिंग जगाधरी केंद्र में तैनात एनालिटिकल एसोसिएट योगेश के अनुसार, यहाँ मिट्टी के कुल 12 पैरामीटर की जांच की जाती है। इनमें पीएच, ईसी (विद्युत चालकता), ऑर्गेनिक कार्बन, नाइट्रोजन, बोरॉन, सल्फर, फॉस्फोरस, जिंक, मैंगनीज, आयरन और कॉपर शामिल हैं।
योगेश ने बताया कि पीएच से मिट्टी के अम्लीय या क्षारीय होने का पता चलता है, जबकि ईसी मिट्टी में नमक की मात्रा को दर्शाता है। नाइट्रोजन, सल्फर, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे तत्व मैक्रोन्यूट्रिएंट्स की श्रेणी में आते हैं, जबकि जिंक, मैंगनीज, आयरन, कॉपर और बोरॉन माइक्रोन्यूट्रिएंट्स हैं।
अनावश्यक उर्वरक से बचाव और आर्थिक लाभ
योगेश ने स्पष्ट किया कि कई बार मिट्टी में कुछ पोषक तत्व पहले से पर्याप्त मात्रा में मौजूद होते हैं, ऐसे में किसानों को उन्हें दोबारा डालने की कोई आवश्यकता नहीं होती। बिना जांच के किसान अनावश्यक रूप से उर्वरकों का उपयोग करते हैं, जिससे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मिट्टी की सेहत भी प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि पौधों में फलों के फटने जैसी समस्या बोरॉन की कमी का संकेत हो सकती है, जबकि पत्तियों का पीला या लाल होना जिंक की कमी से जुड़ा हो सकता है। मिट्टी जांच के बाद किसानों को प्रति एकड़ आवश्यक उर्वरक की सटीक मात्रा की सलाह दी जाती है, जो मृदा स्वास्थ्य कार्ड में अंकित होती है।
जिला कृषि विभाग का लक्ष्य और जागरूकता अभियान
यमुनानगर के जिला कृषि अधिकारी आदित्य डबास ने बताया कि हर वर्ष विभाग को जिले में मिट्टी जांच का एक निर्धारित लक्ष्य दिया जाता है। किसान स्वयं नमूने लेकर आते हैं, वहीं विभाग के ग्राम स्तरीय कर्मचारी और अधिकारी भी खेतों से नमूने एकत्र करते हैं।
डबास ने कहा कि किसान परंपरागत रूप से डीएपी, यूरिया और जिंक का उपयोग करते हैं, लेकिन मिट्टी में अन्य पोषक तत्वों की वास्तविक स्थिति का पता केवल जांच के बाद ही चल सकता है। यमुनानगर में मुख्य रूप से गेहूं, धान, गन्ना, सरसों और कुछ क्षेत्रों में पॉपलर की खेती होती है। लगातार एक ही फसल लेने और फसल चक्र के कारण मिट्टी में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।
ब्लॉक स्तर पर जागरूकता शिविर
कृषि और मृदा परीक्षण विभाग की ओर से हर वर्ष जागरूकता शिविर आयोजित किए जाते हैं। विभाग की टीमें ब्लॉक स्तर पर गांवों में जाकर मिट्टी जांच, खेती की लागत घटाने और मिट्टी की दीर्घकालिक सेहत बनाए रखने के बारे में किसानों को जागरूक करती हैं। यह पहल ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाती है जब देश में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता पर दीर्घकालिक दुष्प्रभाव की चिंता लगातार बढ़ रही है।
आने वाले वर्षों में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की पहुँच और अधिक किसानों तक बढ़ाने की दिशा में विभाग प्रयासरत है, ताकि टिकाऊ कृषि और लागत-प्रभावी खेती का लक्ष्य हासिल किया जा सके।