मणिशंकर अय्यर का बड़ा बयान: 'मुख्य चुनाव आयुक्त का व्यवहार शर्मनाक', नियुक्ति प्रक्रिया पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने 4 अक्टूबर 2026 को श्रीनगर के रेडिसन होटल में आयोजित 'हल्ला बोल' कार्यक्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त के व्यवहार को 'शर्मनाक' करार दिया और चुनाव आयोग में आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शिता से रहित बताया। अय्यर के ये तीखे बयान ऐसे समय में आए हैं जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव प्रक्रिया में विसंगति का हवाला देते हुए मौजूदा सरकार को 'अवैध' कहा था।
खड़गे के 'अवैध सरकार' बयान से असहमति
अय्यर ने स्पष्ट किया कि वे कांग्रेस अध्यक्ष के 'अवैध सरकार' वाले बयान से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'मैं उनसे सहमत नहीं हूं। मेरा मानना है कि चुनाव आयोग हाल तक पूरी तरह से स्वायत्त रूप से कार्य कर रहा था।' उन्होंने यह भी कहा कि किसी संवैधानिक निकाय को अलग से 'स्वायत्त' घोषित करने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि संविधान में निहित होने से उसकी स्वायत्तता स्वतः सुनिश्चित हो जाती है।
नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
अय्यर ने आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज की। उनके अनुसार, 'इन आयुक्तों और न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया बिल्कुल भी पारदर्शी नहीं है।' उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के व्यवहार को 'शर्मनाक' और दोनों चुनाव आयुक्तों के रवैये को भी 'उचित नहीं' बताया। गौरतलब है कि यह विवाद उस पृष्ठभूमि में सामने आया है जब चुनाव आयोग द्वारा जारी नोटिसों को लेकर विपक्षी दलों में असंतोष व्याप्त है।
पाकिस्तान और चीन नीति पर तीखी टिप्पणी
विदेश नीति के मुद्दे पर भी अय्यर ने मौजूदा सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा, 'हम दुनिया को बताते हैं कि यह युद्ध का युग नहीं है, और फिर हम पाकिस्तान के साथ युद्ध छेड़ देते हैं। एकमात्र देश जिसके साथ हमारी कूटनीति और संवाद नहीं है, वह पाकिस्तान है।' उन्होंने क्वाड में भारत की भागीदारी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे चीन नाराज हुआ है और अब 'अमेरिका भी कह रहा है कि क्वाड का कोई महत्व नहीं है।' अय्यर ने इसे 'लेन-देन की कूटनीति' करार दिया, न कि नैतिक कूटनीति।
राजनीतिक संदर्भ और असर
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है। 'हल्ला बोल' कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी और अय्यर के बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश में है। हालांकि, अय्यर का खड़गे के 'अवैध सरकार' बयान से खुलकर असहमत होना पार्टी के भीतर एक अलग स्वर का संकेत देता है।
आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया आती है या नहीं, यह देखना अहम होगा।