4 अक्टूबर 2026
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मणिशंकर अय्यर का बड़ा बयान: 'मुख्य चुनाव आयुक्त का व्यवहार शर्मनाक', नियुक्ति प्रक्रिया पर उठाए सवाल

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मणिशंकर अय्यर का बड़ा बयान: 'मुख्य चुनाव आयुक्त का व्यवहार शर्मनाक', नियुक्ति प्रक्रिया पर उठाए सवाल

सारांश

श्रीनगर के 'हल्ला बोल' कार्यक्रम में मणिशंकर अय्यर ने मुख्य चुनाव आयुक्त के व्यवहार को 'शर्मनाक' बताया और नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए — लेकिन साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के 'अवैध सरकार' बयान से खुद को अलग भी किया। यह पार्टी के भीतर एक अलग सुर है।

मुख्य बातें

पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने 4 अक्टूबर 2026 को श्रीनगर के 'हल्ला बोल' कार्यक्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त के व्यवहार को 'शर्मनाक' बताया।
अय्यर ने आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को 'बिल्कुल भी पारदर्शी नहीं' करार दिया।
उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के 'अवैध सरकार' बयान से असहमति जताई।
विदेश नीति पर अय्यर ने पाकिस्तान और चीन के साथ संवाद की कमी को 'नैतिक नहीं, लेन-देन की कूटनीति' बताया।
अय्यर ने क्वाड में भारत की भागीदारी पर भी सवाल उठाए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने 4 अक्टूबर 2026 को श्रीनगर के रेडिसन होटल में आयोजित 'हल्ला बोल' कार्यक्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त के व्यवहार को 'शर्मनाक' करार दिया और चुनाव आयोग में आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शिता से रहित बताया। अय्यर के ये तीखे बयान ऐसे समय में आए हैं जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव प्रक्रिया में विसंगति का हवाला देते हुए मौजूदा सरकार को 'अवैध' कहा था।

खड़गे के 'अवैध सरकार' बयान से असहमति

अय्यर ने स्पष्ट किया कि वे कांग्रेस अध्यक्ष के 'अवैध सरकार' वाले बयान से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'मैं उनसे सहमत नहीं हूं। मेरा मानना है कि चुनाव आयोग हाल तक पूरी तरह से स्वायत्त रूप से कार्य कर रहा था।' उन्होंने यह भी कहा कि किसी संवैधानिक निकाय को अलग से 'स्वायत्त' घोषित करने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि संविधान में निहित होने से उसकी स्वायत्तता स्वतः सुनिश्चित हो जाती है।

नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल

अय्यर ने आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज की। उनके अनुसार, 'इन आयुक्तों और न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया बिल्कुल भी पारदर्शी नहीं है।' उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के व्यवहार को 'शर्मनाक' और दोनों चुनाव आयुक्तों के रवैये को भी 'उचित नहीं' बताया। गौरतलब है कि यह विवाद उस पृष्ठभूमि में सामने आया है जब चुनाव आयोग द्वारा जारी नोटिसों को लेकर विपक्षी दलों में असंतोष व्याप्त है।

पाकिस्तान और चीन नीति पर तीखी टिप्पणी

विदेश नीति के मुद्दे पर भी अय्यर ने मौजूदा सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा, 'हम दुनिया को बताते हैं कि यह युद्ध का युग नहीं है, और फिर हम पाकिस्तान के साथ युद्ध छेड़ देते हैं। एकमात्र देश जिसके साथ हमारी कूटनीति और संवाद नहीं है, वह पाकिस्तान है।' उन्होंने क्वाड में भारत की भागीदारी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे चीन नाराज हुआ है और अब 'अमेरिका भी कह रहा है कि क्वाड का कोई महत्व नहीं है।' अय्यर ने इसे 'लेन-देन की कूटनीति' करार दिया, न कि नैतिक कूटनीति।

राजनीतिक संदर्भ और असर

यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है। 'हल्ला बोल' कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी और अय्यर के बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश में है। हालांकि, अय्यर का खड़गे के 'अवैध सरकार' बयान से खुलकर असहमत होना पार्टी के भीतर एक अलग स्वर का संकेत देता है।

आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया आती है या नहीं, यह देखना अहम होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिशंकर अय्यर ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर क्या कहा?
अय्यर ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त का व्यवहार 'शर्मनाक' है और दोनों चुनाव आयुक्तों का रवैया भी उचित नहीं है। उन्होंने आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को 'बिल्कुल भी पारदर्शी नहीं' बताया।
क्या अय्यर ने खड़गे के 'अवैध सरकार' बयान का समर्थन किया?
नहीं, अय्यर ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के 'अवैध सरकार' वाले बयान से सहमत नहीं हैं। उनके अनुसार चुनाव आयोग एक संवैधानिक निकाय है और उसकी स्वायत्तता संविधान में ही अंतर्निहित है।
अय्यर ने पाकिस्तान और चीन नीति पर क्या कहा?
अय्यर ने कहा कि भारत एक ओर 'युद्ध का युग नहीं' कहता है और दूसरी ओर पाकिस्तान के साथ संवाद बंद है। उन्होंने क्वाड में शामिल होने को चीन को नाराज करने वाला कदम बताया और इसे 'लेन-देन की कूटनीति' कहा।
यह 'हल्ला बोल' कार्यक्रम क्या था और कहाँ आयोजित हुआ?
यह कांग्रेस का एक राजनीतिक कार्यक्रम था जो 4 अक्टूबर 2026 को श्रीनगर के रेडिसन होटल में आयोजित किया गया। इसमें वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने भाग लिया और चुनाव आयोग तथा सरकार की नीतियों पर अपने विचार रखे।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर विवाद क्यों है?
अय्यर समेत कई विपक्षी नेताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग में आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। यह विवाद तब और गहरा हो गया जब विपक्षी दलों को भेजे गए नोटिसों पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
राष्ट्र प्रेस
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