21 अक्टूबर 2026
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नागालैंड को पीएम-डिवाइन और एमडोनर परियोजनाओं में तेजी लाने के केंद्र के निर्देश, अक्टूबर अंत तक प्रस्ताव की समयसीमा

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नागालैंड को पीएम-डिवाइन और एमडोनर परियोजनाओं में तेजी लाने के केंद्र के निर्देश, अक्टूबर अंत तक प्रस्ताव की समयसीमा

सारांश

केंद्र ने नागालैंड को पीएम-डिवाइन और एमडोनर परियोजनाओं में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। राज्य ने पलटवार करते हुए कहा कि 1998-2025 के बीच मिले ₹5,339.50 करोड़ जरूरतों के अनुपात में बेहद कम हैं और वह पूर्वोत्तर में सबसे कम फंडिंग पाने वाले राज्यों में तीसरे स्थान पर है।

मुख्य बातें

डोनर मंत्रालय के संयुक्त सचिव विपुल अग्रवाल ने 21 अक्टूबर 2026 को कोहिमा में नागालैंड अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।
नागालैंड को अक्टूबर के अंत तक 16वें वित्त आयोग के लिए परियोजना प्रस्ताव जमा करने का निर्देश।
14वें और 15वें वित्त आयोग की बची देनदारियाँ 17वें वित्त आयोग में नहीं ले जाई जाएंगी।
1998 से 2025 के बीच नागालैंड को एमडोनर से कुल ₹5,339.50 करोड़ मिले — पूर्वोत्तर में तीसरा सबसे कम।
राज्य युवाओं के लिए कॉफी, चाय, रबर, अगरवुड की खेती और इको-टूरिज्म जैसे वैकल्पिक आजीविका विकल्पों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

केंद्र सरकार ने नागालैंड सरकार को 21 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट निर्देश दिए कि वह 'प्रधानमंत्री विकास पहल — पूर्वोत्तर क्षेत्र' (पीएम-डिवाइन) और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (एमडोनर) की योजनाओं के क्रियान्वयन को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाए। कोहिमा में आयोजित समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए गए, जिसमें राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ केंद्र के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

बैठक में क्या हुआ

डोनर मंत्रालय के संयुक्त सचिव विपुल अग्रवाल ने नागालैंड सरकार के अधिकारियों के साथ पीएम-डिवाइन और एमडोनर के तहत चल रही परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने राज्य से आग्रह किया कि 16वें वित्त आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए परियोजनाओं की प्राथमिकता सूची अक्टूबर के अंत तक जमा की जाए।

अग्रवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि विभागों को अंतिम आवंटन आंकड़ों का इंतजार किए बिना अपनी प्राथमिकता सूची तैयार कर जमा करनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 14वें और 15वें वित्त आयोग के तहत बची हुई देनदारियों को 17वें वित्त आयोग में नहीं ले जाया जाएगा — यह एक महत्वपूर्ण संकेत है कि लंबित कार्यों को समय रहते निपटाना होगा।

केंद्र की अपेक्षाएँ और रोडमैप

संयुक्त सचिव ने परियोजनाओं को पूरा करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुरानी परियोजनाओं और उन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाए जिन्हें अगले वित्तीय वर्ष तक पूरा किया जा सके। काम की गति बढ़ाने, समय-सीमा कम करने और सवालों का समय पर जवाब देने की भी ताकीद की गई।

अग्रवाल ने सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए लक्षित कदम उठाने का सुझाव देते हुए वस्तुनिष्ठ और जरूरत-आधारित प्रस्ताव तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अन्य पूर्वोत्तर राज्यों की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि नागालैंड को सामाजिक-आर्थिक विकास में और अधिक प्रयास करने होंगे।

नागालैंड का पक्ष: फंडिंग की असमानता का मुद्दा

बैठक में नागालैंड के प्रधान सचिव एवं विकास आयुक्त वाई. किखेतो सेमा ने 1998 में एमडोनर की स्थापना के बाद से मिली वित्तीय सहायता के लिए केंद्र का आभार जताया। हालाँकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य को मिली फंडिंग उसकी विकासात्मक जरूरतों के अनुपात में नहीं रही।

सेमा ने बताया कि 1998 से 2025 के बीच नागालैंड को एमडोनर से कुल ₹5,339.50 करोड़ प्राप्त हुए, जो पूर्वोत्तर के कई अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है। उन्होंने जोड़ा कि असम के बाद पूर्वोत्तर का दूसरा सबसे पुराना राज्य होने के बावजूद, नागालैंड एमडोनर से सबसे कम फंडिंग पाने वाले राज्यों में तीसरे स्थान पर है। उन्होंने राज्य की जरूरतों के अनुरूप अधिक वित्तीय सहायता की माँग की।

विकास की नई दिशाएँ

सेमा ने कहा कि नागालैंड शांति, प्रगति और विकास के एक नए दौर की ओर अग्रसर है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा, सड़क संपर्क, शिक्षा और बुनियादी ढाँचे को प्राथमिकता देने पर बल दिया।

गौरतलब है कि सरकारी नौकरियों के अवसर अब लगभग संतृप्ति के स्तर पर पहुँच गए हैं, इसलिए राज्य सरकार युवाओं के लिए वैकल्पिक आजीविका के रास्ते तलाश रही है। इस संदर्भ में प्रधान सचिव ने कॉफी, चाय, रबर और अगरवुड जैसी व्यावसायिक फसलों की खेती और इको-टूरिज्म की संभावनाओं को उद्यमिता एवं टिकाऊ आर्थिक विकास के माध्यम के रूप में रेखांकित किया।

यह समीक्षा बैठक ऐसे समय में आई है जब पूर्वोत्तर भारत में केंद्र सरकार की विकास योजनाओं के क्रियान्वयन की गति को लेकर सवाल उठते रहे हैं। आने वाले हफ्तों में नागालैंड द्वारा जमा किए जाने वाले प्रस्ताव यह तय करेंगे कि राज्य 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों से कितना लाभ उठा पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

339.50 करोड़ की फंडिंग और 'और प्रयास करने' के निर्देश — यह तस्वीर असंतुलित लगती है। पूर्वोत्तर के दूसरे सबसे पुराने राज्य को सबसे कम फंड मिलने का तथ्य केंद्र की 'एक्ट ईस्ट' नीति की जमीनी वास्तविकता पर सवाल उठाता है। 'अक्टूबर अंत की समयसीमा' और '17वें आयोग में देनदारी नहीं' जैसी शर्तें दबाव की तरह लगती हैं, जबकि फंडिंग असमानता को संबोधित किए बिना क्रियान्वयन में तेजी की माँग एकतरफा है। असली परीक्षा यह है कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें नागालैंड की ऐतिहासिक वंचना को सुधारती हैं या नहीं।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम-डिवाइन योजना क्या है और नागालैंड को इससे क्या मिलेगा?
पीएम-डिवाइन यानी 'प्रधानमंत्री विकास पहल — पूर्वोत्तर क्षेत्र' केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है जो पूर्वोत्तर राज्यों में बुनियादी ढाँचे और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए वित्त पोषण करती है। नागालैंड को इस योजना के तहत स्वास्थ्य, सड़क, शिक्षा और आजीविका परियोजनाओं के लिए केंद्रीय सहायता मिलती है।
नागालैंड को अब तक एमडोनर से कितना फंड मिला है?
1998 से 2025 के बीच नागालैंड को एमडोनर से कुल ₹5,339.50 करोड़ प्राप्त हुए हैं। राज्य के प्रधान सचिव वाई. किखेतो सेमा के अनुसार, यह राशि पूर्वोत्तर के कई अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है और नागालैंड इस क्षेत्र में सबसे कम फंडिंग पाने वाले राज्यों में तीसरे स्थान पर है।
16वें वित्त आयोग के लिए प्रस्ताव जमा करने की समयसीमा क्या है?
डोनर मंत्रालय के संयुक्त सचिव विपुल अग्रवाल ने नागालैंड को अक्टूबर 2026 के अंत तक अपने परियोजना प्रस्ताव जमा करने का निर्देश दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि विभागों को अंतिम आवंटन आंकड़ों का इंतजार किए बिना प्राथमिकता सूची तैयार करनी चाहिए।
14वें और 15वें वित्त आयोग की बची देनदारियों का क्या होगा?
केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि 14वें और 15वें वित्त आयोग के तहत बची हुई देनदारियों को 17वें वित्त आयोग में नहीं ले जाया जाएगा। इसका अर्थ है कि नागालैंड को इन लंबित कार्यों को मौजूदा चक्र में ही पूरा करना होगा।
नागालैंड सरकार युवाओं के लिए रोजगार के कौन से नए रास्ते तलाश रही है?
राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों की संतृप्ति को देखते हुए कॉफी, चाय, रबर और अगरवुड जैसी व्यावसायिक फसलों की खेती और इको-टूरिज्म को युवाओं के लिए वैकल्पिक आजीविका के माध्यम के रूप में चिह्नित किया है। इनका उद्देश्य उद्यमिता को बढ़ावा देना और टिकाऊ आर्थिक विकास सुनिश्चित करना है।
राष्ट्र प्रेस
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