नाना पटोले के पैर धोने का वीडियो वायरल, शिवसेना के संजय निरुपम ने बताया 'बेहद शर्मनाक'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें गुरु पूर्णिमा के एक कार्यक्रम के दौरान दो व्यक्ति उनके पैर दूध से धोते और उन पर फूल बरसाते दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो ने महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
वायरल वीडियो में क्या दिखा
वायरल वीडियो में नाना पटोले सोफे पर बैठे नज़र आ रहे हैं, जबकि दो लोग उनके पैर धो रहे हैं और पुष्पवर्षा कर रहे हैं। रस्म के अनुसार उनके पैरों के पास फल भी रखे गए थे। वीडियो में पटोले मोबाइल फोन पर स्क्रॉल करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
संजय निरुपम की तीखी प्रतिक्रिया
शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम ने इस वीडियो को 'बेहद शर्मनाक' करार दिया। उन्होंने कहा, 'नाना पटोले का यह वीडियो बेहद शर्मनाक है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उनके तथाकथित शिष्य उनके पैर दूध से धोते हुए दिखाई दे रहे हैं। बाबा राम रहीम और बाबा रामपाल की तरह नाना पटोले भी घमंड से भरे रवैये के साथ मोबाइल पर स्क्रॉल करते हुए बैठे हैं। सबसे पहले तो पैर दूध से धुलवाना किसी आध्यात्मिक गुरु के लिए भी उचित नहीं है, राजनेता की तो बात ही छोड़िए।'
निरुपम ने आगे कहा, 'गुरु पूर्णिमा पर गुरु के प्रति आदर दिखाया जा सकता है, लेकिन इस तरह पैर दूध से धोने का क्या अर्थ है?' यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में विपक्षी दल और सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के बीच सियासी तनाव पहले से ऊँचा है।
पटोले का बचाव
कांग्रेस नेता नाना पटोले ने घटना का बचाव करते हुए स्पष्ट किया कि उनके पैर छूने वाले लोग उनके परिवार के युवा सदस्य थे, न कि कोई राजनीतिक अनुयायी। हालांकि, उनके इस स्पष्टीकरण से विवाद थमता नहीं दिख रहा।
BJP और अन्य मुद्दों पर निरुपम के बयान
BJP ने इस घटना पर कटाक्ष करते हुए इसे 'कांग्रेस संस्कृति का प्रतिबिंब' बताया। वहीं, निरुपम ने बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'यह बहुत अच्छा निर्णय है। अयोध्या के राम मंदिर में दान और चढ़ावे की चोरी के विरोध में जिस तरह का प्रदर्शन किया गया, वह महज एक नाटक था।' उन्होंने आरोप लगाया कि भगवा वस्त्र पहनकर साधु का रूप धारण करने और दान चोरी का अभिनय करने वाली यह प्रस्तुति 'संपूर्ण सनातन धर्म का अपमान' थी।
निरुपम ने सिद्धिविनायक मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले पर भी बोलते हुए कहा कि अपुष्ट जानकारी के अनुसार मंदिर ट्रस्टियों ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को सूचित किया है कि दान राशि का एक बड़ा हिस्सा संभवतः गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने बताया कि राज ठाकरे ने पहले भी इसे बड़ा मुद्दा बताया था।
एफसीआरए संशोधन पर बड़ा दावा
निरुपम ने यह भी दावा किया कि संसद में जल्द ही विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) में बड़े संशोधन का प्रस्ताव पेश किया जाएगा। उनके अनुसार, इस संशोधन के बाद मिशनरी समूहों और विदेशी फंडिंग से चलने वाले कई एनजीओ के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रस्ताव रखा जाएगा। यह दावा अभी तक सरकारी स्तर पर पुष्ट नहीं हुआ है।
गौरतलब है कि यह विवाद महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद के राजनीतिक माहौल में आया है, जहाँ कांग्रेस और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच वाकयुद्ध लगातार जारी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएँ आने की संभावना है।