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नंदीग्राम उपचुनाव: टीएमसी उम्मीदवार एहतेशामुल हक ने अभियान शुरू किया, ममता बनर्जी पर साधा सीधा निशाना

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नंदीग्राम उपचुनाव: टीएमसी उम्मीदवार एहतेशामुल हक ने अभियान शुरू किया, ममता बनर्जी पर साधा सीधा निशाना

सारांश

नंदीग्राम — वह सीट जहाँ ममता बनर्जी 2021 में हारी थीं — अब उन्हीं की पार्टी के उम्मीदवार एहतेशामुल हक के निशाने पर है। हक ने मुस्लिम प्रतिनिधित्व में भारी गिरावट के आँकड़े पेश कर TMC की अंदरूनी राजनीति पर सवाल खड़े किए हैं — और यह बगावत जितनी दिखती है, उससे कहीं गहरी है।

मुख्य बातें

TMC उम्मीदवार एहतेशामुल हक ने 25 सितंबर 2026 को नंदीग्राम उपचुनाव के लिए अभियान शुरू किया।
हक ने ममता बनर्जी पर मुस्लिम समुदाय का राजनीतिक इस्तेमाल करने और विकास न देने का आरोप लगाया।
हक के अनुसार, विधानसभा में मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या 2011 में 70 से घटकर 42 तक पहुँच गई।
उन्होंने मुस्लिम मतदाताओं से वोट विभाजित न करने और सभी समुदायों से समर्थन की अपील की।
नंदीग्राम वह सीट है जहाँ ममता बनर्जी 2021 के विधानसभा चुनाव में पराजित हुई थीं, जिससे इस उपचुनाव का महत्व और बढ़ा।

नंदीग्राम सीट पर प्रस्तावित उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार एहतेशामुल हक ने 25 सितंबर 2026 को अपने चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत की। उन्होंने स्थानीय निवासियों से और विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय के लोगों से मुलाकात कर समर्थन जुटाया। इसी दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीति पर तीखे आरोप लगाए।

अभियान की शुरुआत और समुदाय से अपील

हक ने बताया कि उन्होंने जुमे की नमाज अदा करने के बाद लोगों से दुआ लेकर प्रचार अभियान की शुरुआत की। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उन्हें समर्थन देने का भरोसा दिलाया। उन्होंने अल्पसंख्यक मतदाताओं से वोट विभाजित न करने और अपनी उम्मीदवारी के पक्ष में एकजुट होने की अपील की।

हक ने यह भी कहा कि वह हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई — सभी समुदायों से समर्थन चाहते हैं और देश को नफरत की दीवारों में बाँटने के विरुद्ध हैं। उनके अनुसार, राष्ट्रीय एकता सभी धर्मों की सामूहिक ताकत में निहित है।

ममता बनर्जी पर आरोप

हक ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक सत्ता में रहीं ममता बनर्जी ने मुस्लिम समुदाय का राजनीतिक इस्तेमाल किया लेकिन विकास के स्तर पर अपेक्षित काम नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि समुदाय को बड़े-बड़े सपने दिखाए गए, परंतु ज़मीनी हकीकत में बदलाव नहीं आया।

हक के अनुसार, सत्ता के दौरान लोग खुलकर अपनी बात नहीं कर पाते थे, लेकिन अब जनता बेझिझक अपनी राय रख रही है। उन्होंने दावा किया कि 'पश्चिम बंगाल के लोगों ने ममता बनर्जी को अपने दिल से निकाल दिया है।'

मुस्लिम प्रतिनिधित्व का मुद्दा

हक ने विधानसभा में मुस्लिम उम्मीदवारों के घटते प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि 2011 में कांग्रेस के साथ सत्ता में आने के समय 70 मुस्लिम उम्मीदवार थे, जो 2016 में घटकर 57 रह गए और बाद में यह संख्या 42 तक आ गई। उनके अनुसार, समुदाय को पार्टी का झंडा उठाने के लिए इस्तेमाल तो किया गया, लेकिन राजनीतिक नेतृत्व में पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।

जिम्मेदारी और जनसंपर्क

नंदीग्राम जैसी ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील सीट से मुस्लिम उम्मीदवार बनाए जाने को हक ने अपने लिए बड़ी जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन पर भरोसा जताया है और वह व्यक्तिगत रूप से हर मतदाता तक पहुँच रहे हैं।

हक ने तानाशाही की राजनीति की आलोचना करते हुए कहा कि राजनीति में किसी एक व्यक्ति का प्रभाव हमेशा नहीं चल सकता और बच्चों व युवाओं से प्यार से बात करना ज़रूरी है। यह ऐसे समय में आया है जब नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव की घोषणा ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

गौरतलब है कि नंदीग्राम वह सीट है जहाँ से 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी स्वयं हार गई थीं, जिससे इस सीट का राजनीतिक महत्व और भी बढ़ गया है। इस उपचुनाव में सभी दलों की प्रतिष्ठा दाँव पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह अंदरूनी असंतोष को सार्वजनिक मान्यता देना है। नंदीग्राम की ऐतिहासिक संवेदनशीलता — जहाँ ममता खुद 2021 में हारीं — इस उपचुनाव को राज्य की राजनीति का एक बड़ा踏板 बना देती है। असली सवाल यह है कि क्या हक की यह रणनीति TMC के वोट बैंक को मजबूत करेगी या उसे और विभाजित करेगी।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नंदीग्राम उपचुनाव में TMC उम्मीदवार कौन हैं?
तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने नंदीग्राम उपचुनाव के लिए एहतेशामुल हक को अपना उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने 25 सितंबर 2026 को जुमे की नमाज के बाद अपना चुनाव अभियान शुरू किया।
एहतेशामुल हक ने ममता बनर्जी पर क्या आरोप लगाए?
हक ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने मुस्लिम समुदाय का राजनीतिक इस्तेमाल किया लेकिन विकास के स्तर पर अपेक्षित काम नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा में मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या 2011 के 70 से घटते-घटते 42 तक आ गई।
नंदीग्राम सीट का राजनीतिक महत्व क्यों है?
नंदीग्राम वह सीट है जहाँ 2021 के विधानसभा चुनाव में खुद ममता बनर्जी पराजित हुई थीं, जिससे यह सीट पश्चिम बंगाल की राजनीति में विशेष महत्व रखती है। इस उपचुनाव में सभी प्रमुख दलों की प्रतिष्ठा दाँव पर है।
हक ने मतदाताओं से क्या अपील की?
हक ने मुस्लिम मतदाताओं से वोट विभाजित न करने की अपील की और हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी समुदायों से समर्थन माँगा। उन्होंने नफरत की राजनीति के खिलाफ राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।
TMC में मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर क्या विवाद है?
हक के अनुसार, TMC के साथ 2011 में 70 मुस्लिम उम्मीदवार थे, जो 2016 में 57 और बाद में 42 रह गए। उनका आरोप है कि समुदाय को पार्टी झंडा उठाने के लिए इस्तेमाल किया गया लेकिन नेतृत्व में पर्याप्त भागीदारी नहीं दी गई।
राष्ट्र प्रेस
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