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NCB की बड़ी कार्रवाई: फार्मा ड्रग डायवर्जन नेटवर्क की ₹20.10 करोड़ की 25 संपत्तियाँ फ्रीज

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NCB की बड़ी कार्रवाई: फार्मा ड्रग डायवर्जन नेटवर्क की ₹20.10 करोड़ की 25 संपत्तियाँ फ्रीज

सारांश

NCB ने फार्मा ड्रग डायवर्जन मामले में अब सिर्फ दवाएं नहीं, तस्करों की जायदाद पर हाथ डाला है — ₹20.10 करोड़ की 25 संपत्तियाँ फ्रीज, 7 राज्यों में फैले नेटवर्क का भंडाफोड़ और 17 गिरफ्तारियाँ। यह मामला दिखाता है कि फार्मा सप्लाई चेन का दुरुपयोग किस स्तर तक पहुँच चुका है।

मुख्य बातें

NCB ने ₹20.10 करोड़ मूल्य की 25 अचल संपत्तियाँ फ्रीज कीं; सक्षम प्राधिकरण ने 30 अक्टूबर को आदेश बरकरार रखा।
मामले की शुरुआत 7 फरवरी 2025 को अमृतसर में 5,000 ट्रामाडोल टैबलेट की बरामदगी से हुई थी।
अब तक 34 लाख साइकोट्रॉपिक टैबलेट , 10.57 लाख बोतल कफ सिरप और लगभग 2,200 किलोग्राम साइकोट्रॉपिक पाउडर बरामद।
नेटवर्क पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश सहित 7 राज्यों तक फैला।
जाँच में 17 लोग गिरफ्तार ; कोनिक गोयल, मानिक गोयल और परशोत्तम लाल गोयल अभी भी फरार, सर्वोच्च न्यायालय अग्रिम जमानत खारिज कर चुका है।
नागरिक ड्रग तस्करी की सूचना हेल्पलाइन 1933 पर दे सकते हैं।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने 1 नवंबर 2026 को अंतरराज्यीय फार्मास्यूटिकल ड्रग डायवर्जन मामले में एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए ₹20.10 करोड़ मूल्य की 25 अचल संपत्तियों को फ्रीज करने के अपने आदेश को सक्षम प्राधिकरण से बरकरार रखवाया। नई दिल्ली स्थित सक्षम प्राधिकरण ने 30 अक्टूबर को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की धारा 68एफ(2) के अंतर्गत NCB के 2 अक्टूबर के फ्रीजिंग आदेश को विधिमान्य ठहराया। यह कार्रवाई दर्शाती है कि एजेंसी अब तस्करों की आर्थिक नींव को भी उखाड़ने पर केंद्रित है।

मामले की पृष्ठभूमि और शुरुआत

यह मामला 7 फरवरी 2025 को अमृतसर में 5,000 ट्रामाडोल टैबलेट की बरामदगी से शुरू हुआ था। जब्त पैकेजिंग पर निर्माता के रूप में एम/एस जे.आर. फार्मास्युटिकल्स, हरिद्वार और विपणनकर्ता के रूप में एम/एस तिवारी मेडिकल एजेंसीज, देहरादून का उल्लेख था। जाँच में सामने आया कि विपणन करने वाली कंपनी वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं थी।

इसके बाद NCB की विशेष जाँच टीम (SIT) ने सप्लाई चेन की गहन पड़ताल की। जाँचकर्ताओं ने पाया कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की कई फार्मा कंपनियाँ फर्जी संस्थाओं की आड़ में दवाएं अवैध बाजार में पहुँचा रही थीं। गौरतलब है कि यह नेटवर्क पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश — कुल सात राज्यों — तक फैला हुआ पाया गया।

बरामदगी और गिरफ्तारियाँ

अब तक की जाँच में NCB ने लगभग 34 लाख साइकोट्रॉपिक टैबलेट, 10.57 लाख बोतल कोडीन युक्त कफ सिरप, 50,000 ट्रामाडोल एम्प्यूल, 5,000 मिडाजोलम वायल और लगभग 2,200 किलोग्राम साइकोट्रॉपिक पाउडर (कच्चा माल व तैयार उत्पाद सहित) बरामद किए हैं। इस मामले में अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

जाँच के दौरान हिमाचल प्रदेश के कालाअंब स्थित एम/एस डिजिटल विजन और एम/एस वेलिन्टन हेल्थकेयर से भी बड़ी मात्रा में साइकोट्रॉपिक दवाएं और कच्चा माल जब्त किया गया। अधिकारियों के अनुसार, दवाओं की बिक्री से अर्जित अवैध धनराशि को विभिन्न कंपनियों के बैंक खातों से गुजारकर 'वैध' दिखाने की कोशिश की गई, लेकिन आरोपी आय का वैध स्रोत प्रमाणित नहीं कर सके।

फ्रीज की गई संपत्तियों का विवरण

फ्रीज की गई 25 संपत्तियों में औद्योगिक प्लॉट, व्यावसायिक इकाइयाँ, शॉप-कम-ऑफिस यूनिट और आवासीय फ्लैट शामिल हैं। ये संपत्तियाँ मोहाली के गिल्को इंडस्ट्रियल पार्क, मोहाली सिटी सेंटर-3, मोहाली सिटी सेंटर वॉक, जनता इंडस्ट्रियल एस्टेट, गैलेक्सी हाइट्स-2 और क्वीनस्टाउन जैसे प्रमुख इलाकों में स्थित हैं। फ्रीजिंग आदेश के बाद इन सम्पत्तियों की बिक्री, हस्तांतरण या किसी भी प्रकार के लेन-देन पर पूर्ण रोक रहेगी।

फरार आरोपी और सर्वोच्च न्यायालय का रुख

कोनिक गोयल, मानिक गोयल और उनके पिता परशोत्तम लाल गोयल — निवासी अंबाला कैंट, हरियाणा — बार-बार समन और गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने के बावजूद फरार हैं। सर्वोच्च न्यायालय इनकी अग्रिम जमानत याचिकाएँ पहले ही खारिज कर चुका है। फ्रीज की गई संपत्तियों में इन तीनों और इनके परिजनों के नाम पर दर्ज सम्पत्तियाँ भी शामिल हैं।

NCB की रणनीति और नागरिकों से अपील

NCB ने स्पष्ट किया है कि उसकी रणनीति केवल ड्रग्स की बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि तस्करी नेटवर्क को आर्थिक रूप से कमज़ोर करना भी उसकी प्राथमिकता है। एजेंसी ड्रग सप्लाई चेन के साथ-साथ उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की समानांतर जाँच कर रही है — ताकि निर्माताओं, वितरकों, फर्जी कंपनियों और वित्तीय सहायकों तक पहुँचा जा सके। NCB ने नागरिकों से ड्रग तस्करी से संबंधित किसी भी सूचना को मानस राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन 1933 पर साझा करने की अपील की है और आश्वासन दिया है कि सूचनादाताओं की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी। आने वाले हफ्तों में जाँच के दायरे के और विस्तार की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सवाल लाइसेंसिंग प्रक्रिया पर भी उठते हैं। NCB की वित्तीय जाँच की दिशा सराहनीय है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या इन मामलों में अदालत तक दोषसिद्धि पहुँचती है — फ्रीज की गई संपत्तियाँ वर्षों तक विवादित रह सकती हैं। सात राज्यों में फैले इस नेटवर्क को देखते हुए यह भी पूछा जाना चाहिए कि ड्रग्स कंट्रोलर और राज्य सरकारें कहाँ थीं जब ये कंपनियाँ लगातार डायवर्जन कर रही थीं।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NCB ने किस मामले में 25 संपत्तियाँ फ्रीज की हैं?
NCB ने अंतरराज्यीय फार्मास्यूटिकल ड्रग डायवर्जन मामले में ₹20.10 करोड़ मूल्य की 25 अचल संपत्तियाँ फ्रीज की हैं। यह मामला 7 फरवरी 2025 को अमृतसर में 5,000 ट्रामाडोल टैबलेट की बरामदगी से शुरू हुआ था और सात राज्यों तक फैले नेटवर्क तक पहुँचा।
NDPS अधिनियम की धारा 68एफ(2) के तहत संपत्ति फ्रीजिंग का क्या अर्थ है?
एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की धारा 68एफ(2) के तहत सक्षम प्राधिकरण NCB के फ्रीजिंग आदेश को बरकरार रख सकता है, जिससे आरोपियों की संपत्तियों की बिक्री, हस्तांतरण या किसी भी प्रकार के लेन-देन पर रोक लग जाती है। इसका उद्देश्य अपराध से अर्जित धन को जब्त करना और नेटवर्क को आर्थिक रूप से कमज़ोर करना है।
इस मामले में अब तक कितनी दवाएं बरामद हुई हैं?
जाँच में अब तक लगभग 34 लाख साइकोट्रॉपिक टैबलेट, 10.57 लाख बोतल कोडीन युक्त कफ सिरप, 50,000 ट्रामाडोल एम्प्यूल, 5,000 मिडाजोलम वायल और लगभग 2,200 किलोग्राम साइकोट्रॉपिक पाउडर बरामद किए जा चुके हैं। इसके साथ ही 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
फरार आरोपी कोनिक गोयल और उनके परिवार के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है?
कोनिक गोयल, मानिक गोयल और उनके पिता परशोत्तम लाल गोयल — सभी अंबाला कैंट, हरियाणा के निवासी — बार-बार समन और गैर-जमानती वारंट के बाद भी फरार हैं। सर्वोच्च न्यायालय उनकी अग्रिम जमानत याचिकाएँ खारिज कर चुका है, और उनके तथा उनके परिजनों के नाम पर दर्ज संपत्तियाँ भी फ्रीज की गई हैं।
ड्रग तस्करी की सूचना कहाँ और कैसे दें?
NCB ने नागरिकों से अपील की है कि वे ड्रग तस्करी से संबंधित किसी भी जानकारी को मानस राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन नंबर 1933 पर साझा करें। एजेंसी ने आश्वासन दिया है कि सूचनादाताओं की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
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