26 जून 2026
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एनसीईआरटी में आपातकाल अध्याय पर वीएचपी का समर्थन, श्रीराज नायर बोले — युवाओं को सच जानने का हक

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एनसीईआरटी में आपातकाल अध्याय पर वीएचपी का समर्थन, श्रीराज नायर बोले — युवाओं को सच जानने का हक

सारांश

वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने एनसीईआरटी में आपातकाल अध्याय को 'युवाओं का अधिकार' बताया और कांग्रेस नेता हुसैन दलवई की आपत्ति को सिरे से खारिज किया। साथ ही पश्चिम बंगाल में नई सुवेंदु अधिकारी सरकार द्वारा लंबित मामले खोलने के फैसले को वीएचपी का पूर्ण समर्थन मिला।

मुख्य बातें

वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने 26 जून 2026 को मुंबई में एनसीईआरटी किताबों में आपातकाल अध्याय शामिल करने का समर्थन किया।
नायर ने इंदिरा गांधी के आपातकाल को 'भारतीय लोकतंत्र पर बड़ा कलंक' बताया — मीडिया दमन, विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी और संस्थानों पर अंकुश का हवाला दिया।
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई की आपत्ति को नायर ने खारिज करते हुए कहा कि युवाओं को इतिहास जानने का अधिकार है।
पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी की नई सरकार द्वारा ममता बनर्जी के कार्यकाल के लंबित मामले खोलने के फैसले का वीएचपी ने स्वागत किया।
नायर ने संदेशखाली सहित कई जिलों में पूर्व सरकार के दौरान अपराधियों को मिली 'छूट' पर गंभीर आरोप लगाए।

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने 26 जून 2026 को मुंबई में स्पष्ट किया कि एनसीईआरटी पाठ्यक्रम में आपातकाल (इमरजेंसी) का अध्याय शामिल किया जाना पूरी तरह उचित है। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं को इस ऐतिहासिक कलंक की सच्चाई जानने का अधिकार है। यह बयान कांग्रेस नेता हुसैन दलवई की उस आपत्ति के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने एनसीईआरटी किताबों में इमरजेंसी अध्याय जोड़े जाने पर सवाल उठाए थे।

आपातकाल को 'लोकतंत्र पर कलंक' बताया

नायर ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इमरजेंसी उस लोकतंत्र को बदनाम करने की एक सुनियोजित साजिश थी। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान मीडिया को दबाया, विपक्षी नेताओं को महीनों तक जेल में रखा और सरकारी संस्थानों पर अंकुश लगाया। उनके अनुसार, यह इतिहास का एक ऐसा अध्याय है जिसे पाठ्यक्रम में शामिल कर हर युवा तक पहुँचाना ज़रूरी है।

कांग्रेस नेता पर तीखी प्रतिक्रिया

नायर ने कांग्रेस नेता हुसैन दलवई पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अपनी 'अनाप-शनाप बयानबाजी' के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं को हिंदुत्व और देश के इतिहास की जानकारी पाने का पूरा अधिकार है। नायर ने यह भी कहा कि दलवई को यह स्वीकार करना चाहिए कि भारत का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि 'भारत हिंदू राष्ट्र था, है और रहेगा।'

पश्चिम बंगाल में लंबित मामले खोलने का स्वागत

वीएचपी प्रवक्ता ने पश्चिम बंगाल में हाल की सत्ता-परिवर्तन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नई सरकार का नेतृत्व सुवेंदु अधिकारी कर रहे हैं और उनकी सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शासनकाल में दर्ज लंबित मामलों की फाइलें फिर से खोलने का फैसला किया है। नायर ने आरोप लगाया कि ममता सरकार के दौरान संदेशखाली सहित कई जिले अपराधियों के प्रभाव में थे और तुष्टीकरण की राजनीति के चलते दोषियों को सजा नहीं मिली।

वीएचपी की माँग — अपराधियों को कड़ी सजा

नायर ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद सुवेंदु अधिकारी सरकार के इस निर्णय का पूर्ण समर्थन करती है। उन्होंने विश्वास जताया कि पुरानी लंबित फाइलें खुलने से अपराधियों को कड़ी सजा मिलेगी और भविष्य में कोई भी सरकार अपराधियों को प्रोत्साहित करने का साहस नहीं करेगी। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में सत्ता-परिवर्तन के बाद लंबित मामलों को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ इतिहास की व्याख्या खुद एक राजनीतिक अखाड़ा बन चुकी है। आपातकाल को पाठ्यक्रम में शामिल करना तथ्यात्मक रूप से उचित हो सकता है — 1975-77 का वह दौर भारतीय लोकतंत्र का एक दस्तावेज़ी अध्याय है — लेकिन सवाल यह है कि उसे किस दृष्टिकोण से और किस संतुलन के साथ पढ़ाया जाएगा। पश्चिम बंगाल के संदर्भ में वीएचपी की माँग राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, क्योंकि 'लंबित मामले खोलना' न्यायिक प्रक्रिया है, न कि किसी संगठन की घोषणा का विषय। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस फर्क को नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीएचपी ने एनसीईआरटी में आपातकाल अध्याय का समर्थन क्यों किया?
वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र पर एक बड़ा कलंक था और देश के युवाओं को पाठ्यक्रम के ज़रिए इस सच्चाई को जानने का अधिकार है। उन्होंने इंदिरा गांधी के कार्यकाल में मीडिया दमन और विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी को इसका आधार बताया।
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने एनसीईआरटी आपातकाल अध्याय पर क्या कहा था?
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने एनसीईआरटी किताबों में आपातकाल का अध्याय शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई थी। वीएचपी ने उनके इस बयान को 'अनाप-शनाप बयानबाजी' करार देते हुए खारिज किया।
पश्चिम बंगाल में लंबित मामले खोलने के फैसले पर वीएचपी का क्या रुख है?
वीएचपी ने सुवेंदु अधिकारी की नई सरकार के उस फैसले का पूर्ण समर्थन किया है, जिसमें ममता बनर्जी के शासनकाल की लंबित फाइलें फिर से खोली जाएंगी। नायर ने कहा कि इससे अपराधियों को कड़ी सजा मिलेगी और भविष्य में ऐसी राजनीति पर अंकुश लगेगा।
संदेशखाली का इस मामले से क्या संबंध है?
वीएचपी प्रवक्ता नायर ने संदेशखाली का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के शासनकाल में यह और कई अन्य जिले अपराधियों के प्रभाव में थे। उन्होंने कहा कि उस दौर में तुष्टीकरण की राजनीति के चलते दोषियों को सजा नहीं मिली।
एनसीईआरटी पाठ्यक्रम में आपातकाल का अध्याय क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है?
1975-77 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक निर्णायक दौर था, जिसमें नागरिक अधिकारों पर व्यापक पाबंदियाँ लगाई गई थीं। वीएचपी का तर्क है कि इस अध्याय को पाठ्यक्रम में शामिल करने से युवा पीढ़ी को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का महत्व समझ आएगा।
राष्ट्र प्रेस
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