नंदिनी बोसमिया मौत मामला: NCW ने गुजरात DGP को लिखा पत्र, 7 दिन में रिपोर्ट माँगी
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने गुजरात के राजकोट में नंदिनी आनंद भाई बोसमिया की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु का स्वतः संज्ञान लेते हुए गुजरात पुलिस महानिदेशक (DGP) को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आयोग ने 7 दिनों के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। नंदिनी, जो पूर्व में आम आदमी पार्टी (AAP) की उम्मीदवार रह चुकी थीं, 22 जून को अपने अपार्टमेंट में फंदे से लटकी हुई मिली थीं।
मामले की पृष्ठभूमि
रिपोर्टों के अनुसार, 23 वर्षीय नंदिनी की मौत को शुरुआत में आत्महत्या का मामला माना गया था। हालाँकि, परिजनों ने इसे हत्या बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं और दावा किया है कि मृत्यु को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। परिवार का आरोप है कि नंदिनी के लिव-इन पार्टनर असलम सामा का इस मामले में हाथ हो सकता है, जो कथित तौर पर पहले से विवाहित था और दोनों के बीच अक्सर विवाद होते थे।
NCW की माँगें
आयोग ने DGP को लिखे पत्र में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पीड़िता का लंबे समय तक शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक शोषण किए जाने के आरोप हैं। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि उचित प्रावधानों के तहत तत्काल FIR दर्ज कर सभी आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।
इसके अलावा, कथित जबरन गर्भाशय निकालने की विस्तृत जाँच कर संबंधित चिकित्सा सुविधा और चिकित्साकर्मियों की भूमिका की जाँच की जाए। विशेषज्ञ चिकित्सकों के पैनल द्वारा व्यापक फोरेंसिक पोस्टमॉर्टम कराए जाने की भी माँग की गई है।
आर्थिक शोषण और पूर्व शिकायत की जाँच
NCW ने पीड़िता के साथ हुए कथित आर्थिक शोषण की जाँच कर उनकी रिकवरी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही, जूनागढ़ में पहले से दर्ज शिकायत की समीक्षा कर किसी भी संस्थागत लापरवाही की जाँच करने को कहा गया है — यह संकेत है कि यह मामला राजकोट से पहले भी अधिकारियों के संज्ञान में आ चुका था।
पुलिस की कार्रवाई
राजकोट पुलिस ने फिलहाल आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज कर फोरेंसिक जाँच शुरू कर दी है। मृत्यु से पूर्व पीड़िता द्वारा साझा किया गया अंतिम संदेश और घटनास्थल की परिस्थितियाँ इस मामले को और अधिक संदिग्ध बनाती हैं, जिससे परिजनों की हत्या की आशंका को बल मिलता है।
आगे क्या होगा
NCW के हस्तक्षेप के बाद अब सभी की निगाहें गुजरात पुलिस की 7 दिनों के भीतर आने वाली एक्शन टेकन रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह मामला महिला सुरक्षा, चिकित्सा नैतिकता और पुलिस की जवाबदेही — तीनों मोर्चों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।