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नंदिनी बोसमिया मौत मामला: NCW ने गुजरात DGP को लिखा पत्र, 7 दिन में रिपोर्ट माँगी

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नंदिनी बोसमिया मौत मामला: NCW ने गुजरात DGP को लिखा पत्र, 7 दिन में रिपोर्ट माँगी

सारांश

राजकोट में AAP की पूर्व उम्मीदवार नंदिनी बोसमिया की संदिग्ध मौत अब NCW की निगरानी में है। आयोग ने गुजरात DGP से FIR, फोरेंसिक पोस्टमॉर्टम और कथित जबरन गर्भाशय निकालने की जाँच की माँग की है — और 7 दिन में रिपोर्ट माँगी है।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने राजकोट में नंदिनी बोसमिया की मौत का स्वतः संज्ञान लिया।
आयोग ने गुजरात DGP को पत्र लिखकर तत्काल FIR दर्ज करने और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए।
कथित जबरन गर्भाशय निकालने की जाँच और विशेषज्ञ पैनल द्वारा फोरेंसिक पोस्टमॉर्टम की माँग।
परिजनों का आरोप — लिव-इन पार्टनर असलम सामा का हाथ, मौत को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश।
जूनागढ़ में दर्ज पूर्व शिकायत की भी समीक्षा के निर्देश।
NCW ने 7 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट माँगी।

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने गुजरात के राजकोट में नंदिनी आनंद भाई बोसमिया की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु का स्वतः संज्ञान लेते हुए गुजरात पुलिस महानिदेशक (DGP) को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आयोग ने 7 दिनों के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। नंदिनी, जो पूर्व में आम आदमी पार्टी (AAP) की उम्मीदवार रह चुकी थीं, 22 जून को अपने अपार्टमेंट में फंदे से लटकी हुई मिली थीं।

मामले की पृष्ठभूमि

रिपोर्टों के अनुसार, 23 वर्षीय नंदिनी की मौत को शुरुआत में आत्महत्या का मामला माना गया था। हालाँकि, परिजनों ने इसे हत्या बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं और दावा किया है कि मृत्यु को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। परिवार का आरोप है कि नंदिनी के लिव-इन पार्टनर असलम सामा का इस मामले में हाथ हो सकता है, जो कथित तौर पर पहले से विवाहित था और दोनों के बीच अक्सर विवाद होते थे।

NCW की माँगें

आयोग ने DGP को लिखे पत्र में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पीड़िता का लंबे समय तक शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक शोषण किए जाने के आरोप हैं। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि उचित प्रावधानों के तहत तत्काल FIR दर्ज कर सभी आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।

इसके अलावा, कथित जबरन गर्भाशय निकालने की विस्तृत जाँच कर संबंधित चिकित्सा सुविधा और चिकित्साकर्मियों की भूमिका की जाँच की जाए। विशेषज्ञ चिकित्सकों के पैनल द्वारा व्यापक फोरेंसिक पोस्टमॉर्टम कराए जाने की भी माँग की गई है।

आर्थिक शोषण और पूर्व शिकायत की जाँच

NCW ने पीड़िता के साथ हुए कथित आर्थिक शोषण की जाँच कर उनकी रिकवरी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही, जूनागढ़ में पहले से दर्ज शिकायत की समीक्षा कर किसी भी संस्थागत लापरवाही की जाँच करने को कहा गया है — यह संकेत है कि यह मामला राजकोट से पहले भी अधिकारियों के संज्ञान में आ चुका था।

पुलिस की कार्रवाई

राजकोट पुलिस ने फिलहाल आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज कर फोरेंसिक जाँच शुरू कर दी है। मृत्यु से पूर्व पीड़िता द्वारा साझा किया गया अंतिम संदेश और घटनास्थल की परिस्थितियाँ इस मामले को और अधिक संदिग्ध बनाती हैं, जिससे परिजनों की हत्या की आशंका को बल मिलता है।

आगे क्या होगा

NCW के हस्तक्षेप के बाद अब सभी की निगाहें गुजरात पुलिस की 7 दिनों के भीतर आने वाली एक्शन टेकन रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह मामला महिला सुरक्षा, चिकित्सा नैतिकता और पुलिस की जवाबदेही — तीनों मोर्चों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि राजकोट पुलिस ने शुरुआत में मामले को आत्महत्या क्यों माना, जबकि परिस्थितियाँ संदिग्ध थीं। कथित जबरन गर्भाशय निकालने का आरोप — अगर सिद्ध हुआ — तो यह चिकित्सा नैतिकता का भी गंभीर उल्लंघन होगा। 7 दिन की समयसीमा दबाव बनाती है, लेकिन असली जवाबदेही तब तय होगी जब ATR सार्वजनिक हो और उस पर कार्रवाई दिखे।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नंदिनी बोसमिया कौन थीं और उनकी मौत कैसे हुई?
नंदिनी बोसमिया गुजरात के राजकोट की 23 वर्षीया युवती थीं, जो पूर्व में आम आदमी पार्टी (AAP) की उम्मीदवार रह चुकी थीं। 22 जून को वे अपने अपार्टमेंट में फंदे से लटकी हुई मिलीं; शुरुआती जाँच में आत्महत्या का मामला लगा, लेकिन परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया है।
NCW ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए गुजरात DGP को पत्र लिखा है। आयोग ने तत्काल FIR दर्ज करने, सभी आरोपियों की गिरफ्तारी, फोरेंसिक पोस्टमॉर्टम और 7 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
परिजनों ने किस पर आरोप लगाए हैं?
परिजनों का आरोप है कि नंदिनी के लिव-इन पार्टनर असलम सामा का इस मौत में हाथ हो सकता है, जो कथित तौर पर पहले से विवाहित था। परिवार का दावा है कि दोनों के बीच अक्सर विवाद होते थे और मौत को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई।
कथित जबरन गर्भाशय निकालने का मामला क्या है?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पीड़िता को कथित तौर पर धोखे और दबाव में जबरन गर्भाशय निकलवाने के लिए मजबूर किया गया। NCW ने संबंधित चिकित्सा सुविधा और चिकित्साकर्मियों की भूमिका की विस्तृत जाँच के निर्देश दिए हैं।
राजकोट पुलिस ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
राजकोट पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज कर फोरेंसिक जाँच शुरू कर दी है। NCW के हस्तक्षेप के बाद अब 7 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट देनी होगी, जिससे जाँच की दिशा स्पष्ट होगी।
राष्ट्र प्रेस
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