नीट पेपर लीक रैली: कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी छात्र परिषद की याचिका खारिज की
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 25 जुलाई को पश्चिम बंगाल तृणमूल छात्र परिषद (टीएमसी छात्र परिषद) की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें नीट पेपर लीक मुद्दे पर कोलकाता में रैली निकालने की अनुमति माँगी गई थी। यह रैली दिल्ली में छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में आयोजित की जानी थी। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की विशेष पीठ ने स्पष्ट किया कि मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए पुलिस का निर्णय उचित प्रतीत होता है।
याचिका की पृष्ठभूमि
टीएमसी छात्र परिषद की प्रदेश अध्यक्ष प्रियंका अधिकारी ने शनिवार दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक पद्मपुकुर से मौलाली तक रैली की अनुमति माँगी थी। 23 जुलाई को अनुमति के लिए आवेदन किया गया था। आवेदन में कॉलेज स्क्वायर से एस्प्लेनेड या पार्क सर्कस सेवन प्वाइंट से सीआईटी रोड होते हुए मौलाली तक रैली निकालने का वैकल्पिक मार्ग भी प्रस्तावित था।
पुलिस का इनकार और अदालत का रुख
24 जुलाई को संयुक्त पुलिस आयुक्त ने ईमेल के ज़रिए मौजूदा हालात और यातायात प्रबंधन का हवाला देते हुए रैली की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अरका कुमार नाग ने अदालत को बताया कि कॉलेज स्क्वायर पर लोग पहले से एकत्र हैं और रैली का उद्देश्य दिल्ली में छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज का विरोध करना है।
न्यायालय की टिप्पणियाँ
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि प्रस्तावित समय समाप्त हो चुका है और ऐसी कोई आपात स्थिति नहीं है जिसके आधार पर तत्काल राहत दी जाए। न्यायाधीश ने यह भी कहा कि यदि छात्रों के प्रति एकजुटता दिखानी है तो अन्य माध्यम अपनाए जा सकते हैं, क्योंकि फिलहाल स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं है।
सरकार और एडवोकेट जनरल का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील दिब्येंद्र नारायण राय ने याचिका का विरोध किया। एडवोकेट जनरल सुरजीत नाथ मित्रा ने अदालत को बताया कि शुक्रवार को बड़े पैमाने पर रैली हुई थी जिसमें पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने तर्क दिया कि यदि अलग-अलग राजनीतिक दल और उनके छात्र संगठन इसी मुद्दे पर रैलियाँ निकालते हैं तो स्थिति और तनावपूर्ण हो सकती है।
अदालत का अंतिम फैसला
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में पुलिस द्वारा रैली की अनुमति न देने का निर्णय उचित प्रतीत होता है। इसलिए अदालत पुलिस के निर्णय में हस्तक्षेप नहीं करेगी और याचिका खारिज की जाती है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब नीट पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में छात्र आंदोलन तेज़ हो रहे हैं और न्यायपालिका पर दबाव बढ़ रहा है।