नीट यूजी पेपर लीक: आरोपी पीवी कुलकर्णी और शिवराज मोटेगांवकर की न्यायिक हिरासत 8 जुलाई तक बढ़ी
सारांश
मुख्य बातें
नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले में राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 24 जून 2026 को मुख्य आरोपी पीवी कुलकर्णी और शिवराज मोटेगांवकर की न्यायिक हिरासत 8 जुलाई 2026 तक बढ़ा दी है। दोनों आरोपियों को पिछली 14 दिनों की न्यायिक हिरासत समाप्त होने के बाद अदालत में पेश किया गया, जहाँ कोर्ट ने उनकी हिरासत अवधि में विस्तार का आदेश दिया।
मुख्य आरोपी कौन हैं
पीवी कुलकर्णी को केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने इस पेपर लीक कांड का मास्टरमाइंड बताया है। वह लातूर के एक सेवानिवृत्त रसायन विज्ञान प्रोफेसर हैं, जो कई वर्षों तक नीट के प्रश्न-पत्र तैयार करने वाले पैनल का हिस्सा रहे। जाँच एजेंसी के अनुसार, कुलकर्णी ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की आंतरिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए पुणे में विशेष कोचिंग कक्षाओं के माध्यम से छात्रों को प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराया।
शिवराज मोटेगांवकर लातूर में आरसीसी कोचिंग संस्थान के संचालक हैं। जाँच एजेंसियों के अनुसार, परीक्षा से करीब 10 दिन पहले ही उनके पास प्रश्न-पत्र और उत्तर पहुँच गए थे। आरोप है कि उन्होंने NTA पैनल के कुछ सदस्यों, पीवी कुलकर्णी और मनीषा मंदारे के माध्यम से यह पेपर कथित तौर पर हासिल किया और फिर कोचिंग संस्थानों व छात्रों को वितरित किया।
नीट यूजी 2026 परीक्षा का घटनाक्रम
NTA ने नीट यूजी 2026 की परीक्षा मूल रूप से 3 मई 2026 को देशभर के निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की थी। पेपर लीक के विवाद सामने आने के बाद NTA ने परीक्षा रद्द कर दी और दोबारा 21 जून 2026 को कड़ी सुरक्षा व व्यापक निगरानी के बीच परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न कराई।
पुनः आयोजित परीक्षा एक ही शिफ्ट में दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे IST तक पेन-पेपर (ऑफलाइन) मोड में हुई। इसमें 20 लाख से अधिक छात्रों ने पंजीकरण कराया था।
मामले की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब नीट परीक्षा की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब नीट पेपर लीक के आरोप सामने आए हों — 2024 में भी इसी तरह के विवाद ने देशव्यापी आंदोलन को जन्म दिया था। इस बार CBI की जाँच में परीक्षा पैनल के अंदर से ही सेंध लगाने की कथित साजिश उजागर हुई है, जो इस मामले को और गंभीर बनाती है।
आगे क्या होगा
दोनों आरोपी अब 8 जुलाई 2026 तक न्यायिक हिरासत में रहेंगे, जब अदालत में अगली सुनवाई होगी। CBI की जाँच जारी है और मामले में अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। लाखों मेडिकल अभिलाषी छात्रों का भविष्य इस मामले की न्यायिक परिणति से सीधे जुड़ा है।