नेपाल बाढ़ में 400 से अधिक मौतें, 1,000 लापता; शिवसेना (UBT) के आनंद दुबे बोले — भारत नेपाल के साथ
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है, जिसमें अब तक 400 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 1,000 लोग लापता हैं — इनमें कई भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। इस प्राकृतिक आपदा पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 28 अगस्त को मुंबई में गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि भारत इस संकट की घड़ी में अपने पड़ोसी देश के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।
नेपाल बाढ़ पर भारत की प्रतिक्रिया
आनंद दुबे ने कहा कि भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना नेपाल में राहत और बचाव कार्यों में सक्रिय रूप से जुटी हैं। उन्होंने कहा, 'हम अपनी सेना और अपनी एयर फोर्स का शुक्रिया अदा करते हैं, जो उनकी मदद कर रही हैं।' दुबे ने यह भी बताया कि भारत सरकार नेपाल सरकार के साथ सतत संपर्क में है और उम्मीद जताई कि नेपाल जल्द इस संकट से उबर जाएगा। उन्होंने दोनों देशों के बीच के 'गहरे पारिवारिक और आर्थिक संबंधों' का उल्लेख करते हुए इस एकजुटता को स्वाभाविक बताया।
महाराष्ट्र की अंदरूनी राजनीति पर निशाना
नेपाल संकट के साथ-साथ दुबे ने महायुति सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के मुद्दे पर सरकार की प्राथमिकताएँ उलटी रही हैं — चालकों पर कम और सरकार पर ज़्यादा दबाव था। दुबे के अनुसार, मुख्यमंत्री ने प्रताप सरनाइक के अधीन मंत्रालय के एक निर्णय को वीटो कर दिया, जो महायुति गठबंधन के भीतर आपसी तालमेल की कमी को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि एक वर्ष का अतिरिक्त समय देने के पीछे असली कारण उत्तर प्रदेश में आने वाले चुनाव हो सकते हैं।
रक्षाबंधन और धर्मांतरण कानून पर दुबे का बयान
रक्षाबंधन के अवसर पर दुबे ने देश-विदेश में रहने वाले सभी भारतीयों को शुभकामनाएँ दीं। धर्म और आस्था के विषय पर उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने धर्म से गहरा लगाव होता है और यदि कोई स्वेच्छा से अपना धर्म बदलना चाहे, तो यह उसका व्यक्तिगत अधिकार है — किसी भी प्रकार की जबरदस्ती स्वीकार्य नहीं।
दुबे ने महाराष्ट्र सरकार के नए धर्मांतरण संबंधी कानून का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि इस कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि धर्म परिवर्तन की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को दो महीने पहले संबंधित जिला अधिकारी से अनुमति लेनी होगी, जिसके बाद ही धर्म परिवर्तन वैध माना जाएगा।
आगे की स्थिति
नेपाल में बचाव अभियान जारी है और लापता लोगों की तलाश अभी भी चल रही है। भारत-नेपाल के बीच राजनयिक और मानवीय सहयोग इस आपदा में परीक्षण की कसौटी पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में मानसून की तीव्रता बढ़ने से इस तरह की आपदाओं की आवृत्ति भविष्य में और बढ़ सकती है।