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अग्निवीर योजना में भर्ती की मांग: पोखरा में नेपाली युवाओं और पूर्व गोरखा सैनिकों की रैली

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अग्निवीर योजना में भर्ती की मांग: पोखरा में नेपाली युवाओं और पूर्व गोरखा सैनिकों की रैली

सारांश

पोखरा में गोरखा पूर्व सैनिकों और नेपाली युवाओं ने सड़क पर उतरकर अग्निवीर योजना के तहत भर्ती बहाल करने की माँग रखी — यह उस गतिरोध का जमीनी विस्फोट है जो 2019 से जारी है और जिसकी जड़ें 1947 के त्रिपक्षीय समझौते में हैं।

मुख्य बातें

12 अगस्त को पोखरा में इंडियन एक्स-सर्विसमेन गोरखा ब्रिगेड नेपाल के बैनर तले रैली निकाली गई।
भारतीय सेना में गोरखा भर्ती 2019 से बंद है — पहले कोविड, फिर 2022 में अग्निवीर योजना लागू होने के बाद नेपाल ने आधिकारिक रोक लगाई।
अग्निवीर योजना में केवल 25% जवानों को स्थायी नियुक्ति मिलती है; शेष 75% को पेंशन या दीर्घकालिक लाभ के बिना सेवामुक्त किया जाता है।
नेपाल सरकार का तर्क: योजना 1947 के त्रिपक्षीय समझौते (भारत-नेपाल-ब्रिटेन) के अनुरूप नहीं।
प्रदर्शनकारियों ने कास्की जिले के मुख्य जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।

पोखरा (पश्चिमी नेपाल) में बुधवार, 12 अगस्त को इंडियन एक्स-सर्विसमेन गोरखा ब्रिगेड नेपाल के बैनर तले सैकड़ों नेपाली युवाओं और भारतीय सेना के पूर्व गोरखा सैनिकों के परिजनों ने रैली निकाली, जिसमें नेपाल सरकार से माँग की गई कि अग्निवीर योजना के तहत नेपाली युवाओं की भारतीय सेना में भर्ती तत्काल बहाल की जाए। पोखरा स्टेडियम से शुरू होकर जिला प्रशासन कार्यालय तक पहुँची इस रैली के अंत में आयोजकों ने कास्की जिले के मुख्य जिला अधिकारी को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा।

भर्ती रुकने की पृष्ठभूमि

भारतीय सेना में गोरखा भर्ती वर्ष 2019 से बाधित है। शुरुआत में यह रुकावट कोविड-19 महामारी के कारण आई थी। इसके बाद 2022 में भारत सरकार द्वारा अग्निवीर योजना लागू किए जाने पर नेपाल सरकार ने अपने युवाओं की इस योजना के तहत भर्ती पर आधिकारिक रोक लगा दी।

नेपाल सरकार का तर्क है कि अग्निवीर योजना भारत, नेपाल और ब्रिटेन के बीच 1947 में हुए त्रिपक्षीय समझौते के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। समझौते के तहत नेपाली सैनिकों को भारतीय सैनिकों के समकक्ष सेवा शर्तें, पेंशन और दीर्घकालिक लाभ मिलने चाहिए।

अग्निवीर योजना की शर्तें और विवाद

अग्निवीर योजना के तहत भर्ती होने वाले जवानों में से अधिकतम 25 प्रतिशत को ही चार वर्ष की सेवा के बाद स्थायी नियुक्ति मिलती है। शेष 75 प्रतिशत को एकमुश्त राशि देकर सेवामुक्त कर दिया जाता है और उन्हें पेंशन या अन्य दीर्घकालिक सेवा लाभ नहीं मिलते।

यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल में रोज़गार के सीमित अवसरों के कारण लाखों युवा खाड़ी देशों की ओर पलायन करने को विवश हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि खाड़ी देशों में जोखिम भरे हालात में काम करने की तुलना में भारतीय सेना में अग्निवीर के रूप में सेवा करना कहीं बेहतर विकल्प है।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख माँगें

रैली में हाथों में तख्तियाँ लिए प्रदर्शनकारियों ने कई माँगें रखीं। उन्होंने माँग की कि अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया तुरंत बहाल की जाए, क्योंकि यह नेपाली युवाओं के रोज़गार अवसरों की सुरक्षा और गोरखा सैनिकों की पहचान तथा परंपरा को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने यह भी माँग की कि अपने नाम में 'एक्स-सर्विसमेन' शब्द रखने वाले संगठनों के पंजीकरण पर कोई रोक न लगाई जाए। उनका तर्क था कि ऐसे संगठन पूर्व सैनिकों की गरिमा, अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए अपरिहार्य हैं।

रैली में कौन शामिल हुआ

इस प्रदर्शन में पूर्व गोरखा सैनिक, उनके परिवार के सदस्य और विदेशी सेनाओं में भर्ती के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके युवा शामिल हुए। आयोजकों ने सोशल मीडिया पर अपनी माँगें साझा करते हुए सरकार से अपना रुख बदलने का आग्रह किया।

आगे की राह

ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब यह देखना होगा कि नेपाल सरकार इस दबाव पर क्या प्रतिक्रिया देती है। भारत-नेपाल के बीच गोरखा भर्ती का मसला दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों का एक संवेदनशील पहलू रहा है, और यह रैली इस मुद्दे पर जमीनी स्तर पर बढ़ते असंतोष को रेखांकित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ गोरखा सेवा पीढ़ियों की आजीविका का आधार रही है। नेपाल सरकार का 1947 के समझौते का तर्क कानूनी रूप से ठोस हो सकता है, लेकिन वह उन युवाओं को कोई विकल्प नहीं दे रही जो खाड़ी देशों के कठिन हालात में काम करने को मजबूर हैं। असली सवाल यह है कि क्या काठमांडू इस मुद्दे पर नई दिल्ली के साथ सार्थक बातचीत करेगी, या यह गतिरोध और लंबा खिंचेगा — और इसकी कीमत नेपाली युवा चुकाते रहेंगे।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल में अग्निवीर योजना के तहत भर्ती क्यों रुकी हुई है?
नेपाल सरकार ने 2022 में भारत द्वारा अग्निवीर योजना लागू किए जाने के बाद नेपाली युवाओं की भर्ती पर रोक लगा दी। सरकार का तर्क है कि यह योजना 1947 के भारत-नेपाल-ब्रिटेन त्रिपक्षीय समझौते के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है, जो नेपाली सैनिकों को समकक्ष सेवा शर्तें और पेंशन की गारंटी देता है।
अग्निवीर योजना में नेपाली युवाओं को क्या लाभ और क्या नुकसान है?
अग्निवीर योजना के तहत भर्ती होने वाले जवानों में से केवल 25% को चार वर्ष की सेवा के बाद स्थायी नियुक्ति मिलती है। शेष 75% को एकमुश्त राशि देकर सेवामुक्त किया जाता है और उन्हें पेंशन या अन्य दीर्घकालिक लाभ नहीं मिलते, जो पारंपरिक गोरखा भर्ती से बड़ा अंतर है।
पोखरा रैली का आयोजन किसने किया और क्या माँगें रखी गईं?
यह रैली इंडियन एक्स-सर्विसमेन गोरखा ब्रिगेड नेपाल के बैनर तले 12 अगस्त को आयोजित की गई। प्रदर्शनकारियों ने अग्निवीर भर्ती तत्काल बहाल करने और पूर्व सैनिकों के संगठनों के पंजीकरण पर रोक न लगाने की माँग की, और कास्की जिले के मुख्य जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
1947 का त्रिपक्षीय समझौता क्या है और इसका गोरखा भर्ती से क्या संबंध है?
1947 में भारत, नेपाल और ब्रिटेन के बीच हुए इस समझौते के तहत नेपाली गोरखा सैनिकों को भारतीय सैनिकों के समकक्ष सेवा शर्तें, पेंशन और लाभ मिलने का प्रावधान है। नेपाल का कहना है कि अग्निवीर योजना इन प्रावधानों को पूरा नहीं करती, इसलिए भर्ती की अनुमति नहीं दी जा सकती।
गोरखा भर्ती कब से बंद है और इसका नेपाली युवाओं पर क्या असर पड़ा है?
भारतीय सेना में गोरखा भर्ती 2019 से रुकी हुई है — पहले कोविड-19 महामारी के कारण, फिर 2022 में अग्निवीर योजना लागू होने के बाद नेपाल सरकार की रोक के कारण। इससे रोज़गार के सीमित अवसरों वाले नेपाल में युवा खाड़ी देशों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
राष्ट्र प्रेस
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