नेपाल आपदा: उत्तराखंड के 14.5 लाख गोरखा समुदाय ने जताया शोक, गोरखाली सुधार सभा की 46 ब्रांच अलर्ट पर
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद उत्तराखंड में बसे गोरखा समुदाय ने गहरा दुख और एकजुटता व्यक्त की है। गोरखाली सुधार सभा के अध्यक्ष पदम सिंह थापा ने 27 अगस्त को देहरादून में कहा कि भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराना 'बेटी-रोटी' का रिश्ता है, इसलिए यह पीड़ा दोनों देशों की साझा है। संस्था की उत्तराखंड में 46 शाखाएँ हैं और सभी को राहत कार्य के लिए अलर्ट पर रखा गया है।
मुख्य घटनाक्रम
नेपाल में आई इस त्रासदी की खबर फैलते ही गोरखाली सुधार सभा सक्रिय हो गई। अध्यक्ष पदम सिंह थापा के अनुसार, उन्हें ऋषिकेश शाखा की अध्यक्ष माया का फोन आया, जिन्होंने बताया कि अधिकांश प्रभावित क्षेत्र नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट रसुवा इलाके में हैं। भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों के आसपास के गाँव बुरी तरह प्रभावित बताए जा रहे हैं।
थापा ने कहा, 'जैसे ही इस आपदा की खबर आई, सभी को — यहाँ तक कि उन लोगों को भी जिनका नेपाल से कोई सीधा संबंध नहीं है — बहुत दुख हुआ कि ऐसी त्रासदी एक ऐसे पड़ोसी देश में आई है, जिसके साथ हमारे इतने नजदीकी संबंध हैं।'
बेटी-रोटी के रिश्ते की गहराई
थापा ने भारत-नेपाल के पारिवारिक संबंधों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'नेपाल और उत्तराखंड के बीच गहरे बेटी-रोटी के संबंध को देखते हुए, जाहिर है, जिन परिवारों की बेटियों की शादी वहाँ हुई है या जिनकी बेटियाँ नेपाल से यहाँ बहू बनकर आई हैं, वे बहुत परेशान और चिंतित हैं।'
यह ऐसे समय में और भी संवेदनशील हो जाता है जब उत्तराखंड में करीब 14.5 लाख गोरखा निवास करते हैं, जिनमें से अकेले देहरादून में लगभग 4.5 लाख हैं। कई गोरखा परिवार तीर्थ यात्रा के लिए नेपाल जाते रहते हैं और वहाँ उनके रिश्तेदार भी हो सकते हैं।
2016 की त्रासदी का अनुभव और इस बार की तैयारी
गोरखाली सुधार सभा की स्थापना 1938 में हुई थी और यह उत्तराखंड के सबसे बड़े गोरखा संगठनों में से एक है। 2016 में नेपाल में आई त्रासदी के दौरान सभा ने राहत सामग्री के 10 ट्रक भेजे थे, जिसमें समुदाय के हर तबके ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की थी।
थापा ने बताया, 'जब 2016 में नेपाल में एक दुखद घटना हुई, तो गोरखाली सुधार सभा ने मदद का इंतजाम किया, जिसमें कम्युनिटी के हर तबके के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यहाँ से राहत सामग्री के दस ट्रक भेजे गए।' इस बार भी सभी 46 शाखाओं के अध्यक्षों से लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है।
समुदाय से अपील
अध्यक्ष पदम सिंह थापा ने उत्तराखंड की समस्त गोरखा कम्युनिटी से आगे आने की अपील की है। उन्होंने कहा, 'हम चाहते हैं कि उत्तराखंड में सभी गोरखा कम्युनिटी आगे आएँ। हम इन मुश्किल हालात में नेपाल की मदद करना चाहते हैं।' गौरतलब है कि नेपाल ने पिछले कुछ वर्षों में एकाधिक प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है, जिनमें भूकंप भी शामिल हैं।
राहत सामग्री एकत्र करने और उसे नेपाल भेजने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। सभा के अनुसार, आने वाले दिनों में सहायता अभियान की विस्तृत जानकारी सभी शाखाओं को दी जाएगी।