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नेपाल आपदा: उत्तराखंड के 14.5 लाख गोरखा समुदाय ने जताया शोक, गोरखाली सुधार सभा की 46 ब्रांच अलर्ट पर

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नेपाल आपदा: उत्तराखंड के 14.5 लाख गोरखा समुदाय ने जताया शोक, गोरखाली सुधार सभा की 46 ब्रांच अलर्ट पर

सारांश

नेपाल में आई आपदा ने उत्तराखंड के 14.5 लाख गोरखा समुदाय को भीतर तक हिला दिया है। 1938 में स्थापित गोरखाली सुधार सभा ने अपनी सभी 46 शाखाओं को अलर्ट पर रखा है — ठीक वैसे ही जैसे 2016 में 10 ट्रक राहत सामग्री भेजी थी। बेटी-रोटी के रिश्ते की यह परीक्षा की घड़ी है।

मुख्य बातें

गोरखाली सुधार सभा के अध्यक्ष पदम सिंह थापा ने 27 अगस्त को नेपाल आपदा पर गहरा दुख जताया और राहत की तैयारी की घोषणा की।
संस्था की उत्तराखंड में 46 शाखाएँ हैं, सभी को राहत कार्य के लिए अलर्ट पर रखा गया है।
2016 की नेपाल त्रासदी में सभा ने राहत सामग्री के 10 ट्रक भेजे थे।
उत्तराखंड में करीब 14.5 लाख गोरखा निवास करते हैं, जिनमें देहरादून में लगभग 4.5 लाख हैं।
सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र रसुवा जिले में भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों के आसपास बताए जा रहे हैं।
गोरखाली सुधार सभा की स्थापना 1938 में हुई थी और यह उत्तराखंड के सबसे बड़े गोरखा संगठनों में से एक है।

नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद उत्तराखंड में बसे गोरखा समुदाय ने गहरा दुख और एकजुटता व्यक्त की है। गोरखाली सुधार सभा के अध्यक्ष पदम सिंह थापा ने 27 अगस्त को देहरादून में कहा कि भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराना 'बेटी-रोटी' का रिश्ता है, इसलिए यह पीड़ा दोनों देशों की साझा है। संस्था की उत्तराखंड में 46 शाखाएँ हैं और सभी को राहत कार्य के लिए अलर्ट पर रखा गया है।

मुख्य घटनाक्रम

नेपाल में आई इस त्रासदी की खबर फैलते ही गोरखाली सुधार सभा सक्रिय हो गई। अध्यक्ष पदम सिंह थापा के अनुसार, उन्हें ऋषिकेश शाखा की अध्यक्ष माया का फोन आया, जिन्होंने बताया कि अधिकांश प्रभावित क्षेत्र नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट रसुवा इलाके में हैं। भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों के आसपास के गाँव बुरी तरह प्रभावित बताए जा रहे हैं।

थापा ने कहा, 'जैसे ही इस आपदा की खबर आई, सभी को — यहाँ तक कि उन लोगों को भी जिनका नेपाल से कोई सीधा संबंध नहीं है — बहुत दुख हुआ कि ऐसी त्रासदी एक ऐसे पड़ोसी देश में आई है, जिसके साथ हमारे इतने नजदीकी संबंध हैं।'

बेटी-रोटी के रिश्ते की गहराई

थापा ने भारत-नेपाल के पारिवारिक संबंधों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'नेपाल और उत्तराखंड के बीच गहरे बेटी-रोटी के संबंध को देखते हुए, जाहिर है, जिन परिवारों की बेटियों की शादी वहाँ हुई है या जिनकी बेटियाँ नेपाल से यहाँ बहू बनकर आई हैं, वे बहुत परेशान और चिंतित हैं।'

यह ऐसे समय में और भी संवेदनशील हो जाता है जब उत्तराखंड में करीब 14.5 लाख गोरखा निवास करते हैं, जिनमें से अकेले देहरादून में लगभग 4.5 लाख हैं। कई गोरखा परिवार तीर्थ यात्रा के लिए नेपाल जाते रहते हैं और वहाँ उनके रिश्तेदार भी हो सकते हैं।

2016 की त्रासदी का अनुभव और इस बार की तैयारी

गोरखाली सुधार सभा की स्थापना 1938 में हुई थी और यह उत्तराखंड के सबसे बड़े गोरखा संगठनों में से एक है। 2016 में नेपाल में आई त्रासदी के दौरान सभा ने राहत सामग्री के 10 ट्रक भेजे थे, जिसमें समुदाय के हर तबके ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की थी।

थापा ने बताया, 'जब 2016 में नेपाल में एक दुखद घटना हुई, तो गोरखाली सुधार सभा ने मदद का इंतजाम किया, जिसमें कम्युनिटी के हर तबके के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यहाँ से राहत सामग्री के दस ट्रक भेजे गए।' इस बार भी सभी 46 शाखाओं के अध्यक्षों से लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है।

समुदाय से अपील

अध्यक्ष पदम सिंह थापा ने उत्तराखंड की समस्त गोरखा कम्युनिटी से आगे आने की अपील की है। उन्होंने कहा, 'हम चाहते हैं कि उत्तराखंड में सभी गोरखा कम्युनिटी आगे आएँ। हम इन मुश्किल हालात में नेपाल की मदद करना चाहते हैं।' गौरतलब है कि नेपाल ने पिछले कुछ वर्षों में एकाधिक प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है, जिनमें भूकंप भी शामिल हैं।

राहत सामग्री एकत्र करने और उसे नेपाल भेजने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। सभा के अनुसार, आने वाले दिनों में सहायता अभियान की विस्तृत जानकारी सभी शाखाओं को दी जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि देहरादून की गलियों में बसे परिवारों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में जीते हैं। गोरखाली सुधार सभा जैसे संगठनों की सक्रियता यह भी दर्शाती है कि सरकारी राहत तंत्र से पहले सामुदायिक नेटवर्क ज़मीन पर काम शुरू कर देते हैं। हालाँकि, 2016 के अनुभव के बाद भी राहत सामग्री के वितरण और पारदर्शिता का कोई स्थायी ढाँचा नहीं बना — यह सवाल इस बार भी प्रासंगिक है। सीमापार आपदा सहयोग को संस्थागत रूप देना दोनों देशों की साझा ज़िम्मेदारी है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल आपदा में सबसे ज़्यादा प्रभावित क्षेत्र कौन से हैं?
रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट रसुवा जिले में भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों के आसपास के गाँव सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। गोरखाली सुधार सभा की ऋषिकेश शाखा की अध्यक्ष माया ने यह जानकारी साझा की।
गोरखाली सुधार सभा क्या है और यह नेपाल की मदद कैसे करेगी?
गोरखाली सुधार सभा 1938 में स्थापित उत्तराखंड का एक प्रमुख गोरखा सामाजिक संगठन है, जिसकी राज्य में 46 शाखाएँ हैं। सभा ने 2016 की नेपाल त्रासदी में 10 ट्रक राहत सामग्री भेजी थी और इस बार भी सभी शाखाओं को अलर्ट कर राहत अभियान की तैयारी शुरू कर दी है।
उत्तराखंड में कितने गोरखा रहते हैं और नेपाल से उनका क्या संबंध है?
पदम सिंह थापा के अनुसार उत्तराखंड में लगभग 14.5 लाख गोरखा निवास करते हैं, जिनमें अकेले देहरादून में करीब 4.5 लाख हैं। इन परिवारों के नेपाल में वैवाहिक और पारिवारिक संबंध हैं, जिसे 'बेटी-रोटी का रिश्ता' कहा जाता है।
2016 की नेपाल त्रासदी में गोरखाली सुधार सभा ने क्या किया था?
2016 में नेपाल में आई त्रासदी के दौरान गोरखाली सुधार सभा ने समुदाय के सभी तबकों से राहत सामग्री एकत्र कर 10 ट्रक नेपाल भेजे थे। इस अभियान में समुदाय के लोगों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की थी।
भारत-नेपाल के बीच 'बेटी-रोटी के रिश्ते' का क्या अर्थ है?
यह पारंपरिक भारतीय-नेपाली सांस्कृतिक अभिव्यक्ति है जो दोनों देशों के बीच सदियों पुराने वैवाहिक और पारिवारिक संबंधों को दर्शाती है। इसका अर्थ है कि दोनों देशों के परिवारों ने एक-दूसरे की बेटियाँ ब्याही हैं और एक-दूसरे के घर में रोटी साझा की है — यह रिश्ता राजनीतिक सीमाओं से परे है।
राष्ट्र प्रेस
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