27 अगस्त 2026
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नेपाल बाढ़: गोरखाली सुधार सभा प्रमुख पदम थापा ने किया राहत सहायता का ऐलान, उत्तराखंड की 46 शाखाएं तैयार

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नेपाल बाढ़: गोरखाली सुधार सभा प्रमुख पदम थापा ने किया राहत सहायता का ऐलान, उत्तराखंड की 46 शाखाएं तैयार

सारांश

नेपाल में भीषण बाढ़ के बीच गोरखाली सुधार सभा के प्रमुख पदम थापा ने उत्तराखंड की 46 शाखाओं को सक्रिय किया है। रसुवा क्षेत्र और भोटे कोशी-त्रिशूली नदी के किनारे के गाँव सर्वाधिक प्रभावित हैं। संगठन वित्तीय सहायता, राहत सामग्री और दवाइयाँ भेजने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

गोरखाली सुधार सभा के अध्यक्ष पदम थापा ने 27 अगस्त को नेपाल बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सहायता भेजने का ऐलान किया।
संगठन की उत्तराखंड में 46 शाखाएं हैं, जिन्हें अपने स्तर पर तैयार रहने का निर्देश दिया गया है।
ऋषिकेश शाखा अध्यक्ष माया खड़का के अनुसार रसुवा क्षेत्र और भोटे कोशी-त्रिशूली नदी के किनारे के गाँव सर्वाधिक प्रभावित हैं।
थापा ने उत्तराखंड व दिल्ली सरकारों से भारत में पढ़ रहे नेपाली छात्रों के लिए विशेष दिशानिर्देश जारी करने की अपील की।
कार्यकारी समिति की बैठक के बाद वित्तीय सहायता, राहत सामग्री और दवाइयाँ भेजने की औपचारिक घोषणा होगी।

गोरखाली सुधार सभा के अध्यक्ष पदम थापा ने 27 अगस्त को देहरादून में कहा कि उनका संगठन नेपाल में भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों को वित्तीय सहायता, राहत सामग्री और दवाइयाँ भेजने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति गहरा शोक व्यक्त किया और कहा कि यह त्रासदी नेपाल से प्रत्यक्ष संबंध न रखने वालों को भी गहराई से आहत कर रही है।

उत्तराखंड-नेपाल का 'बेटी-रोटी' का रिश्ता

थापा ने कहा कि उत्तराखंड और नेपाल के बीच सदियों पुराना 'बेटी-रोटी' का रिश्ता है — जिन परिवारों की बेटियाँ नेपाल में ब्याही हैं या नेपाल से बहुएं आई हैं, वे इस आपदा से विशेष रूप से चिंतित और व्याकुल हैं। उन्होंने इस पारिवारिक जुड़ाव को ही राहत अभियान की प्रेरणा बताया।

मुख्य घटनाक्रम: रसुवा क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित

थापा ने बताया कि गोरखाली सुधार सभा की उत्तराखंड में 46 शाखाएं हैं और वे प्रत्येक शाखा अध्यक्ष के साथ निरंतर संपर्क में हैं। उन्होंने बताया कि ऋषिकेश शाखा की अध्यक्ष माया खड़का ने उन्हें फोन पर जानकारी दी कि अधिकतर प्रभावित लोग नेपाल-तिब्बत सीमा से लगे रसुवा क्षेत्र में हैं। भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे बसे गाँव बुरी तरह तबाह हो चुके हैं।

थापा ने यह भी बताया कि वहाँ से आ रही खबरों के अनुसार एक के बाद एक शव बरामद किए जा रहे हैं, जो इस आपदा की भयावहता को दर्शाता है।

राहत अभियान की तैयारी

थापा ने कहा कि संगठन और शाखाओं की कार्यकारी समिति की बैठक के बाद जो भी संभव होगा — वित्तीय सहायता, राहत सामग्री और दवाइयाँ — प्रभावित लोगों तक पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने सभी शाखाओं को अपने स्तर पर तैयार रहने का निर्देश दिया है।

गौरतलब है कि भारत से गोरखा समुदाय के अनेक सदस्य कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रा पर भी जाते हैं, जिससे नेपाल से उनका सीधा जुड़ाव है। यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।

सरकार से अपील: नेपाली छात्रों के लिए दिशानिर्देश जारी हों

थापा ने उत्तराखंड और दिल्ली सरकारों से अपील की कि भारत में उच्च शिक्षा के लिए आए नेपाली छात्रों के लिए विशेष दिशानिर्देश जारी किए जाएं, ताकि वे घबराहट में तुरंत अपने गृहनगर लौटने का निर्णय न लें। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए जिससे जो छात्र और परिवार नेपाल में अपने रिश्तेदारों से मिलना चाहते हैं, वे उचित समय पर ऐसा कर सकें।

आने वाले दिनों में संगठन की बैठक के बाद राहत सहायता की औपचारिक घोषणा की जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — 46 शाखाओं के ज़रिए सीमा पार राहत पहुँचाना संगठनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण काम है। नेपाली छात्रों के लिए दिशानिर्देशों की माँग एक व्यावहारिक और ज़रूरी कदम है जिसे सरकारें अक्सर आपदा के शोर में नज़रअंदाज़ कर देती हैं। उत्तराखंड-नेपाल का 'बेटी-रोटी' का रिश्ता इस संकट को महज़ पड़ोसी देश की समस्या नहीं रहने देता — यह हज़ारों भारतीय परिवारों का निजी दर्द भी है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोरखाली सुधार सभा नेपाल बाढ़ पीड़ितों की कैसे मदद करेगी?
गोरखाली सुधार सभा उत्तराखंड में अपनी 46 शाखाओं के ज़रिए वित्तीय सहायता, राहत सामग्री और दवाइयाँ नेपाल के प्रभावित क्षेत्रों में भेजने की तैयारी में है। कार्यकारी समिति की बैठक के बाद औपचारिक राहत अभियान की घोषणा की जाएगी।
नेपाल बाढ़ में कौन-से क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हैं?
ऋषिकेश शाखा अध्यक्ष माया खड़का के अनुसार नेपाल-तिब्बत सीमा से लगा रसुवा क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित है। भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे बसे गाँव बुरी तरह तबाह हो चुके हैं।
पदम थापा ने सरकार से क्या माँग की है?
पदम थापा ने उत्तराखंड और दिल्ली सरकारों से अपील की है कि भारत में उच्च शिक्षा के लिए आए नेपाली छात्रों के लिए विशेष दिशानिर्देश जारी किए जाएं, ताकि वे घबराहट में तुरंत घर न लौटें और उचित समय पर अपने परिजनों से मिल सकें।
उत्तराखंड और नेपाल के बीच किस तरह का रिश्ता है?
उत्तराखंड और नेपाल के बीच 'बेटी-रोटी' का पारंपरिक रिश्ता है — कई परिवारों की बेटियाँ नेपाल में ब्याही हैं और नेपाल से बहुएं उत्तराखंड आई हैं। इस कारण नेपाल की बाढ़ आपदा हज़ारों भारतीय परिवारों के लिए भी व्यक्तिगत चिंता का विषय बन गई है।
गोरखाली सुधार सभा क्या है और इसकी कितनी शाखाएं हैं?
गोरखाली सुधार सभा एक सामाजिक संगठन है जो मुख्यतः गोरखा समुदाय के हितों के लिए कार्य करता है। इसकी उत्तराखंड में 46 शाखाएं हैं और इसके अध्यक्ष पदम थापा देहरादून से संगठन का नेतृत्व करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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