फिल्म 'फौजी' पर नेताजी के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस का हमला, हिटलर-मुलाकात गलत दिखाने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने 25 अक्टूबर 2026 को आगामी पीरियड वॉर-एक्शन फिल्म 'फौजी' के निर्देशक हनु राघवपुड़ी की तीखी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि फिल्म में नेताजी और एडोल्फ हिटलर की ऐतिहासिक मुलाकात को सनसनीखेज और भ्रामक तरीके से पेश किया गया है। उन्होंने निर्देशक से देश की जनता और स्वतंत्रता संग्राम का सम्मान करने वाले सभी लोगों से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की।
विवाद की जड़ क्या है
फिल्म के ट्रेलर में कथित तौर पर अभिनेता प्रभास द्वारा निभाए गए एक काल्पनिक किरदार को नेताजी द्वारा हिटलर से परिचय कराते हुए दिखाया गया है। आलोचकों का कहना है कि इस दृश्य में काल्पनिक पात्र को अत्यधिक महत्व दिया गया है और नेताजी की ऐतिहासिक भूमिका को कमतर आँका गया है। चंद्र कुमार बोस ने कहा कि यह प्रस्तुति न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत है, बल्कि नेताजी के महान व्यक्तित्व की गरिमा को ठेस पहुँचाती है।
नेताजी और हिटलर की मुलाकात का ऐतिहासिक संदर्भ
चंद्र कुमार बोस ने स्पष्ट किया कि नेताजी जर्मनी में हिटलर से भारत की स्वतंत्रता के लिए समर्थन हासिल करने के उद्देश्य से मिले थे। उनके अनुसार, नेताजी का मानना था कि उस समय जर्मनी के हिटलर और जापान के हिदेकी तोजो भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को सहयोग दे सकते थे।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नेताजी ने हिटलर के साथ कभी अधीनस्थ की तरह व्यवहार नहीं किया, बल्कि बराबरी के स्तर पर बातचीत की। उनके दावे के अनुसार, हिटलर ने नेताजी की देशभक्ति को स्वीकार किया था और उन्हें समर्थन देने पर सहमति जताई थी — जिसमें वह पनडुब्बी भी शामिल थी जिसके ज़रिए नेताजी दक्षिण-पूर्व एशिया पहुँचे थे।
गौरतलब है कि चंद्र कुमार बोस ने यह भी कहा कि हिटलर की आत्मकथा 'मीन कैम्फ' में भारत को लेकर व्यक्त विचार यह दिखाते हैं कि उसे भारत के इतिहास, विरासत और संस्कृति की पर्याप्त समझ नहीं थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेताजी फासीवाद के कट्टर विरोधी थे और लोकतंत्र तथा लोकतांत्रिक अधिकारों में गहरा विश्वास रखते थे।
रचनात्मक स्वतंत्रता बनाम ऐतिहासिक जिम्मेदारी
चंद्र कुमार बोस ने कहा कि फिल्मकारों को भारत के स्वतंत्रता संग्राम और उसके नायकों को पर्दे पर दिखाने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ स्वीकार्य नहीं है।
उनके शब्दों में, 'राष्ट्रीय नायकों से जुड़े तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना और कल्पना का सहारा लेना मेरे हिसाब से एक अपराध है।' यह ऐसे समय में आया है जब ऐतिहासिक शख्सियतों पर बनी फिल्मों को लेकर देश में संवेदनशीलता पहले से बढ़ी हुई है और कई फिल्में विवादों के घेरे में आ चुकी हैं।
माफी की मांग और आगे की राह
चंद्र कुमार बोस ने निर्देशक हनु राघवपुड़ी से मांग की है कि वे 'भारत की जनता और उन सभी लोगों से माफी मांगें जो देश के स्वतंत्रता संग्राम का सम्मान करते हैं।' यह पहली बार नहीं है जब बोस परिवार के सदस्यों ने नेताजी के चित्रण पर आपत्ति जताई हो — परिवार वर्षों से उनकी विरासत की सटीक प्रस्तुति को लेकर मुखर रहा है।
फिल्म 'फौजी' का निर्देशन और लेखन हनु राघवपुड़ी ने किया है। फिल्म की रिलीज़ को लेकर अभी तक निर्देशक या निर्माताओं की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह देखना होगा कि क्या फिल्म निर्माता इस विवाद के बाद संबंधित दृश्यों में कोई बदलाव करते हैं या अपना पक्ष सार्वजनिक करते हैं।