नोएडा में 13 साइबर ठग गिरफ्तार, अमेरिका-यूरोप के नागरिकों से ₹10 करोड़ की एयरलाइन टिकट धोखाधड़ी
सारांश
मुख्य बातें
नोएडा के सेक्टर-63 थाना पुलिस ने 13 जून 2025 को एक संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 13 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया, जो फर्जी एयरलाइन टिकट बुकिंग के नाम पर अमेरिका और यूरोप के नागरिकों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी कर रहे थे। गौतमबुद्ध नगर पुलिस के अनुसार, फॉरेंसिक जाँच में इस गिरोह से जुड़े लगभग 10.50 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब ₹10 करोड़) के संदिग्ध लेनदेन के साक्ष्य बरामद हुए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी शनिवार को तकनीकी अभिसूचना और स्थानीय खुफिया जानकारी के आधार पर की गई। आरोपियों के कब्जे से 13 लैपटॉप, 16 मोबाइल फोन, 1 राउटर, 10 माइक-हेडफोन और कूटरचित दस्तावेज बरामद किए गए। ये सभी उपकरण साइबर ठगी के सक्रिय संचालन में इस्तेमाल किए जा रहे थे।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी के मामलों में तेज़ी से वृद्धि दर्ज की जा रही है और केंद्र सरकार ने साइबर अपराध पर नकेल कसने के लिए राज्य पुलिस बलों को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
ठगी का तरीका
जाँच में सामने आया कि आरोपी गूगल एड्स और फेसबुक पर ट्रैवल व एयरलाइन टिकट बुकिंग सपोर्ट के नाम पर पेड विज्ञापन चलाते थे। जैसे ही विदेशी नागरिक विज्ञापन में दिए गए नंबरों पर संपर्क करते, कॉल सीधे आरोपियों के लैपटॉप पर संचालित डायलर सॉफ्टवेयर पर पहुँचती थी।
आरोपी खुद को प्रतिष्ठित एयरलाइंस या ट्रैवल एजेंसियों का प्रतिनिधि बताकर कम कीमत में हवाई टिकट दिलाने का झाँसा देते थे। पीड़ितों से अंतरराष्ट्रीय पेमेंट गेटवे के माध्यम से डॉलर में भुगतान लिया जाता था। कई मामलों में फर्जी टिकट भेजे जाते, जबकि कुछ मामलों में टिकट जारी ही नहीं किए जाते थे।
गौरतलब है कि अधिकांश टिकट कई महीनों बाद की यात्रा के लिए बुक किए जाते थे, जिससे पीड़ितों को धोखाधड़ी का पता काफी देर से चलता था। इस बीच आरोपी अपने मोबाइल नंबर, डिजिटल सिस्टम और अन्य तकनीकी माध्यम बदल लेते थे — जो एक सुनियोजित और पेशेवर ऑपरेशन की ओर संकेत करता है।
आरोपियों की प्रोफाइल
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार सभी आरोपी उच्च शिक्षित हैं और अमेरिकी व यूरोपीय लहजे में धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलकर विदेशी नागरिकों का विश्वास जीत लेते थे। यह इस गिरोह को आम साइबर ठगों से अलग करता है — ये प्रशिक्षित और संगठित अपराधी थे, न कि मौकापरस्त ठग।
फॉरेंसिक जाँच में बरामद डेटा से विदेशी पीड़ितों की बड़ी संख्या का खुलासा हुआ है। पुलिस अब गिरोह के वित्तीय नेटवर्क, बैंक खातों और अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी है।
आगे की जाँच
गौतमबुद्ध नगर पुलिस इस मामले को अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी का संगठित नेटवर्क मानते हुए आगे की जाँच कर रही है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि गिरोह के और सदस्य हो सकते हैं जो अभी फरार हैं। इस कार्रवाई को नोएडा पुलिस की साइबर अपराध के विरुद्ध एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है और यह भविष्य में ऐसे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के खिलाफ अभियान की दिशा तय कर सकती है।