नोय्याल नदी में बह रहा अनुपचारित सीवेज, कोयंबटूर की 9 नगर पंचायतें दोषी; STP प्रोजेक्ट DPR चरण में अटका
सारांश
मुख्य बातें
कोयंबटूर की नोय्याल नदी में अनुपचारित सीवेज का प्रवाह जारी है, क्योंकि 2024 में स्वीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) परियोजना अभी तक 'डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट' के चरण से आगे नहीं बढ़ पाई है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल रिवर कंजर्वेशन डायरेक्टरेट (NRCD) से मंजूरी मिलने के करीब दो साल बाद भी जिले की 9 नगर पंचायतें बिना ट्रीट किया हुआ गंदा पानी सीधे नदी में बहा रही हैं।
कौन-सी नगर पंचायतें हैं जिम्मेदार
इरुगुर, सुलूर, कन्नमपलयम, वेल्लालोर, पेरूर, पूलुवापट्टी, वीरपांडी, अलंदुरई और थोंडामुथुर — ये नौ स्थानीय निकाय नोय्याल नदी में सीवेज प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं। इन निकायों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को नदी में पहुँचने से पहले एकत्र कर उसका उपचार करना ही प्रस्तावित STP परियोजना का मूल उद्देश्य था।
यह परियोजना 'नदंथई वाझी कावेरी' योजना के तहत स्वीकृत की गई थी, जिसका लक्ष्य कावेरी नदी तंत्र की सहायक नदियों की जल गुणवत्ता में सुधार करना है। गौरतलब है कि नोय्याल नदी पश्चिमी घाट से निकलकर कोयंबटूर, तिरुप्पुर, इरोड और करूर जिलों से होते हुए लगभग 158.35 किलोमीटर की यात्रा तय करने के बाद कावेरी में मिलती है।
नदी का महत्व और पर्यावरणीय संकट
नोय्याल नदी का लगभग 62.21 किलोमीटर हिस्सा कोयंबटूर जिले से गुजरता है, जहाँ इसके जल तंत्र में 17 बाँध और 25 तालाब शामिल हैं। यह नदी इस क्षेत्र की कृषि और भूजल पुनर्भरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अनुपचारित सीवेज के लगातार प्रवाह से न केवल नदी का जल प्रदूषित हो रहा है, बल्कि नदी तटवर्ती क्षेत्रों में भूजल भी दूषित होता जा रहा है। यह ऐसे समय में और गंभीर हो जाता है जब तमिलनाडु के कई जिले पहले से ही जल संकट का सामना कर रहे हैं।
किसानों की पीड़ा और ज़मीनी हकीकत
नोय्याल के किनारे खेती करने वाले किसानों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। एक किसान और गैर-राजनीतिक किसान संघ के सदस्य राजन अरुणाचलम ने कहा कि शुरुआती घोषणा के बाद STP निर्माण कार्य में लगभग कोई प्रगति नहीं हुई है।
उन्होंने कहा, "स्थानीय निकायों से बिना ट्रीट किया हुआ गंदा पानी लगातार नदी में जा रहा है, जिससे भूजल प्रदूषित हो रहा है और नोय्याल के किनारे के इलाकों में खेती करना मुश्किल होता जा रहा है।" किसानों के अनुसार, सिंचाई के लिए दूषित जल के उपयोग से फसल उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
फंडिंग व्यवस्था और प्रशासनिक स्थिति
स्वीकृत वित्तपोषण ढाँचे के अनुसार, परियोजना की कुल लागत का 60 प्रतिशत केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 40 प्रतिशत तमिलनाडु सरकार की जिम्मेदारी होगी। हालाँकि, अभी तक परियोजना के क्रियान्वयन की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
कोयंबटूर के जिला कलेक्टर पवनकुमार जी. गिरियप्पनावर ने बताया कि नोय्याल नदी के किनारे स्थित अन्य स्थानीय निकायों को भी इस परियोजना के दायरे में शामिल करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परियोजना अभी DPR (Detailed Project Report) चरण में है और आवश्यक प्रक्रियाएँ पूरी होने के बाद इसे लागू किया जाएगा।
आगे क्या होगा
DPR चरण से परियोजना के आगे बढ़ने की समयसीमा अभी तक स्पष्ट नहीं की गई है। पर्यावरण विशेषज्ञों और किसान संगठनों की माँग है कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर तेज करें, ताकि नोय्याल नदी और उसके जल तंत्र को और नुकसान से बचाया जा सके। यह देखना होगा कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति इस बार घोषणाओं से आगे जाकर ज़मीन पर परिणाम दे पाती है या नहीं।