ओडिशा कैबिनेट ने 10 अहम प्रस्तावों को दी मंजूरी: मत्स्य, ऊर्जा और 358 पुराने कानून होंगे निरस्त

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ओडिशा कैबिनेट ने 10 अहम प्रस्तावों को दी मंजूरी: मत्स्य, ऊर्जा और 358 पुराने कानून होंगे निरस्त

सारांश

ओडिशा कैबिनेट ने एक ही बैठक में तीन बड़े मोर्चों पर कदम उठाए — 44 साल पुराना समुद्री मत्स्य कानून बदला, पाँच दशकों के 358 अप्रासंगिक कानून खत्म होंगे, और थर्मल पावर में निजी निवेशकों का बोझ घटाया। ₹25,000 करोड़ के समुद्री निर्यात लक्ष्य के साथ यह 'विकसित ओडिशा' की दिशा में ठोस नीतिगत बदलाव है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में 20 मई 2026 को ओडिशा कैबिनेट ने 7 विभागों के 10 प्रस्तावों को मंजूरी दी।
OMFRA-2026 विधेयक 1982 के पुराने समुद्री मत्स्य कानून की जगह लेगा; समुद्री शैवाल, मैरीकल्चर और तटीय सुरक्षा को पहली बार कानूनी दायरे में लाया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य 2036 तक समुद्री खाद्य निर्यात ₹25,000 करोड़ तक पहुँचाना है।
ओडिशा रिपीलिंग बिल-2026 के ज़रिए 1974 से 2025 के बीच के 358 पुराने कानून निरस्त किए जाएँगे।
थर्मल पावर नीति में संशोधन से IPP का अनिवार्य बिजली हिस्सा 12-14% से घटाकर 5% किया जाएगा।

ओडिशा कैबिनेट ने बुधवार, 20 मई 2026 को भुवनेश्वर में हुई बैठक में कानून, ऊर्जा तथा मत्स्य एवं पशु संसाधन विकास विभाग सहित सात विभागों से जुड़े 10 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में समुद्री मत्स्य पालन, पुराने कानूनों के निरसन और थर्मल पावर नीति में बड़े बदलावों को हरी झंडी दी गई।

मत्स्य क्षेत्र में आधुनिक कानूनी ढाँचा

कैबिनेट ने ओडिशा मरीन फिशिंग (प्रतिबंध एवं विनियमन) विधेयक, 2026 (OMFRA-2026) को मंजूरी दी, जो वर्ष 1982 के पुराने ओडिशा मरीन फिशिंग रेगुलेशन एक्ट की जगह लेगा। मुख्य सचिव अनु गर्ग ने बताया कि नए कानून के तहत समुद्री संसाधनों के संरक्षण, तटीय सुरक्षा, समुद्री शैवाल विकास और मैरीकल्चर पर विशेष ध्यान दिया जाएगा — ये पहलू पूर्व कानून में शामिल नहीं थे।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने बजट में डीप सी फिशिंग मिशन और झींगा निर्यात मिशन की घोषणा की थी, जिसके मद्देनज़र यह नया कानून लाना आवश्यक था। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2036 तक समुद्री खाद्य निर्यात को ₹25,000 करोड़ तक पहुँचाना है, जो 'विकसित ओडिशा विजन 2036-47' और राज्य की ब्लू इकोनॉमी पहल के अनुरूप है।

358 पुराने कानूनों का होगा निरसन

कैबिनेट ने कानून विभाग के उस प्रस्ताव को भी मंजूरी दी, जिसके तहत वर्ष 1974 से 2025 के बीच बनाए गए 358 पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त किया जाएगा। सरकारी बयान के अनुसार, इनमें से अधिकांश संशोधन अधिनियम थे जिनके प्रावधान पहले ही मूल कानूनों में समाहित हो चुके हैं, जबकि कुछ विशेष परिस्थितियों के लिए बनाए गए थे और अब अप्रासंगिक हो चुके हैं।

ओडिशा राज्य विधि आयोग की सिफारिशों के आधार पर राज्य सरकार अब ओडिशा रिपीलिंग बिल-2026 लाएगी, जिसके ज़रिए इन सभी कानूनों को औपचारिक रूप से निरस्त किया जाएगा। यह कदम राज्य की विधायी संहिता को सुव्यवस्थित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार माना जा रहा है।

ऊर्जा क्षेत्र में थर्मल पावर नीति में बदलाव

कैबिनेट ने ओडिशा थर्मल पावर पॉलिसी-2008 में संशोधन के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी। इसके तहत स्वतंत्र बिजली उत्पादकों (IPP) द्वारा सरकार को अनिवार्य रूप से दिए जाने वाले बिजली हिस्से को 12-14 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया जाएगा। यह निर्णय केंद्र सरकार की सिफारिशों और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों की व्यवस्था के अनुरूप लिया गया है।

यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब राज्य निजी बिजली निवेश को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, अनिवार्य हिस्से में कमी से IPP के लिए ओडिशा में निवेश अधिक व्यावसायिक रूप से आकर्षक बन सकता है।

आगे की राह

इन सुधारों के क्रियान्वयन के लिए संबंधित विधेयक विधानसभा में पेश किए जाएँगे। मत्स्य और ऊर्जा क्षेत्र में ये बदलाव ओडिशा की आर्थिक विकास रणनीति के केंद्र में हैं, और राज्य सरकार इन्हें 'विकसित ओडिशा' के दृष्टिकोण का अहम हिस्सा मानती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुसंगत नीतिगत दिशा के संकेत हैं — समुद्री अर्थव्यवस्था को उद्योग का दर्जा देना, विधायी जंजाल साफ करना और निजी ऊर्जा निवेश को प्रोत्साहित करना। हालाँकि ₹25,000 करोड़ के निर्यात लक्ष्य की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करेगी कि डीप सी फिशिंग मिशन और झींगा निर्यात मिशन को ज़मीन पर कितनी तेज़ी से उतारा जाता है। IPP हिस्से में कटौती का फैसला निवेशक-अनुकूल संकेत ज़रूर है, लेकिन इससे राज्य की बिजली उपलब्धता पर दीर्घकालिक असर का आकलन अभी सामने नहीं आया है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा मरीन फिशिंग (OMFRA-2026) विधेयक क्या है?
यह 2026 में प्रस्तावित नया समुद्री मत्स्य कानून है, जो 1982 के पुराने ओडिशा मरीन फिशिंग रेगुलेशन एक्ट की जगह लेगा। इसमें समुद्री शैवाल विकास, मैरीकल्चर और तटीय सुरक्षा जैसे नए प्रावधान शामिल किए गए हैं।
ओडिशा सरकार 358 कानून क्यों निरस्त कर रही है?
ओडिशा राज्य विधि आयोग की सिफारिश पर 1974 से 2025 के बीच बने 358 कानूनों को निरस्त किया जाएगा, क्योंकि इनमें से अधिकांश के प्रावधान पहले ही मूल कानूनों में शामिल हो चुके हैं या ये विशेष परिस्थितियों के लिए बने थे और अब अप्रासंगिक हैं। इसके लिए ओडिशा रिपीलिंग बिल-2026 विधानसभा में लाया जाएगा।
ओडिशा थर्मल पावर पॉलिसी में क्या बदलाव हुआ है?
स्वतंत्र बिजली उत्पादकों (IPP) द्वारा सरकार को दिए जाने वाले अनिवार्य बिजली हिस्से को 12-14% से घटाकर 5% किया जाएगा। यह बदलाव केंद्र सरकार की सिफारिशों और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों की व्यवस्था के अनुरूप है।
ओडिशा का समुद्री खाद्य निर्यात लक्ष्य क्या है?
राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2036 तक समुद्री खाद्य निर्यात को ₹25,000 करोड़ तक पहुँचाना है। यह लक्ष्य 'विकसित ओडिशा विजन 2036-47' और राज्य की ब्लू इकोनॉमी पहल का हिस्सा है।
ओडिशा कैबिनेट की 20 मई 2026 की बैठक में कुल कितने और कौन-से विभागों के प्रस्ताव पास हुए?
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई बैठक में सात विभागों के 10 प्रस्तावों को मंजूरी मिली। इनमें प्रमुख रूप से कानून, ऊर्जा तथा मत्स्य एवं पशु संसाधन विकास विभाग शामिल थे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले