ओडिशा कैबिनेट ने 10 अहम प्रस्तावों को दी मंजूरी: मत्स्य, ऊर्जा और 358 पुराने कानून होंगे निरस्त
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा कैबिनेट ने बुधवार, 20 मई 2026 को भुवनेश्वर में हुई बैठक में कानून, ऊर्जा तथा मत्स्य एवं पशु संसाधन विकास विभाग सहित सात विभागों से जुड़े 10 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में समुद्री मत्स्य पालन, पुराने कानूनों के निरसन और थर्मल पावर नीति में बड़े बदलावों को हरी झंडी दी गई।
मत्स्य क्षेत्र में आधुनिक कानूनी ढाँचा
कैबिनेट ने ओडिशा मरीन फिशिंग (प्रतिबंध एवं विनियमन) विधेयक, 2026 (OMFRA-2026) को मंजूरी दी, जो वर्ष 1982 के पुराने ओडिशा मरीन फिशिंग रेगुलेशन एक्ट की जगह लेगा। मुख्य सचिव अनु गर्ग ने बताया कि नए कानून के तहत समुद्री संसाधनों के संरक्षण, तटीय सुरक्षा, समुद्री शैवाल विकास और मैरीकल्चर पर विशेष ध्यान दिया जाएगा — ये पहलू पूर्व कानून में शामिल नहीं थे।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने बजट में डीप सी फिशिंग मिशन और झींगा निर्यात मिशन की घोषणा की थी, जिसके मद्देनज़र यह नया कानून लाना आवश्यक था। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2036 तक समुद्री खाद्य निर्यात को ₹25,000 करोड़ तक पहुँचाना है, जो 'विकसित ओडिशा विजन 2036-47' और राज्य की ब्लू इकोनॉमी पहल के अनुरूप है।
358 पुराने कानूनों का होगा निरसन
कैबिनेट ने कानून विभाग के उस प्रस्ताव को भी मंजूरी दी, जिसके तहत वर्ष 1974 से 2025 के बीच बनाए गए 358 पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त किया जाएगा। सरकारी बयान के अनुसार, इनमें से अधिकांश संशोधन अधिनियम थे जिनके प्रावधान पहले ही मूल कानूनों में समाहित हो चुके हैं, जबकि कुछ विशेष परिस्थितियों के लिए बनाए गए थे और अब अप्रासंगिक हो चुके हैं।
ओडिशा राज्य विधि आयोग की सिफारिशों के आधार पर राज्य सरकार अब ओडिशा रिपीलिंग बिल-2026 लाएगी, जिसके ज़रिए इन सभी कानूनों को औपचारिक रूप से निरस्त किया जाएगा। यह कदम राज्य की विधायी संहिता को सुव्यवस्थित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार माना जा रहा है।
ऊर्जा क्षेत्र में थर्मल पावर नीति में बदलाव
कैबिनेट ने ओडिशा थर्मल पावर पॉलिसी-2008 में संशोधन के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी। इसके तहत स्वतंत्र बिजली उत्पादकों (IPP) द्वारा सरकार को अनिवार्य रूप से दिए जाने वाले बिजली हिस्से को 12-14 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया जाएगा। यह निर्णय केंद्र सरकार की सिफारिशों और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों की व्यवस्था के अनुरूप लिया गया है।
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब राज्य निजी बिजली निवेश को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, अनिवार्य हिस्से में कमी से IPP के लिए ओडिशा में निवेश अधिक व्यावसायिक रूप से आकर्षक बन सकता है।
आगे की राह
इन सुधारों के क्रियान्वयन के लिए संबंधित विधेयक विधानसभा में पेश किए जाएँगे। मत्स्य और ऊर्जा क्षेत्र में ये बदलाव ओडिशा की आर्थिक विकास रणनीति के केंद्र में हैं, और राज्य सरकार इन्हें 'विकसित ओडिशा' के दृष्टिकोण का अहम हिस्सा मानती है।