ओडिशा में धान खरीद में कांग्रेस ने लगाया बड़ा घोटाले का आरोप
सारांश
Key Takeaways
- कांग्रेस ने ओडिशा में धान खरीद में घोटाले का आरोप लगाया है।
- किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा है।
- सरकारी अधिकारियों और मिल मालिकों के बीच मिलीभगत की बात की गई है।
- कांग्रेस ने 1.13 लाख किसानों की चिंताओं को उठाया है।
- आंदोलन की चेतावनी दी गई है यदि सरकार कार्रवाई नहीं करती।
भुवनेश्वर, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ओडिशा के धान खरीद प्रणाली में मंगलवार को कांग्रेस ने बड़े पैमाने पर घोटाले का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने इस संदर्भ में किसानों को हुए नुकसान की बात करते हुए कहा है कि सरकारी अधिकारियों और खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता कल्याण मंत्री के बीच मिलीभगत का आरोप भी लगाया गया है।
प्रदेश किसान कांग्रेस के अध्यक्ष अभय कुमार साहू और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुदर्शन दास ने यह दावा किया कि इस खरीद प्रक्रिया में अनियमितताओं के चलते हजारों किसान अपनी सही आय से वंचित रह गए हैं। जबकि खरीद के लिए लक्ष्य निर्धारित थे, लगभग 1.13 लाख किसान अभी भी धान बेचने में असफल रहे हैं, जो इस व्यवस्था की गंभीर कमियों को दर्शाता है।
पार्टी ने मांग की है कि राज्य सरकार उन 1.13 लाख किसानों के लिए तुरंत कदम उठाए, जिन्होंने धान बेचने के लिए पंजीकरण कराया है। कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि चावल मिल मालिकों, खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों और सहकारी समितियों के बीच एक सांठगांठ स्थापित हो चुकी है, जिससे खरीद प्रक्रिया में धांधली और धन का दुरुपयोग हो रहा है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुदर्शन दास के अनुसार, पूरे राज्य में धान की खरीद के लिए एक '80:20 फॉर्मूला' का पालन किया जा रहा है। किसानों को यह आश्वासन दिया जाता है कि उनकी पूरी फसल खरीदी जाएगी, लेकिन वास्तविकता में उन्हें कुल राशि का 20 प्रतिशत हिस्सा मिल मालिकों को वापस लौटाने के लिए मजबूर किया जाता है।
पार्टी ने अनधिकृत कटौतियों का भी आरोप लगाया है, जिसमें मिल मालिक मनमाने तरीके से प्रति क्विंटल 10-11 किलोग्राम की कटौती कर रहे हैं। 76.84 लाख मीट्रिक टन से अधिक की खरीद के आंकड़ों और प्रति क्विंटल 8 किलोग्राम की कटौती के आधार पर, कांग्रेस ने यह दावा किया कि इन कटौतियों का अर्थ है कि किसानों से लगभग 6 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त धान लिया गया है, जिसकी कीमत 1,500 करोड़ रुपए से अधिक है।
कांग्रेस नेताओं ने जलेश्वर की एक सहकारी समिति में लगभग 46.5 लाख रुपए की अनियमितताओं का आरोप लगाया और यह कहा कि राज्य की 4,277 सहकारी समितियों में से अधिकांश में ऐसी ही प्रथाएं चल रही हैं।
कांग्रेस ने आगे आरोप लगाया कि यह घोटाला संबंधित मंत्री की जानकारी में और अधिकारियों तथा सत्ताधारी पार्टी के नेताओं की मिलीभगत से हो रहा है। यदि सरकार सभी किसानों से धान खरीदने और व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार को समाप्त करने में असफल रहती है, तो अप्रैल में पूरे राज्य में आंदोलन शुरू किया जाएगा।