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क्या इटावा हिंसा पर ओम प्रकाश राजभर का बयान कानून के राज की पुष्टि करता है?

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क्या इटावा हिंसा पर ओम प्रकाश राजभर का बयान कानून के राज की पुष्टि करता है?

सारांश

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इटावा में कथावाचक के साथ हुए अमर्यादित व्यवहार पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कानून का राज है और जो भी गलत करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। जानिए इस मामले में उनका क्या कहना है।

मुख्य बातें

कानून का राज का महत्व जातीय तनाव को कम करने की आवश्यकता सख्त प्रशासनिक कदम राजनीतिक बयानबाजी का सामाजिक प्रभाव संविधान का पालन करना सभी का कर्तव्य है

लखनऊ, 27 जून (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने इटावा में हुए कथावाचक के साथ अमर्यादित व्यवहार पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि कानून का राज है और जो भी गलत करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में राजभर ने इटावा के बकेवर थाना क्षेत्र में कथावाचक मुकुट मणि यादव के साथ हुई बदसलूकी और 26 जून को हुए पथराव तथा पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं की निंदा की। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) और इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि वे जातीय तनाव को बढ़ावा दे रहे हैं।

इटावा के दादरपुर गांव में 21 जून को कथावाचक मुकुट मणि यादव और उनके सहयोगी संत कुमार यादव के साथ बदसलूकी और मारपीट की घटना हुई थी। आरोप है कि गांव के कुछ लोगों ने कथावाचक का सिर मुंडवाकर उनका अपमान किया और उन पर "गांव को अपवित्र" करने का आरोप लगाया। इस घटना के बाद 26 जून को 'अहीर रेजिमेंट' और अन्य ने गांव में प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस पर पथराव हुआ, पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। प्रदर्शनकारियों ने आगरा-कानपुर नेशनल हाई-वे जाम कर दिया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हवाई फायरिंग की और कई उपद्रवियों को गिरफ्तार किया।

ओम प्रकाश राजभर ने कहा, "हम ऐसी घटनाओं की कड़ी निंदा करते हैं। चाहे वह कथावाचक के साथ हुई बदसलूकी हो या फिर 26 जून की पत्थरबाजी और पुलिस वाहनों को तोड़ने की घटना। कानून का राज है और संविधान के तहत सरकार चल रही है। कोई भी कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता।"

उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन को इस तरह की घटनाओं पर सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए।

उन्होंने प्रदर्शनकारियों के पथराव और पुलिस के साथ अभद्रता को गलत ठहराते हुए कहा, "पुलिस की गाड़ियां तोड़ना, पत्थरबाजी करना अन्याय है। अगर कोई गलत करता है, तो कानून अपना काम करेगा। इसके बाद वही लोग चिल्लाएंगे कि उनकी जाति के साथ अन्याय हो रहा है।"

राजभर ने जोर देकर कहा कि सरकार कानून के दायरे में काम करेगी और किसी भी तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर जातिवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अखिलेश ने कथावाचक को 51,000 रुपए की आर्थिक मदद देकर केवल एक पक्ष का समर्थन किया, जबकि दोनों पक्षों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। अगर अखिलेश पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) की बात करते हैं, तो उन्हें दोनों पक्षों को बराबर सम्मान देना चाहिए था। केवल यादव समुदाय को समर्थन देना और ब्राह्मण पक्ष को नजरअंदाज करना कहां का पीडीए है?"

राजभर ने दावा किया कि सपा की सरकार में दंगे और जातीय तनाव आम थे, और अब भी वे उसी तरह की राजनीति कर रहे हैं।

राजभर ने कहा कि महात्मा बुद्ध, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, छत्रपति शाहूजी महाराज, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. बी.आर. अंबेडकर जैसे महापुरुषों ने शांति और समानता का संदेश दिया। संविधान में इनके विचार शामिल हैं। हमें संविधान का पालन करना चाहिए। कोई भी गलत करेगा, तो कानून उसका हिसाब करेगा।"

उन्होंने जोर दिया कि सरकार संविधान के अनुसार काम कर रही है और किसी भी जाति या समुदाय के साथ भेदभाव नहीं करती।

कांवड़ यात्रा के दौरान दुकानों पर नेमप्लेट लगाने और खुले में मांस बिक्री पर रोक के योगी सरकार के आदेश पर राजभर ने कहा, "यह फैसला शांति और सामंजस्य बनाए रखने के लिए लिया गया है। कांवड़ यात्रा आस्था का प्रतीक है। सरकार का मकसद विवाद से बचना और सभी के लिए शांतिपूर्ण माहौल सुनिश्चित करना है।"

आरएसएस नेता दत्तात्रेय होसबोले के इस बयान पर कि संविधान से 'समाजवाद' और 'धर्मनिरपेक्ष' शब्दों को हटाने पर विचार होना चाहिए, राजभर ने कहा, "यह उनका व्यक्तिगत मत हो सकता है। लेकिन, संविधान में सभी को अपने धर्म और अपनी संस्कृति के अनुसार पूजा-पाठ का अधिकार है। समाजवाद का मतलब है जातिवाद को खत्म करना। अगर नाम के आगे जाति हटाने से जातिवाद खत्म होता है, तो इसमें क्या बुराई है?"

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि इटावा में हुई घटनाएँ केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि पूरे देश में सामाजिक सौहार्द पर असर डाल सकती हैं। हमें सभी समुदायों के बीच संवाद और समझ को बढ़ावा देने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इटावा में क्या हुआ था?
इटावा में कथावाचक मुकुट मणि यादव के साथ बदसलूकी और पथराव की घटनाएँ हुईं, जिससे तनाव पैदा हुआ।
ओम प्रकाश राजभर का इस पर क्या कहना है?
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि कानून का राज है और जो गलत करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
क्या सरकार ने कोई कदम उठाए हैं?
सरकार ने पुलिस और प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि ऐसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई की जाए।
क्या अखिलेश यादव पर आरोप लगाए गए हैं?
हाँ, राजभर ने अखिलेश यादव पर जातीय तनाव को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।
कानून के राज का क्या मतलब है?
कानून का राज का मतलब है कि सभी नागरिकों को कानून का पालन करना चाहिए और किसी भी प्रकार की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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